(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 06 September 2020


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सौर ऊर्जा में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा निवेश

  • सूर्य से प्राप्त शक्ति को सौर ऊर्जा कहते हैं। इस ऊर्जा को उष्मा या विद्युत में बदलकर अन्य प्रयोगों में लाया जाता है। इसके लिए सोलर पैनलों की आवश्यकता होती है।
  • भारत की भौगोलिक स्थिति ऐसी है, जहाँ साल में करीब 300 दिन जमीन पर धूप रहती है जो ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है।
  • भारतीय भू भाग पर पांच हजार लाख किलोवाट घंटा प्रति वर्ग मीटर के बराबर सौर ऊर्जा आती है। एक मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए लगभग तीन हेक्टेयर समतल भूमि की जरूरत होती है।
  • सौर ऊर्जा श्योर, प्योर और सिक्योर हैं । श्योर इसलिए क्योंकि सूर्य हमेशा चमकता है, प्योर इसलिए क्योंकि यह पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करता है, सिक्योर इसलिए क्योंकि यह हमारे जरूरतों को सुरक्षित करता है।
  • भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए अपने नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसीकारण भारत सरकार ने 2022 के अंत तक 175 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने का टारगेट रखा है। इसमें से सौर ऊर्जा से 100 गीगावॉट, पवन ऊर्जा से 60 गीगावॉट, बायोमास ऊर्जा से 10 गीगावॉट और लघु जलविद्युत परियोजनाओं से 5 गीगावाट ऊर्जा प्राप्त करने का लक्ष्य है।
  • 2040 तक भारत आबादी के मामले में चीन को पीछे छोड़ सकता है, ऐसे में ऊर्जा की मांग भी अधिक होगी। वर्ष 2035 तक ही सौर ऊर्जा की मांग में 7 गुना वृद्धि होने की संभावना है।
  • बढ़ता सौर ऊर्जा देश की GDP को बढ़ाने में तो सक्षम होगा ही भारत को ऊर्जा का निर्यातक देश भी बना सकता है।
  • सौर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए विद्युत या गैस ग्रिड की आवश्यकता नहीं होती है, और एक सौर ऊर्जा निकाय को कहीं भी स्थापित किया जा सकता है।
  • सौर ऊर्जा पैनलों को आसानी से घरों पर कहीं भी रखा जा सकता है, इसलिए ऊर्जा के स्रोतों की तुलना में यह काफी सस्ता होता है।
  • अड़ानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) भारत की नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाली अड़ानी ग्रुप की एक प्रमुख कंपनी है।
  • इस कंपनी की स्थापना वर्ष 2015 में की गई थी। इसका हेडक्वाटर अहमदाबाद में है।
  • यह कंपनी एक्ट 2013 के तहत शासित होती है।
  • यह कंपनी पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा के कई प्राजेक्ट पर कार्य कर रही है और कई प्रोजेक्ट से ऊर्जा उत्पादन प्रारंभ हो गया है।
  • पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा के 46 प्रोजेक्ट 11 राज्यों में चल रहे है।
  • वर्ष 2019 में AGEL भारत की पहली कंपनी थी जिसने विदेशी निवेश के लिए US Dollar Green Bonds जारी किये थे।
  • यह बांड्स सिंगापुर एक्सचेंज सिक्योरिटी ट्रेडिंग लिमिटेड (SGX- ST) पर अक्टूबर 2019 में लिस्टेड हुए थे।
  • हाल में यह सूचना आई है कि AGEL विश्व की सबसे बड़ी सोलर डेवलपर कंपनी बन गई है। दरअसल जून माह में AGEL ने 8 गीगावॉट सोलर एनर्जी उत्पादन करने की बोली (कांट्रेक्ट) सरकार से प्राप्त किया है। इसके बाद वैश्विक कंपनियों की सूची में यह पहले स्थान पर आ गई है।
  • यह रैंकिंग Mercom Capital Group द्वारा जारी किया गया है।
  • दूसरे स्थान पर हांगकांग की कंपनी GCL New Energy Limited है।
  • अभी कुछ समय पहले सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया ने सोलर एनर्जी का कांट्रेक्ट जारी किया था जिसे अड़ानी ग्रुप ने प्राप्त किया।
  • कंपनी के मुताबिक उसे विश्व का सबसे बड़ा सोलर पावर प्लांट बनाने का ठेका मिला है। इसके तहत कंपनी 8000 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट तैयार करेगी और 2000 मेगावॉट की एक घरेलू सौर पैनल विनिर्माण क्षमता को स्थापित करेगी।
  • कंपनी के अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में यह अपनी तरह का सबसे बड़ा ठेका है, जिसके लिए कंपनी द्वारा 45000 करोड़ रूपये का निवेश किया जायेगा जिससे 4 लाख लोगों को प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।
  • इस ठेके के साथ ही अड़ानी ग्रीन एनर्जी की कुल परिचालन क्षमता 15 गीगावॉट की हो गई है।
  • यह सोलर पैनल प्रमुखतः राजस्थान एवं गुजरात में लगाये जा सकते है।
  • कंपनी 2025 तक 25 गीगावॉट उत्पादन क्षमता हासिल करना चाहती है।
  • अड़ानी ग्रुप द्वारा 8 गीगावाट का पॉवर प्लांट अगले 5 साल में तैयार किया जायेगा।
  • पहला 2 गीगावाट पॉवर प्लांट वर्ष 2022 तक तैयार किया जायेगा उसके बाद हर साल 2 गीगावॉट क्षमता स्थापित की जायेगी।
  • SECI- Solar Energy Corporation of India Ltd. भारत सरकार की एक कंपनी है जो मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्युवल एनर्जी के अंतर्गत आती है।
  • इसकी स्थापना 9 सितंबर 2011 को की गई थी जो सोलर एनर्जी के क्षेत्र में कार्य करती है।
  • अभी कुछ समय पहले 750 मेगावॉट की रीवा सौर परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किया गया था। इस पार्क को रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड ने विकसित किया। यह ‘मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड’ और ‘सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ (SECI) की संयुक्त उद्यम कंपनी है।
  • भारत में इस समय जिस सेक्टर में सबसे तेजी से विकास हो रहा है उसमें सोलर एनर्जी प्रमुख सेक्टर है।
  • भारत में सोलर एनर्जी एक और कारण से चर्चा में बना हुआ है।
  • हाल ही में CSIR-CMERI द्वारा विश्व के सबसे बड़े Solar Tree का निर्माण किया गया है।
  • इसका विकास CMERI (Central Mechanical Engineering Research Institute) दुर्गापुर एवं CSIR (Council of Scientific and Industrial Research) द्वारा किया गया है।
  • इसे CSIR-CMERI रेजिडेंशियल कॉलोनी में लगाया जायेगा।
  • इस पर पत्तियों के रूप में 35 सोलर फोटोवोल्टिक पैनल लगे हैं। प्रत्येक पैनल की क्षमता 330 वॉट पावर की है।
  • सरकार द्वारा सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन को संचालित किया जा रहा है।
  • इसे जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन योजना के नाम से भी जाना जाता है जिसकी शुरूआत वर्ष 2009 में हुई थी।
  • इसका लक्ष्य वर्ष 2022 तक 20 हजार मेगावॉट क्षमता वाली ग्रिड से जोड़ी जा सकने वाली सौर बिजली की स्थापना और 2 हजार मेगावॉट के समतुल्य गैर ग्रिड सौर संचालन के लिए नीतिगत कार्य योजना का विकास करना है।
  • वर्ष 2015 में भारत सरकार ने ISA- International Solar Alliance की स्थापना की थी।
  • यह कर्क और मकर रेखा के मध्य आंशिक या पूर्ण से स्थित 122 सौर ऊर्जा संपन्न देशों का एक अंतर सरकारी संगठन है। इसका मुख्यालय गुरूग्राम (हरियाणा) है।
  • ISA से जुड़े 67 देश इसमें शामिल हो गये है और फ्रेमवर्क की पुष्टि कर दी है।
  • ISA के प्रमुख उद्देश्यों में 1000 गीगावॉट से अधिक सौर ऊर्जा उत्पादन की वैश्विक क्षमता प्राप्त करना है।
  • सरकार द्वारा सोलर रूफटॉप योजना को संचालित किया जा रहा है। इसके तहत सामान्य श्रेणी वाले राज्यों में आवासीय, संस्थागत, एवं सामाजिक क्षेत्रें के लिए वित्तीय सहायता सोलर पैनल के लिए दी जाती है।
  • स्मार्ट सिटी के विकास के लिए रूफटॉप सोलर पैनल एवं 10 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा के प्रावधान को अनिवार्य किया गया है।
  • सौर ऊर्जा में इन संभावनाओं के साथ कई चुनौतियाँ भी है-
  1. सौर पॉवर प्लांट के लिये जमीन की कमी
  2. फोटो वोल्टेइक सेल का आयात
  3. सोलर उपकरण का महंगा होना
  4. सोलर पैनल लगाने का खर्च अधिक होना
  5. कमटिकाऊ होना एवं कुशल मानव संसाधन का अभाव होना।