Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 06 May 2020


Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 06 May 2020



शराब पर राज्यों की मजबूरी

  • शराब का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है तथा कृषि के इतिहास एवं पश्चिमी सभ्यता में इसका संबंध जोड़ा जाता है !
  • वर्तमान समय में अंगूर पर आधारित किण्वित पेय का सबसे पुराना अस्तित्व 7 हजार ईसा पूर्व चीन में होना सिद्ध होता है !
  • वर्तमान समय में शराब को कुछ लोग स्वास्थ्य के नजरिए से पीते हैं तो अधिकांश के पास अपनी आदतें होती हैं !
  • भारत ही नहीं पूरे विश्व में आज इंटरनेट के बाद जिस वस्तु की डिमांड सर्वाधिक है उसमे शराब शामिल है !
  • ठंडे क्षेत्रों में शराब शरीर को गर्म और एक्टिव रखने में सहायक मानी जाती है इसलिए इन्हीं क्षेत्रों में शराब ज्यादा पी जाती है ! माल्डोवा (17.4 L), बेलारूस (17.1 L), लिथुआनिया (16.2 L), रूस (14.5 L), चेक रिपब्लिक (14.1L) रोमानिया (12.9L), सर्बिया (12.9L), ऑस्ट्रेलिया (12.6L) सर्वाधिक शराब पीने वाले देश हैं !
  • विश्व के 10 अग्रणी शराब पीने वाले देशों का औसत 15 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष है वहीं भारत में यह औसत 4.3 लीटर है !
  • जौ से बने ड्रिंक को बियर, अंगूरों में फर्मेंटेशन की प्रक्रिया से बने ड्रिंक को वाइन और डिस्टिल्ड प्रोसेस ( आसवन विधि ) से बनने वाले व्हिस्की या फिर आम बोलचाल की भाषा में शराब भी कहा जाता है !
  • सेब और नाशपाती से बनने वाले ड्रिंक को साइडर तथा चावल से बनने वाली ड्रिंक को सेक ड्रिंक कहा जाता है !
  • दूसरी लॉक डाउन से ही कई राज्यों में सरकारों और पूरे देश में लोगों के द्वारा शराब की दुकानों को खोलने की बात की जा रही है !
  • कई समीक्षक इसे खाद्य की श्रेणी में मानते हैं तो कई इसे राजस्व का एक प्रमुख स्रोत ! तभी से इस पर बहस प्रारंभ हो गई थी ! अब जब सरकार ने शराब की दुकानों को खोल दिया है तब सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ रही हैं ! इसलिए हमें यहां पर सरकार के तर्कों को भी समझना होगा !
  • Food Safety and Standard Act 2006 के अंतर्गत Alcoholic Beverages को खाद्य (Food) के अंतर्गत शामिल किया जाता है !
  • इसलिए कुछ राज्यों में इसकी बिक्री भी प्रारंभ हो गई ! हालांकि बाद में रोक दी गई !
  • लॉक डाउन के कारण राजस्व के सभी स्रोत बंद है ऐसे में शराब से राजस्व प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है !
  • कुछ राज्यों में उनके राजस्व का 20% से अधिक हिस्सा सिर्फ शराब का है !
  • तमिलनाडु 28%, केरल 23.7%, उत्तर प्रदेश 23%, कर्नाटक 20.5% ऐसे ही कुछ राज्य हैं !
  • राजस्व का प्रमुख स्रोत होने के कारण ही इसे GST के अंतर्गत नहीं लाया गया है !
  • दिल्ली सरकार ने वित्त के अभाव के कारण आवश्यक सैलरी खर्च के अलावा सभी प्रकार के खर्च बंद कर दिए !
  • केरल ने भी अपनी वित्तीय स्थिति खराब होने की बात कही और यह बताया कि राज्य की उच्च दर पर बाजार से पैसा उधार लेना पड़ रहा है !
  • पंजाब ने भी दूसरे लोगों के दौरान इसे चालू करने की बात कही !
  • एक समस्या यह भी थी कि नकली शराब और सैनिटाइजर पीने का चलन बढ़ रहा था और कई स्वास्थ्य जनित समस्याएं उत्पन्न हो रही थी !
  • केरल और मेघालय से शराब के लती व्यक्तियों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं भी सामने आई !
  • पंजाब , गोवा, त्रिपुरा, केरल, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदि प्रति व्यक्ति उपभोग के अग्रणी राज्य हैं !
  • शराब की दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन ना होने के बावजूद राज्य सरकारें कई तरह के विरोध का सामना करते हुए भी इसे खोल रही है !
  • दिल्ली ने शराब बिक्री पर 70% विशेष कोरोना शुल्क (Special Corona Fee) लगाया है !
  • इसी प्रकार अन्य राज्य भी शराब पर अन्य प्रकार के शुल्क लगाकर राजस्व प्राप्त कर रही है !
  • UP ने घुमंतू पशुओं के रखरखाव जैसे विशेष उद्देश्यों के लिए Special duty on Liquor लगाया है !
  • तमिलनाडु शराब की बिक्री पर उत्पाद शुल्क Excise Duty के साथ VAT भी लगाता है !
  • राज्य विदेशी शराब पर विशेष शुल्क लेते हैं !
  • RBI की एक रिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि अधिकांश राज्यों के कुल राजस्व का 10-15 % हिस्सा शराब पर लगने वाले उत्पाद शुल्क से आता है !
  • RBI की रिपोर्ट से ही पता चलता है कि वर्ष 2019-20 के दौरान 29 राज्यों और दिल्ली तथा पुदुचेरी केंद्र शासित राज्यों ने शराब उत्पाद शुल्क से संयुक्त रूप से 175501 करोड़ रुपए का अनुमानित बजट रखा था !
  • वर्ष 2018-19 के आंकड़ों के अनुसार उत्पाद शुल्क से सर्वाधिक राजस्व प्राप्ति UP (25100 करोड रुपए ) कर्नाटक (19750), महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को हुई !

अफ्रीकन स्वाइन फीवर

  • अफ्रीकन स्वाइन फीवर ( African Swine Fever-ASF) घरेलू और जंगली सूअरों में होने वाली अत्यधिक संक्रामक बीमारी है ! हालांकि मानव में इसका प्रसार नहीं होता है !
  • यह एसफेर बिरिडे परिवार के DNA वायरस के कारण होता है ! Covid-19 एक RNA वायरस है !
  • इसके कारण उच्च तीव्रता का बुखार आता है, भूख में कमी आती है, त्वचा में रक्त स्राव तीव्र हो जाता है !
  • इसका प्रसार घरेलू या जंगली सूअरों के साथ संपर्क मे आने से, दूषित सामग्री जैसे खाद्य अपशिष्ट, कचरा आदि के माध्यम से फैल सकता है !
  • इसका प्रारंभ भारत में नवंबर-दिसंबर 2019 में हुआ था लेकिन अब इसकी तीव्रता बढ़ गई है !
  • अरुणाचल प्रदेश और असम में इसका प्रसार तेज है और इसकी वजह से लगभग 3,000 सूअरों की मृत्यु हो चुकी है ! इस बीमारी की Mortality-rate 100% है !
  • भारत के संदर्भ में यह बीमारी इस लिए घातक है क्योंकि पूर्वोत्तर सूअर पालन एक प्रमुख व्यवसाय है और लगभग 20 लाख सूअरों का पालन किया जाता है !
  • दरअसल पूर्वोत्तर क्षेत्र में Pork की मांग ज्यादा है !
  • तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र को Xizang स्वायत्त क्षेत्र के नाम से जाना जाता है, इसकी सीमाएं भारत से लगती हैं !
  • कई समीक्षकों का मानना है कि यह चीन से भारत में आया है ! चीन ने हालांकि इसकी जिम्मेदारी इंडोनेशिया पर डाल दिया है !
  • सबसे पहला इसका आउटब्रेक 1907 में अफ्रीका में देखा गया था, वहीं से यह नाम प्रचलित हो गया !
  • इसके बाद 1957 पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन मे यह घातक रूप से फैला था !

10 PM Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 06 May 2020


RCEP में शामिल होगा भारत ?

  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व दो खेमों में विभाजित हो गया ! एक खेमे का नेतृत्व अमेरिका कर रहा था तो दूसरे का USSR !
  • धीरे-धीरे यह खेमें अपने-अपने विचारधारा के अर्थव्यवस्था वाले देशों को जोड़ते गए लेकिन अंततः जीत पूंजीवादी/ बाजारवादी अर्थव्यवस्था की हुई !
  • समय के साथ अमेरिका का वर्चस्व बढ़ता गया और ऐसे में जरूरत थी आर्थिक राजनीतिक संतुलन की ! इसी के परिणाम स्वरूप क्षेत्रीय संगठनों का निर्माण हुआ !
  • क्षेत्रीय संगठन सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ाकर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाकर आर्थिक संपन्नता (Economic Prosperity ) लाने में सहायक होते हैं !
  • इस प्रकार के संगठन से न सिर्फ शक्ति संतुलन बना रहता है बल्कि एकता की भावना भी मजबूत होती है !
  • एक दूसरे के वस्तुओं का व्यापार आसानी से होता है इस वजह से मानव विकास तेजी से होता है !
  • सांस्कृतिक एवं सामाजिक जुड़ाव बढ़ने के कारण किसी विवाद का निपटारा आसानी से हो जाता है !
  • कुल मिलाकर इसका उद्देश्य वस्तु एवं सेवा व्यापार, निवेश, आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग, बौद्धिक संपदा का संवर्धन एवं विवाद का समाधान करना होता है !
  • इसी प्रकार के क्षेत्रीय संगठन आसियान ( ASEAN-Association of Southeast Asian Nations) की स्थापना 1967 में हुई थी !
  • वर्तमान समय में इसके 10 सदस्य देश - इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रूनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार, कंबोडिया है !
  • इसके तीन स्तंभ - आसियान की राजनीतिक सुरक्षा, आर्थिक संवर्धन एवं सामाजिक संस्कृति को बढ़ावा देना है !
  • इसका आदर्श वाक्य - वन विजन, वन आईडेंटिटी, वन कम्यूनिटी है !
  • आसियान राष्ट्रों का 6 भागीदार देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता है यह देश हैं - चीन, दक्षिण कोरिया, जापान, भारत, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड !
  • आसियान और इसके 6 मुक्त व्यापार समझौता (FTA) के भागीदार सदस्यों के बीच व्यापार नियमों को उदार एवं सरल बनाने के लिए एक समझौते की औपचारिक शुरुआत 2012 से हुई ! इसका नाम RCEP ( Regional Comprehensive Economic Partnership ) अर्थात क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी है !
  • इस साझेदारी का उद्देश्य आर्थिक संबंधों को मजबूत करना, व्यापार एवं निवेश से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देना और आधुनिक, व्यापक उच्च गुणवत्ता पूर्ण आर्थिक व्यवहारों को बढ़ाना था !
  • यदि यह समझौता संपन्न हो जाता है तो यह विश्व के 25% GDP एवं 30% वैश्विक व्यापार वाला संगठन होगा ! जिसमें लगभग 5 अरब लोग की भागीदारी होगी !
  • इस समझौते के लिए कई बैठकें हुई जिससे सभी देशों की चिंताओं को दूर किया जा सके !
  • नवंबर 2019 में भारत ने यह निर्णय लिया कि वह इसमें शामिल नहीं होगा !
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि RCEP अपने मूल उद्देश्यों को प्रतिबिंबित नहीं करती है और इसके परिणाम न तो उचित है और न ही संतुलित !
  • इसके बाद यह संभावना थी कि बचे 15 देश 2020 तक यह समझौता कर लेंगे ! लेकिन अभी तक यह समझौता नहीं हुआ है और हाल ही के दिनों में भारत को इसमें शामिल करने के प्रयास बढ़ गए हैं !
  • भारत इस लिए तैयार नहीं हुआ क्योंकि भारत ने कोरिया, मलेशिया और जापान जैसे देशों के साथ जो मुक्त व्यापार समझौता किया था उसका कोई विशेष लाभ प्राप्त नहीं हुआ ! अर्थात निर्यात तो नहीं बढ़ा आयात अवश्य बढ़ गया !
  • भारत RCEP देशों के साथ पहले से ही व्यापार घाटे में है और अब अधिक मुक्त नीतियों को अपनाने के बाद स्थिति और बिगड़ सकती है !
  • चीन से वस्तुओं का आयात बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा भारत टैरिफ की दर बढ़ाकर इसे रोक नहीं पायेगा !
  • टैरिफ की कमी और समाप्ति को RCEP के ज्यादातर सदस्य 92% वस्तुओं पर शून्य प्रशुल्क लगाने की बात कर रहे हैं ! जबकि भारत इसके लिए तैयार नहीं है !
  • भारतीय कृषि और उद्योग इस प्रतिस्पर्धा को झेल पाने में सक्षम नहीं है !
  • RCEP के तहत प्रशुल्क का आधार वर्ष 2013 होगा अर्थात 2014 से 2019 तक जो वृद्धि की गई उस में कटौती करनी होगी !
  • भारत रैचेट ओष्लिगेशन से मुक्ति चाहता है जो नहीं मिल रही है ! इसका अर्थ यह होता है कि कोई देश यदि व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर देता है और टैरिफ कम या हटाता है तो वह इस फैसले से वापस नहीं हट सकता है !
  • भारत आसियान के सेवा क्षेत्र को खोलने की बात कर रहा है जिसके लिए यह देश पूर्णतः तैयार नहीं है या इसके एवज में वह भारत का बाजार चाहते हैं !
  • मूल देश के नियम की प्रतिबद्धता की मांग भी भारत करता है ! इसके तहत कौन सदस्य देशों ( जिन पर शुल्क कम हुए अथवा लागत ही ना हो ) के माध्यम से चीन की वस्तुएं देश में आने से रोकने हेतु मूल देश के सख्त नियम हो !
  • न्यूजीलैंड डेयरी उत्पादों- दूध, पाउडर, मक्खन, पनीर का बड़ा निर्यातक है ! मुक्त व्यापार से भारत का डेयरी क्षेत्र प्रभावित हो सकता है और 50 मिलियन लोग रोजगार विहीन हो सकते हैं !
  • कपड़ा/ वस्त्र उद्योग में भारत चीन, वियतनाम, बांग्लादेश एवं दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के साथ पहले से ही परेशानी का सामना कर रहा है यह कठिनाई और अधिक बढ़ सकती है !
  • चाय, कॉफी, रबड़, इलायची एवं काली मिर्च आदि का सेक्टर मुक्त व्यापार के नजरिए से संवेदनशील है यह और प्रभावित हो सकता है !
  • RCEP के सदस्य देशों का मानना है कि भारत के बिना यह समझौता प्रभावी नहीं हो पाएगा !
  • इसी के तहत इन देशों के द्वारा भारत को मनाने के लिए एक ऑफर प्रस्तुत किया गया है !
  • RCEP ने कहा है कि भारत ने 2014 के बाद जो टैरिफ लगाया था उसे लागू रख सकता है ! हालांकि कुछ वस्तुओं पर न कि सभी पर !
  • भारत Volume Based Safeguard Mechanism अपना सकता है !
  • भारत 15 मई तक यदि सकारात्मक रुख दिखाता है तो भारत की चिंताओं को दूर किया जा सकता है !
  • भारत के मांग पर विचार करने के लिए RCEP तैयार है !

क्या भारत को इसमें शामिल होना चाहिए ?

  • जिस तरह Covid-19 के कारण चीन की छवि प्रभावित हुई है भारत को इसका फायदा उठाना चाहिए और चीन से बाहर जाने वाली कंपनियों को यहां लाकर अपना उत्पादन RCEP सदस्य देशों को बेचकर लाभ उठाना चाहिए !
  • भारत का निर्यात पिछले 5 वर्षों से गति हीन है उसे गति मिल सकती है !
  • भारत को संवेदनशील क्षेत्रों के लिए रियायतो और सुरक्षा उपायों पर सहमति बना कर आगे बढ़ना चाहिए !
  • प्रस्तावित टैरिफ कटौतीयों को 5 से 10 वर्ष की अवधि के लिए चरणबद्ध किया जा सकता है जब तक हमारे सभी सेक्टर प्रतिस्पर्धी ना हो जाएं !
  • इससे न सिर्फ भारत (Global Trade Chain ) का हिस्सा बनेगा बल्कि निवेश का आकर्षक स्रोत बन सकता है !
  • भारत अपने उन अवरोधों को दूर कर पाएगा जिसके कारण हमारा व्यापार प्रभावित होता है !