(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 06 August 2020


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हिरोशिमा और नागासाकी पर हमले की कहानी

  • जापान एक द्विपीय देश है जिसके अधिकांश द्वीपों का निर्माण ज्वालामुखी क्रिया से हुआ है।
  • 4 बड़े द्वीप-होंशु, होक्कैडो, क्यूशू, शिकोकु इस देश के प्रमुख द्वीप हैं जो जापान के लगभग 97 प्रतिशत भाग का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • जापान के लोगों को दुनिया में सर्वाधिक मेहनती और जुनूनी माना जाता है तथा इन्हें अपनी दृढ़ प्रतिज्ञा के लिए जाना जाता है ।
  • अन्य देशों की तरह जापान भी 1880 से पहले कई साम्राज्यों में बटा हुआ था। लेकिन इसके बाद जापान का एकीकरण किया गया और इम्पीरियल आर्मी ऑफ जापान की स्थापना की गई है।
  • इस एकीकरण और सैन्य मजबूती ने जापान को आक्रमक और विस्तार की नीति अपनाने वाले देश के रूप में बदल दिया और राष्ट्रीयता की भावना मजबूत होती गई।
  • 1894-1895 में जापान ने चीन को और 1904-05 में जापान ने रूस को हराया।
  • प्रथम विश्वयुद्ध में इसने बहुत सीमित रूप से भाग लिया और अपनी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने का कार्य कर इस दौर में किया।
  • 1936 के बाद जापान की सत्ता पर सैनिक अधिकारियों का प्रभाव बढ़ा और 1937 में जापान ने चीन पर पुनः आक्रमण कर दिया और मानवता को शर्मशार किया। ‘नानकिंग नरसंहार’ (Nanking Massacre) इसी आक्रमण से संबंधित है।
  • 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारंभ हुआ और जर्मनी, जापान, इटली का गठजोड़ बना। इन्हें धुरी राष्ट्र के नाम से बने गठबंधन का हिस्सा माना गया।
  • विजयी देश या सबसे ताकतवर देश के रूप में अपनी पहचान बनाने के लिए शक्ति का प्रदर्शन करना होता है। यही काम पूर्व में जापान एवं पश्चिम में जर्मनी द्वारा किया जा रहा था ।
  • धीरे-धीरे मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र एक दूसरे को तबाह करने के संघर्ष में बढ़ते चले गये। अमेरिका अभी सक्रिय रूप में इस युद्ध में शामिल नहीं था ।
  • 7 दिसंबर, 1941, रविवार के दिन सुबह 8 बजे पर्ल हार्बर पर जापान के हमला कर दिया। इसमें कई हजार अमेरिकी मारे गये और अमेरिका की भारी क्षति हुई।
  • अगले दिन अर्थात 8 दिसंबर 1941 को अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रेंकलिन रूजबेल्ट ने कांग्रेस की बैठक बुलाई और कहा कि अमेरिका यह दिन कभी नहीं भूलेगा साथ ही अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध में शामिल होने की घोषणा कर दिया।
  • प्रारंभ में जापान और जर्मनी तेजी से आगे बढ़े। जर्मनी ने यूरोप के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया या वहीं जापान एशिया प्रशांत महासागर के एक बड़े हिस्से कर रहा था ।
  • अमेरिका के पूरी तरह युद्ध में शामिल होने से मित्र राष्ट्रों की शक्ति में इजाफा हुआ तो जर्मनी और जापान कमजोर पड़ने लगे।
  • 1942 में हवाई के पास जापानी सेना की और 1943 में स्टालिनग्राद में जर्मन सेना की पराजय के बाद मित्र राष्ट्र धुरी राष्ट्रों पर हावी होने लगे।
  • अगले दो सालों में जर्मनी की हार तय हो गई और 29-30 अप्रैल 1945 की रात हिटलर ने अपनी प्रेमिका एफा ब्राउन के साथ आत्महत्या कर लिया ।
  • हिटलर की मृत्यु के बाद जर्मनी ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया। इस तरह यूरोप में तो युद्ध रूका लेकिन एशिया में अभी भी जारी था।
  • जापान की भी कमर तो टूट चुकी थी लेकिन वह घुटने टेकने के लिए तैयार नहीं था।
  • जर्मनी की पराजय के बाद बर्लिन से सटे पोट्सडाम नगर में 17 जुलाई से 15 दिन के लिए एक शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ।
  • 16 जुलाई को अमेरिका ने यूरेनियम परमाणु बम का सफल परीक्षण किया।
  • इस समय अमेरिका में राष्ट्रपति थे हैरी ट्रूमैन (Harry S. Truman)।
  • इस सम्मेलन में यह बात भी सामने आई कि एक परमाणु बम लिटिल बॉय प्रशांत महासागर के तिनियान द्वीप पर भेजा जा रहा है।
  • सोवियत संघ के नेता स्टालिन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विस्टन चर्चिल इस बम के विषय में जानकर थोड़ा चिंतित हुए क्योंकि जापान की आम जनता को बहुत नुकसान हो सकता था।
  • स्टालिन ने बड़े सहज भाव से ट्रूमैन (Truman) से यह आग्रह किया वह इसका सदुपयोग करे न कि दुरूपयोग।
  • 25 जुलाई को ट्रूमैन (Truman) ने प्रशांत महासागर बायुसेना के मुख्य कमांडर को आदेश दिया कि विशेष बम- लिटिल बॉय के इस्तेमाल की तैयारी कर ली जाये। इसके साथ ही जल्द ही एक बम और तैयार कर लिया गया जिसका नाम फैटमैन था। यह प्लूटोनियम बम था जबकि लिटिल बॉय यूरेनियम बम।
  • जापान के 4 शहरों की सूची बनाई गई जिनमें से दो पर बम गिराया जाना था। यह शहर हिरोशिमा, कोकूरा, क्योतो, निईगाता थे। बाद में क्योतो की जगह नागासाकी का नाम जोड़ा गया।
  • सोबियत संघ और अमेरिका के ही कई रणनीतिककार बम गिराने के पक्ष में नहीं थे क्योंकि उनका मानना था कि जापान देर-सवेर घुटने टेक ही देगा।
  • दरअसल जुलाई 1945 में मास्को में जापानी राजदूत ने यह बात सामने रखी कि जापान शांति-वार्ता चाहता है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति की दिलचस्पी शांति वार्ता में नहीं, बिना शर्त आत्मसमर्पण में थी।
  • 26 जुलाई को जापान से अविलंब बिनाशर्त आत्मसर्पण करने को कहा गया।
  • कुछ लोगों का कहना था कि परमाणु हमला न किया जाये लेकिन अमेरिका एक बड़ा वर्ग यह भी मानता था कि जापानी सेना आखिरी दम तक लड़ने को तौयार है । वहाँ के लोग आत्मघाती हमला करके भी अपने देश को बचाने के लिए तैयार थे।
  • एक तथ्य यह भी है कि अमेरिका पूरी दुनिया को अपनी सैनय ताकत से परिचित कराना चाहता था, वह जापान को सबक सिखाना चाहता था, अपने परमाणु बम का परीक्षण करना चाहता था और जापान को बुरी तरह से तोड़ देना चाहता था।
  • जापान जुलाई के अंत तक बहुत कमजोर हो गया था। वहां आवश्यक खाद्य सामग्री का भी अभाव था। जापान के पास पेट्रोल और अन्य ईंधन का इतना अभाव हो गया था कि उनके विमान बिना ईंधन के ठप्प पड़ गये थे।
  • 6 अगस्त, 1945 को सुबह 7 बजे जापानी राडारों ने दक्षिण की ओर से अमेरिकी विमानों को आते देखा और जापान में चेतावनी के सायरन बज उठे। जापानी विमान ईंधन के अभाव में इन अमेरिकी विमानों को रोकने में विफल थे।
  • 8 बजकर 9 मिनट पर अमेरिकी वायुसेना के कर्नल पॉल टिबेट्स ने अपने बी-29 विमान से ‘एनोला गे’ के इंटरकॉम पर घोषणा की कि अपने गागल्स लगा लीजिए।
  • एनोला गे में 3.5 मीटर लंबा, 4 टन वजन का नीला-सफेद एटम बम लिटिल बॉय रखा था। एनोला गे के दाहीने ओर एक दूसरा विमान बी-29 था, एवं एक तिसरा बमवर्षक विमान फोटो लेने के लिए था।
  • 8 बजकर 15 मिनट पर एनोला गे से लिटिल बॉय हिरोशिमा के ऊपर गिरना शुरू हुआ। इसे नीचे अपने में 43 सेकंड का समय लगा।
  • बम से गिरते ही वहां का तापमान 10 लाख सेंटीग्रेड से ज्यादा हो गया था, 10 से 15 किमी- तक सबकुछ जलकर खाक हो गया था। हिरोशिमा की दो तिहाई इमारते एक सेकंड के अंदर ध्वस्त हो गईं और 80 हजार से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई।
  • विस्फोट के बहुत देर बाद तक मशरूम के आकार मे धुआं 3000 फीट तक उठा।
  • लोगों के शरीर की स्किन जलकर/गलकर गिर रही थी और हर तरफ चिल्लाने की आवाजें थीं।
  • लगभग 11 बजे बम विस्फोट से पैदा हुए बादलों की वजह से हिरोशिमा में तेज बारिश होने लगी। वर्षा का रंग काला था क्योंकि इसमें धूल, राख और रेडियोतत्व मौजूद थे। यह रेडियेशन तेजी से फैलकर लोगों की जान ले रहा था।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने रेडियो संबोधन में हिरोशिमा पर बम गिराने की सूचना दी। उसमें उन्होंने कहा कि अमेरिकी विमान ने दुश्मन देश में बम गिराकर भारी तबाही मचाई।
  • जापान इस हमले से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया लेकिन उसे अभी एक और बम के परीक्षण की भूमि बनना था। यह बम था फैटमैन, जो प्लूटोनियम बम था।
  • अमेरिकी बम वर्षक विमान बी-29 पर 4050 किलो का एक भीमकाय बम 8 अगस्त की रात को लाद दिया गया जिसे अगले दिन (9 अगस्त) जापान के औद्योगिक नगर कोकुरा पर बम गिराना था। यहां जापान की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा गोला बारूद बनाने वाली फैक्ट्रियाँ थी।
  • सुबह 9 बजकर 50 मिनट पर विमान इस शहर के ऊपर था। विमान बी-29 बादलों में था और यहां का मौसम खराब था वहीं विमान भेदी तोपें भी तैयार थीं।
  • बी-29 का ईंधन समाप्त हो रहा था, ऐसे में विमान को अपने दूसरे टारगेट नागासाकी की ओर बढ़ने के लिए कहा गया।
  • विमान नागासाकी के ऊपर पहुँच और उसने बम गिराने वाले स्वचालित उपकरण को चालू कर दिया। भीमकाय बम 52 सकेंड तक नीचे गिरता रहा और 500 फीट की ऊँचाई पर फट गया।
  • कुछ ही देर में पूरा शहर निर्जन हो गया ओर हर तरफ सिर्फ लाशें ही थीं।
  • ऐसा कोई व्यक्ति वहां नहीं रहा जो यह बता सके कि यहां क्या और कैसे हुआ।
  • नागासाकी शहर पहाड़ों से घिरा था, जिससे तबाही ज्यादा नहीं फैली बावजूद इसके 6.7 वर्ग किमी. का क्षेत्र पूरी तरह तबाह हो गया।
  • लगभग 74-75 हजार लोगों की मृत्यु हुई। और हिरोशिमा तथा नागासाकी में रेडिएशन ने आने वाले वर्षों में भी लाखों लोगों को प्रभावित किया।
  • जापान ने रेडिएशन की चपेट में आये लोगों को हिबाकुशा नाम दिया तथा फ्री में स्वास्थ्य सुविधायें देकर बचाने का प्रयास किया।
  • जापान ने इस हमले के बाद 15 अगस्त 1945 को अपनी हार मान ली तथा 2 सितंबर को उसने विधिवत आत्मसमर्पण कर दिया।
  • नागासाकी पर बम गिराने को लेकर कई प्रकार विचार हैं। पहला विचार यह है कि 8 अगस्त को स्टालिन के द्वारा जापान के विरूद्ध युद्ध की घोषणा की गई थी, इसी कारण 13 अगस्त की जगह 9 अगस्त को ही हमला कर दिया ताकि जर्मनी की तरह जापानी मुख्यभूमि पर भी रूसी सैनिक कहीं पहले झंडा न फहरा दें।
  • 1965 में लिखी एक किताब के अनुसार अमेरिका ने जापानी शहरों पर हमला इसलिए किया ताकि युद्ध के बाद सोवियत संघ के साथ राजनायिक सौदेबाजी की जा सकें।
  • अमेरिका युद्ध के बाद सोवियत संघ से शक्ति के मामले में आगे निकलना चाहता था इसलिए उसने शक्ति प्रदर्शन किया।
  • इस हमलों से द्वितीय विश्व युद्ध तो समाप्त हो गया लेकिन बम प्रयोग ने न सिर्फ मानवता पर दाग का काम किया बल्कि परमाणु बम एवं हथियारों की एक ऐसी होड़ प्रारंभ की जिसकी वहज से आज भी मानवता पर खतरा बना हुआ।