Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 05 July 2020


Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 05 July 2020



रेलवे का निजीकरण

  • 16 अप्रैल, 1853 को भारत में पहली पैसेंजर ट्रेन मुंबई से ठाणे के बीच चली थी ! यहीं से पैसेंजर ट्रेन का व्यवसायिक सफर प्रारंभ होता है !
  • वर्ष 1900 में भारतीय रेलवे तत्कालीन सरकार के अधीन आ गई !
  • वर्ष 1925 में मुंबई से कुर्ला के बीच देश की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाई गई !
  • वर्ष 1936 में यात्री डिब्बों को वातानुकूलित बनाया गया !
  • 1947 में आजादी के बाद भारत को एक पुराना रेल नेटवर्क विरासत में प्राप्त हुआ, जो कुल नेटवर्क का 60% था अर्थात 40% नेटवर्क पाकिस्तान में चला गया !
  • वर्ष 1950 में रेलवे का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया !
  • वर्ष 1952 में 6 जोन के साथ जोनल सिस्टम प्रारंभ किया गया, जिनकी संख्या इस समय 18 है !
  • धीरे-धीरे रेलवे ने देश के विकास को अपने पहिए पर ढोते हुए खुद को भी आगे बढ़ाया जिसमें एक प्रमुख ठहराव 1974 में आया ! इस समय रेलवे ने 20 दिन की हड़ताल की जो भारतीय रेलवे की सबसे बड़ी हड़ताल है ! हालांकि इसके बाद कोई बड़ी हड़ताल नहीं हुई !
  • वर्ष 2004 में इंटरनेट के माध्यम से आरक्षण व्यवस्था प्रारंभ हुई तथा 2007 में देश भर में टेलीफोन नंबर 139 द्वारा व्यापक ट्रेन पूछताछ सेवा प्रारंभ हुई !
  • इस समय भारतीय रेलवे 13 हजार से अधिक ट्रेनों का परिचालन करती है !
  • यह अपने 1.3 मिलीयन कर्मचारियों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 2.5 करोड लोगों को एक स्थान से उनके गंतव्य स्थल तक पहुंचाती है !
  • वर्तमान समय में भारतीय रेलवे का नेटवर्क अमेरिका, रूस और चीन के बाद विश्व का चौथा सबसे बड़ा नेटवर्क है !
  • भारतीय रेलवे दुनिया का संभवत सबसे सस्ता नेटवर्क है जो लगभग 10 पैसे प्रति किलोमीटर की दर पर किराया वसूलता है ! यही कारण है कि यह सभी की पहुंच में होता है !
  • भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क में तो शामिल है लेकिन इसकी पहचान समय पर न चलने वाली तथा कम सुविधा वाली रेल नेटवर्क के रूप में भी है !
  • हालांकि 1 जुलाई 2020 को रेलवे ने एक नया इतिहास बनाया ! इस दिन रेलवे ने लगभग 200 ट्रेनों का परिचालन किया और सभी ट्रेनें अपने निश्चित समय पर प्रारंभ हुई तथा निश्चित समय पर पहुंची !
  • भारतीय रेलवे की सुविधाओं का विस्तार करने के लिए जरूरी है कि बड़ी मात्रा में तकनीकी एवं पूंजीगत सुधार किए जाएं ! इन सुधारों के लिए लंबे समय से रेलवे के निजीकरण पर विचार किया जा रहा है !
  • किसी क्षेत्र या उद्योग के स्वामित्व को जब सरकारी हाथों से लेकर निजी हाथों में सौंपा जाता है तो यह निजी करण कहलाता है !
  • वर्ष 2014 में रेलवे के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने तथा रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन हेतु विवेक देवराय समिति का गठन किया ! इस समिति ने वर्ष 2015 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की !
  • इस समिति ने निम्न सिफारिशें की -
  1. ट्रेन संचालन को निजी क्षेत्र के लिए खोला जाए जिसमें माल और यात्री दोनों प्रकार की गाड़ियां सम्मिलित हो !
  2. रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए एक अलग कंपनी का निर्माण किया जाए !
  3. रेलवे में निचले स्तर पर विकेंद्रीकरण की आवश्यकता है !
  4. नई लाइनों के निर्माण में रेलवे को राज्य सरकारों के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए !
  5. लेखांकन पद्धति को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर विकसित किया जाना चाहिए !
  • अक्टूबर 2019 में दिल्ली से लखनऊ के बीच तेजस एक्सप्रेस को चलाया गया था ! यह सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) के तहत चलाई गई पहली ट्रेन थी !
  • इसके परिचालन प्रारंभ होते समय ही यह कहा गया था कि रेलवे में PPP का यह मॉडल सफल होता है तो रेलवे में बड़े स्तर पर निजीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ हो सकती है !
  • तेजस में जो सुविधाएं दी गई उससे निजी करण समर्थकों के तर्कों को बल मिला !
  • इसमें ट्रेन का परिचालन के लिए निजी एवं सरकारी दोनों के द्वारा किया जा रहा है ! इसमें ट्रेन साफ- सुथरी अधिक पेशेवर दिखती है ! अटेंडेंट सर्विस के लिए अच्छी तरह से प्रशिक्षित होते हैं ! ट्रेन 1 घंटे लेट होने पर 100 रुपए तथा 2 घंटे से अधिक देरी पर 250 रुपए रिफंड दिया जाएगा !
  • इस में सफर करने वालों को 25 लाख का बीमा मिलेगा वही यात्रा के दौरान सामान चोरी होने पर 1 लाख रुपए का मुआवजा भी दिया जाएगा !
  • हाल ही में रेल मंत्रालय ने निजी करण की तरफ एक बड़ा कदम उठाते हुए यात्री ट्रेन सेवाओं के संचालन के लिए Request For Qualification RFQ ( अर्हता के लिए अनुरोध) मांगा है !
  • इस RFQ के तहत कम से कम 151 आधुनिक ट्रेनों की शुरुआत की जाएगी तथा 109 दोहरी रेल लाइनों को निजी ट्रेनों के परिचालन हेतु तैयार किया जाएगा !
  • RFQ के बाद फरवरी-मार्च 2021 तक परियोजना के लिए बोली की प्रक्रिया शुरू कर अप्रैल माह तक उन्हें अंतिम रूप दे दिया जाएगा !
  • इसके 2 वर्ष बाद अर्थात अप्रैल 2023 तक निजी ट्रेनों के परिचालन होने की संभावना है !
  • एक अनुमान के मुताबिक इससे लगभग 30,000 करोड़ का निजी निवेश आ सकता है !
  • RFQ मेक इन इंडिया नीति के तहत जारी किया गया है इससे कोचो एवं उसके घटकों के निर्माण से मेक इन इंडिया को फायदा मिलेगा !
  • निजी क्षेत्र के आने से ट्रेनों की गति बढ़ेगी और अगले 5 से 10 साल के भीतर अधिकांश ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल पाएंगी !
  • इससे यात्री सुविधाएं बढ़ेंगी तथा आवश्यक बुनियादी ढांचा तेजी से विकसित होगा तथा रेलवे का सुविधा स्तर उन्नत होगा !
  • हमारे यहां लगभग 13.3% लोगों को वेटिंग टिकट मिलता है अर्थात यह कंफर्म नहीं हो पाता है इस समस्या का भी समाधान होगा !
  • यात्रा किराया तय करते समय ट्रेन संचालकों को बस तथा हवाई यात्रा किराया से प्रतिस्पर्धा करनी होगी इसलिए अधिक किराया नहीं बढ़ेगा ! इसके साथ ही लगभग 95% ट्रेनों का परिचालन रेलवे द्वारा ही किया जाएगा अतः निजी क्षेत्र यदि किराया ज्यादा रखेगा तो उसकी मांग कम होगी !
  • भारतीय रेलवे ने आश्वासन दिया है कि किसी की नौकरी नहीं जाएगी बस कर्मचारियों के काम में कुछ परिवर्तन हो सकता है !
  • निजी संस्था रेलवे को तय ऊर्जा शुल्क, ढुलाई शुल्क और बोली प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित सकल राजस्व में हिस्सेदारी का भुगतान रेलवे को करेगी फलस्वरुप रेलवे घाटे से फायदे का स्रोत बन सकता है !
  • इन संभावनाओं के बीच कुछ चुनौतियां एवं समस्याएं भी हैं !
  • पहली चुनौती रेलवे के परिचालन में कई निजी कंपनियों के शामिल होने की है जिससे अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग हाथों में सौंपा जाएगा जिनमें समन्वय करना कठिन होगा !
  • आज बहुत बड़ी आबादी असमानता का दंश झेल रही है ! इसलिए यह कदम असमानता की खाई को और गहरा करेगा ! निम्न वर्ग कम सुविधा प्राप्त करेगा वहीं उच्च वर्ग अच्छी सेवाओं का उपयोग करेगा !
  • वर्तमान समय में OBC, SC, ST एवं EWS को मिल रहा आरक्षण रुक जाएगा जिससे समानता प्राप्त करने का एक प्रयास विफल होगा !
  • निजी क्षेत्र लाभ के उद्देश्य से कार्य करता है इसलिए जिन क्षेत्रों मे रेलवे लाइनों की आर्थिक उपयोगिता कम होगी वहां रेलवे का विकास कम होगा ! और यह क्षेत्र पिछड़े रह जाएंगे !
  • निजी करण से वैश्विक अनुभव सभी देशों में सकारात्मक नहीं रहा है ! जैसे इंग्लैंड में रेलवे को अब निजी क्षेत्र से पुनः सरकारी क्षेत्र में लाने पर विचार किया जा रहा है !