(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 05 December 2020


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पाकिस्तान के लिए जम्मू-कश्मीर में किराये के लड़ाके भेजेगा तुर्की?

  • Mercenary स्वैच्छिक लड़ाके होते हैं जो अपने लाभ (खासकर धन) के लिए किसी गुट, संगठन या सरकार की तरफ से लड़ते हैं। इस तरह यह किसी सेना के अधिकारिक भाग नहीं होते है। और ना ही इन्हें राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय सैनिक कानूनों से कुछ लेना देना होता है। यह सेना से अलग ऐसे स्थानों पर प्रयोग किये जाते हैं जहां सेना को नहीं भेजा सकता हैं । यह किसी स्थान पर विद्रोह करने के लिए, विद्रोह दबाने के लिए, अलगाववाद बढ़ाने के लिए या राजनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए धन देकर भेजे जाते हैं।
  • यह सेना के भाग नहीं होते हैं इसलिए इन्हें भाड़े के लड़ाके/आतंकी सिपाही कहा जाता है। इन्हें किसी देश की सेना या सुरक्षा एजेंसी द्वारा पकड़ लिया जाता है तो इन्हें एक सैनिक को मिलने वाले कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होते है।
  • विश्व के कई देशों में वहां के नगारिकों को छूट है कि यदि वह चाहें तो मर्सिनरी का भाग बन सकते हैं, हालांकि इस पर रोक लगाया जा रहा है।
  • हाल ही में आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-काराबाख को लेकर हुए विवाद में अजरबैजान ने कई देशों के मर्सिनरी का प्रयोग आर्मोनिया के खिलाफ किया जिसमें तुर्की के मर्सिनरी की संख्या सर्वाधिक थी।
  • मर्सिनरी के माध्यम से प्राप्त हुई अजरबैजान की जीत के बाद तुर्की इनके प्रयोग को लेकर गंभीर माना जा रहा है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि तुर्की अब अपने इन लड़ाकों को कश्मीर भेजेगा।
  • अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तुर्की अपने को मुस्लिम देशों का नेता बनाना चाहता है इसलिए वह उन सभी स्थानों पर इनका प्रयोग कर सकता है जहां उसके अपने हित छुपे है।
  • खबरों के मुताबिक तुर्की ने सीरियाई नेशनल आर्मी के खुंखार आतंकवादियों को इकट्ठा किया है और उन्हें इलाके में एकत्रित कर प्रशिक्षण दे रहा है। यह जिहादी लड़ाकें अब पैसे के लिए तुर्की के लिए अंतर्राष्ट्रीय किराये के सिपाही बन गये है।
  • तुर्की इनका प्रयोग लीबिया, अजरबेजान, आर्मीनिया, यमन में कर चुका हैं । कुर्दिश मीडिया के मुताबिक यह लड़ाके अब तुर्की द्वारा कश्मीर भेजे जा सकते हैं ताकि भारतीय सैनिकों के खिलाफ जंग लड़ सकें और पाकिस्तान का समर्थन कर सकें।
  • कुर्दिश मीडिया के अनुसार तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन ऐसा करके इस्लामिक शासन का खलीफ बनना चाहते है।
  • ANF न्यूज के मुताबिक सीरियाई नैशनल आर्मी के ‘सुलेमान शाह ब्रिगेड’ के कमांडर मुहम्मद अबू अमशा ने पांच दिन पहले सीरिया में ऐलान किया था कि तुर्की चाहता है कि मिलिशिया को कश्मीर भेजा जाये। कश्मीर जाने वाले लड़ाकों को प्रारंभ में दो हजार डालर दिया जायेगा।
  • यह लड़के नार्गोनो-काराबाख में लड़ चुके हैं जहां के पहाड़ी-पर्वतीय भूगोल इनके लिए सुरक्षित था, कुछ ऐसा ही भूगोल जम्मू-कश्मीर का है।
  • नागोर्नो-काराबाख संघर्ष में पाकिस्तान और तुर्की दोनों ने अपने यहां के मर्सिनरी को यहां भेजा था इसे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मेंक्रों ने की थी। हालांकि तुर्की एवं पाकिस्तान ने इससे इंकार किया है।
  • तुर्की ने मार्सिनरी कश्मीर भेजने की खबर को झूठा व भ्रामक बताया है। हालांकि नार्गोनो-काराबाख के संदर्भ में तुर्की ने ऐसा ही बोला था। जबकि यू.एन. की “हयूमनराइट ऑफिस ने कहा था कि यहां बड़ी संख्या में मार्सिनरी का प्रयोग हुआ है।
  • संभावना यह बताई जा रही है कि तुर्की न सिर्फ इन लड़ाकों को भेजेगा बल्कि हथियार एवं ड्रोन की सप्लाई करेगा।
  • यह पहला अवसर नहीं है जब तुर्की की तरफ से कश्मीर के संदर्भ में इस तरह की बातें की गई हों। तुर्की के राष्ट्रपति ने पिछले साल पाकिस्तान की संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि कश्मीर तुर्की के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पाकिस्तान के लिए। इसके अलावा तुर्की अनुच्छेद-370 में परिवर्तन और CAA का विरोध कर चुका है। वह कई बार संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का पक्ष ले चुका है। तुर्की OIC के माध्यम से कई बार कश्मीर के मुद्दे को उठा चुका है जैसा कि हाल ही में नियामें प्रस्ताव में सामने लगाया गया था।
  • तुर्की दरअसल मुस्लिम देशों का नेता माने जाने वाले सऊदी अरब से यह दर्जा प्राप्त करना चाहता हैं । यह तभी संभव हो सकता है जब वह मुस्लिमों हितों के संबंध में वह बढ़ चढ़कर हिस्सा ले।
  • तुर्की पाकिस्तान को आधुनिक हथियार और रडार तथा ड्रोन प्रदान कर रहा है। भविष्य में तुर्की के लिए पाकिस्तान एक बड़ा हथियार खरीदार देश बन रहा है।
  • तुर्की यह भी चाहता है कि पाकिस्तान एवं बांग्लादेश उत्तरी उत्तरी साइप्रस पर उसके कब्जे को मान्यता प्रदान करें। एक रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की लंबे समय से भूमध्य सागर क्षेत्र में ग्रीस, साइप्रस और मिस्र के खिलाफ आक्रामक तैयारी में जुटा है, जिसमें पाकिस्तानी सहयोग महत्वपूर्ण हो सकता है।
  • हाल ही में शील्ड ऑफ मेडेटेरियन युद्धाभ्यास के दौरान पाकिस्तानी लड़ाकू विमान तुर्की पहुँचे थे।

म्युनिसिपल बॉन्ड चर्चा में क्यों हैं ?

  • बॉन्ड (Bond) एक निश्चित आय प्राप्त करने का निवेश होता है जिसमें निवेशक किसी कंपनी या सरकार को निश्चित समय के लिए ऋण देता है जिस पर एक निश्चित ब्याज दर के आधार पर लाभ प्राप्त होता है। यह निवेश का वह रूप है जिसमें व्यक्ति पैसा लगाता है और निश्चित समय के बाद एक फिक्स एमाउंट (रकम) प्राप्त करता है। बॉन्ड को हिंदी में प्रतिभूति या ऋण पत्र कहते हैं।
  • जब कोई निजी कंपनी बॉन्ड जारी करती है तो इसे corporate Bond कहते है। इसमें रिटर्न अधिक मिलता है लेकिन रिस्क भी ज्यादा होता है।
  • सरकार (राज्य सरकार या केंद्र सरकार) को जब पैसे की आवश्यकता होती है और वह यह समझती है कि लोगों से पैसा ऋण के रूप में लेना चाहिए तो वह बॉन्ड जारी करती है। इसे सरकारी बॉन्ड या ट्रेजरी बॉन्ड कहा जाता है। यह सबसे कम ब्याज दर वाला तथा सबसे सुरक्षित बॉन्ड होता है। इसमें सरकार को भरोशा निहित होता है इसलिए इसे जोखिम मुक्त बॉन्ड कहा जाता है।
  • बॉन्ड का तीसरा प्रकार म्युनिसिपल बॉन्ड का होता है। यह बॉन्ड स्थानीय क्षेत्र की सरकार या उन्हीं कि किसी एजेंसी द्वारा जारी किया जाता है। यह बॉन्ड भी निवेश के सुरक्षित विकल्प विकल्प माने जाते है क्योंकि यह भी सरकार का एक अंग है।
  • म्युनिसिपल बॉन्ड भारत के साथ-साथ अन्य देशों में भी बहुत लोकप्रिय हैं। मूडीज का कहना है कि बहुल बॉन्ड सशक्त होने से स्थानीय निकायों की वित्तीय आवश्यकता की पूर्ति सरल हो जाती है और निवेशकों को अच्छा रिटर्न भी मिलता है।
  • भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने वर्ष 2015 में इस तरह के बॉन्ड जारी करने से जुड़े नियमों को सामने रखा। ऐसा इस वजह से था क्योंकि अधिकांश नगर निगम अपने खाते सार्वजनिक नहीं करते है।
  • सेबी ने समय-समय म्युनिसिपल बॉन्ड के लिए कई सकारात्मक पहलें की हैं। सेबी ने कहा कि ऐसे नगरीय विकास निकाय या उस जैसा काम करने वाली अन्य एजेंसियां जिन्हें संविधान के तहत नागरिक निकाय के तौर पर परिभाषित नहीं किया गया है उन्हें भी म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए कोष जुटाने के योग्य बनाया गया है।
  • हाल ही में लखनऊ नगर निगम (Lucknow Municipal Corporation) ने 200 करोड़ रूपये के बॉन्ड को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया है।
  • लखनऊ नगर निगम ऐसा करने वाला नौवाँ शहर बन गया है। इन 9 शहरों द्वारा लगभग 3600 करोड़ रुपये बॉन्ड के माध्यम से प्राप्त किये जा चुके है। इसमें सर्वाधिक फण्ड (2000 करोड़ रूपये) अमरावती ने प्राप्त किया है। इसके बाद पुणे ने 495 करोड़ रुपये, अहमदाबाद, हैदराबाद, सूरत ने 200-200 करोड़ रुपये, भोपाल ने 175 करोड़ रुपये, इंदौर ने 140 करोड़ रुपये और विशाखापत्तनम ने 80 करोड़ रुपये प्राप्त किया है।
  • लखनऊ नगर निगम बॉन्ड BSE Bond Platform द्वारा 13 नवंबर को जारी कर दिया था, अब इसकी लिस्टिंग की गई। इसकी मांग अधिक होने के कारण यह 4.5 गुना अधिक सब्सक्राइब हुआ।
  • इसमें कूपन रेट 8.5 प्रतिशत है और 10 साल के लिए जारी किया गया है कूपन रेट बॉन्ड पर वार्षिक आधार पर प्राप्त होने वाले ब्याज दर को संदर्भित करता है।
  • लिस्टिंग के समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ यहां मौजूद थे। उन्होंने कहा कि अगले 3 से 6 माह में आगरा, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज द्वारा इसीप्रकार के बॉन्ड जारी किये जायेंगे।
  • म्युनिसिपल बॉन्ड को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा AMRUT (Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation) मिशन के तहत बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • इस मिशन के तहत नगर निगम अपनी वित्तीय आवश्यकता की पूर्ति इस प्रकार के बॉन्ड से कर सकती है।
  • भारत में पहली बार 1997 में, शहरी स्थानीय निकाय को संवैधानिक मान्यता देने के 5 साल बाद यह बॉन्ड जारी किये गये थे।
  • प्रारंभ में बंगलुरू, अहमदाबाद और नासिक नगर निगम ने 1997-2000 के बीच ऐसे बॉन्ड जारी किये थे लेकिन इन्हें बहुत लोकप्रियता नहीं मिल पाई थी। वर्ष 2015 में जब SEBI ने इस संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये तो तब से यह लोकप्रिय हुए है।
  • लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और स्थानीय सरकारों को मजबूत करने के दृष्टिकोण से यह बहुत महत्वपूर्ण है। इससे स्थानीय निकाय बजटीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए राजस्व जुटा पाते है।
  • भारत में इनके सफल होने की संभावना इसलिए है क्योंकि यहां यदि निवेशक कुछ निर्धारित नियमों के अनुरूप निवेश करते है तो इन्हें कराधान से छूट दी जाती है। इसके अलावा इस निवेश पर मिलने वाले ब्याज को भी टैक्स से छूट प्राप्त होती है।
  • भारत के नगर निकायों की वित्तीय स्थिति कमजोर है जिसे इसके माध्यम से सुधारा जा सकता है। हालांकि नगर निकायों में भी कई प्रकार के सुधार की आवश्यकता है।