(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 04 November 2020


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फ्रांस ने माली में बमबारी क्यों की ?

  • साहेल या सहेल पट्टी अफ्रीका के पश्चिम से पूर्व तक फैला एक क्षेत्र है जो सहारा के रेगिस्तान को दक्षिण के आर्द्र सवाना क्षेत्र को अलग करती है या दोनों के मध्य एक संक्रमण पट्टी का कार्य करती है।
  • इस क्षेत्र की लंबाई 3862 किमी. है तथा चौड़ाई कुछ सौ किमी. से हजार किमी. है, जो अटलांटिक महासागर से लेकर लाल सागर तक फैली है।
  • इस क्षेत्र के अंतर्गत सेनेगल, मारीटिनिया, माली, बुर्किना फासो, नाइजर, नाईजीरिया, चाड, सूडान एवं इरीट्रिया जैसे देशों का प्रमुख हिस्सा आता है।
  • यह क्षेत्र आर्थिक विकास में पिछड़ा हुआ है जहां कई प्रकार की पर्यावरणीय एवं मानवीय अस्थिरतायें (राजनीति, सैनिक, गरीबी, कुपोषण) यहां के लोगों के जीवन स्तर को प्रभावित करती हैं।
  • यह क्षेत्र इस समय इस्लामिक स्टेट, बोकोहराम, अलकायदा एवं कई कट्टरपंथी आतंकवादी संगठनों द्वारा उत्पन्न की जाने वाली अस्थिरता और असुरक्षा का सामना कर रहा है।
  • इस्लामिक स्टेट ने मध्य-पूर्व में कमजोर पड़ने के बाद इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बना ली है तो साथ ही अलकायदा की जड़े यहां पहले से मजबूत हेैं।
  • गरीबी, अशिक्षा, अस्थिरता तथा आंतरिक संघर्षो के कारण यहां के आतंकी ग्रुप/संगठन बड़ी संख्या में यहां के युवाओं और बच्चों को शामिल करने में सफल होते हैं। वहीं इनकी बढ़ती संख्या ने पूरे अफ्रीका क्षेत्र के साथ-साथ पूरे विश्व के लिए चिंताजनक मुद्दा बना दिया है कि क्या यह नया आंतकी गढ़ जा रहा है। जिसके विकास के लिए यहां कई प्रकार की अनुकूल परिस्थितियाँ है।
  • G5 साहेल या G5S इस क्षेत्र के लिए बनाया गया एक संगठन है जो इसक्षेत्र में देशों/सरकारों/संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाने का प्रयास करती है। यह संगठन यहां विकास, सुरक्षा, नीति क्रियान्वयन के लिए 5 देशों को एक साथ लाता है। यह देश माली, चाड़ बुर्किनाफासो, मॉरिटेनिया और नाइजर हैं।
  • इस संगठन की स्थापना 16 फरवरी, 2014 को गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसका मुख्यालय Nouakchott, Mauritania में है।
  • इस क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए वर्ष 2014 के अगस्त माह में एक कांउटर टेररिज्म ऑपरेशन-बरखान (Barkhane) प्रारंभ किया गया जिसमें G5 साहेल के साथ-साथ फ्रांस के भी 3000 सैनिकों ने भाग लिया।
  • वर्तमान समय में भी यूरोप के कई देशों, सुरक्षा परिषद के सदस्यों एवं अन्य देशों द्वारा यहां के विद्रोही/आतंकी गुटों- AQIM, MUJWA, AL- Mourabitoun, Boko-Haram से लड़ने के लिए अपना वैचारिक एवं वित्तीय समर्थन दे रहे हैं।
  • इस समय फ्रांस के लगभग 5000 सैनिक यहां तैनात हैं।
  • इन प्रयासों के बावजूद इस क्षेत्र में आतंकी संगठन मजबूत हो रहे हैं और उनका प्रभाव बढ़ता जा रहा है।
  • आतंकी संगठन यहां आये दिन हमला करके आतंक फैलाते हैं, यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करते हैं तथा भय और असुरक्षा उत्पन्न करते हैं।
  • कुछ समय पहले यूनिसेफ की एक रिपोर्ट इस क्षेत्र से संबंधित आई थी, जिसमें इन आतंकियों द्वारा लगभग 300 बच्चों को मारे जाने या अगवा किये जाने की बात कही गई थी।
  • जनवरी 2020 में ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रॉन ने कहा था कि वह इस क्षेत्र में फ्रांस के सैनिकों की संख्या को बढ़ायेंगे। इसके साथ ही G5 साहेल के देशों एवं फ्रांस ने अमेरिका से अनुरोध किया था कि वह अफ्रीका से अपनी सेना न हटाये न उनकी संख्या कम करें।
  • 2 नवंबर 2019 माली के पूर्वोत्तर में स्थिरत एक सैन्य ठिकानें पर आतंकवादियों ने महला कर दिया था, जिसमें 54 सैनिकों की मौत हो गई थी।
  • 2 नवंबर 2019 में माली में हुई आतंकवादी घटना की वर्षी से 2 दिन पहले फ्रांस ने माली में हवाई हमला कर के 30 अक्टूबर को 50 से अधिक आतंकियों को मार गिराया है।
  • फ्रांस की रक्षा मंत्री फलोरेंस पार्ली ने कहा कि फ्रांस ने देश में कई जगह आतंकी वारदातों के बाद पिछले हफ्रते इस क्षेत्र में जिहादी विरोधी अभियान की शुरूआत की थी।
  • फ्रांस सरकार द्वारा गई सूचना के अनुसार यह ऑपरेशन उस इलाके में हुआ जो बुर्किनाफासो और नाइजर की सीमा के पास है। यहां पर पहले ही सेना पहले से चरमपंथियों से लड़ रही थी।
  • रक्षामंत्री के अनुसार यह हमला तब किया गया जब ड्रोन के माध्यम से मोटरसाइकिलों के एक काफिले को देखा गया और चरमपंथियों की पहचान की गई।
  • हमला करने के लिए मिराज लड़ाकू विमान और ड्रोन से हमला किया गया। मिसाइलें दागीं गईं।
  • यह आतंकी काफिला अलकायदा और सपोर्ट ग्रुप फॉर इस्लाम एंड मुस्लिम का बताया जा रहा है जो इस क्षेत्र का एक प्रमुख जिहादी गठबंधन है।
  • वर्ष 2014 से यहां फ्रांस आतंकवादियों के खिलाफ लड़ रहा है, जिसमें फ्रांस के 41 सैनिकों की भी मौत हो चुकी है। इस कार्रवाई से फ्रांस ने अपनी सेना के मनोबल को ऊँचा करने के साथ-साथ फ्रांस में बढ़ रही आतंकवादी घटनाओं के खिलाफ कड़ा कदम उठाने का संदेश दिया है।
  • फ्रांस में वर्ष 2015 के बाद से जो आतंकवादी घटनायें दर्ज की गई हैं उसमें धार्मिक कट्टरता प्रमुख कारण रहा है। हाल के समय शिक्षक की हत्या, 29 अक्टूबर की आतंकी घटना से फ्रांस को कड़े कदम उठाने पर मजबूर किया था। इसीकारण कई लोगों का तो यह भी कहना है कि माली में आतंकी संगठन पर किया गया हमला एक प्रकार बदला है।
  • फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रॉन इस समय मुस्लिम धर्म की कट्टरता को लेकर बहुत मुखर है, इसलिए वह अपनी नीतियों और इस प्रकार कार्रवाई के माध्यम से फ्रांस के लोगों में वह विश्वास पैदा करना चाहते हैं कि फ्रांस हर तरह से किसी प्रकार के कट्टरपंथ से मुकाबला करने में सक्षम हैं।

आस्ट्रिया की राजधानी वियना पर आतंकी हमला

  • आस्ट्रिया मध्य यूरोप में स्थिरत एक स्थल अवरूद्ध देश हैं, जिसकी राजधानी वियना है। इस देश का ज्यादातर हिस्सा आल्प्स पर्वतों से ढ़का हुआ है।
  • इसकी सीमायें उत्तर में जर्मनी और चेक गणराज्य से, पूर्व में स्लोवाकिया और हंगरी से, दक्षिण में इटली और पश्चिम में स्विट्रलैण्ड और लीश्टेनश्टाइन से मिलती है।
  • एक यह गणतंत्रत्मक देश है, जिसका सबसे बड़ा शहर वियना है जहां देश की लगभग 1/4 जनसंख्या रहती है।
  • यहां की कुल जनसंख्या लगभग 90 लाख है जिसमें लगभग 57 प्रतिशत लोग इसाई धर्म को मानने वाले हैं। लगभग 23-24 प्रतिशत जनसंख्या अपने को किसी धर्म से नहीं जोड़ती है। वहीं इस्लाम धर्म को मानने वाले लोगों की संख्या यहां लगभग 8 प्रतिशत है।
  • आस्ट्रिया की राजधानी वियना में सोमवार को कुल 6 जगहों पर पर आतंकी हमले हुए जिसमें कई लोगों की मृत्यु हो गई है और 15-20 लोग घायल हैं।
  • यह हमला वियना मे ं एक सिनागाँग यानी यहूदी उपासना गृह के पास और ऑपरा हाउस सहित कुल 6 जगहों पर हुए।
  • यहां के चांसलर सेबेस्टियन कुर्त्स ने कहा कि हमलावर पेशेवर थे और अच्दी तरह से सशस्त्र थे।
  • इस्लामिक स्टेट वियना हमले की जिम्मेदारी ली है। इस्लामिक स्टेट ने हमलावर का वीडियों जारी किया है जिसमें हमलावार इस्लामिक स्टेट के नेता अबू इब्राहिम अल-हशमी अल कुरैशी के प्रति निष्ठा की प्रतिज्ञा लेते हुए दिखाया जा रहा है। हमलावार के पास उत्तरी मैसीडोनिया की नागरिकता थी। वह इस्लामिक स्टेट से जुड़ने सीिरया जाना चाहता था, जिसके लिए उसे जेल हुई थी। और उसे पेरोल पर छोड़ा गया था।
  • यहां के चांसलर सेबोस्टियन कुर्त्स ने कहा- ‘‘हमारा दुश्मन-इस्लामी आतंकवाद न सिर्फ दर्द और मौत देना चाहता है बल्कि हमारे समाज को विभाजित करना चाहता है। हम घृणा को इस तरह नहीं बढ़ने देंगे। हमें मालूम होना चाहिए कि यह मुसलमानों और इसाईयों के बीच संघर्ष नहीं है और न ही ऑस्ट्रियाई और प्रवासियों के बीच।’’
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा-हमारी संवेदनायें लगातार आतंकी हमला झेल रहे यूरोप के लोगों के साथ हैं। बेगुनाह लोगों के खिलाफ ये हमले बंद किये जाने चाहिए। अमेरिका कट्टवादी इस्लामी आतंकियों के खिलाफ इस जंग में अपने सहयोगियों आस्ट्रिया, फ्रांस और पूरे यूरोप के साथ खड़ा है।
  • भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वे वियना में हुए आतंकी हमले से गहरे सदमें और दुःख में है। इस संकट की घड़ी में भारत की जनता आस्ट्रिया के साथ खाड़ी है।
  • समीक्षकों का मानना है कि इस प्रकार की बढ़ी घटनायें प्रवासियों एवं गरणार्थियों के खिलाफ स्थानीय लोगों को उकसा सकती है, जिससे आने वाले समय में कई प्रकार की चुनौतियों उत्पन्न हो सकती है।
  • कुछ समीक्षकों का मानना है कि सभी प्रकार के अधिकारों में समन्वयन स्थापित करने के लिए आवश्यक है कि सरकार कुछ ऐसे कानूनों का निर्माण करे जिससे किसी वर्ग/समुदाय की भावनायें आहतन हों। हालांकि अधिकांश इसके खिलाफ है और इस्लामी आकंकवाद से मजबूती से निपटने की सलाह देते है।