Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 04 June 2020


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TIANANMEN SQUARE की घटना क्या थी ?

  • चीन जिसका आधिकारिक नाम चीनी जनवादी गणराज्य (People's Republic of China) है, इसकी राजधानी बीजिंग है !
  • एशिया का यह देश USA के बाद दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और व्यापार वाला है जहां विश्व की सर्वाधिक जनसंख्या निवास करती है !
  • विश्व में यह देश अपने सबसे तेज अर्थव्यवस्था के ग्रोथ और उत्पादन के लिए तो प्रसिद्ध ही है इसके साथ-साथ यह लोकतंत्र और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले देश के रूप में भी जाना जाता है !
  • चीनी जनवादी गणराज्य की स्थापना 1 अक्टूबर 1949 को माओत्से तुंग (Maotse Tung) द्वारा की गई ! तुंग ने बीजिंग के थ्येनआनमन चौक (Tianonmen Square) पर लाल झंडा (कम्युनिस्ट) फहरा कर किया ! इन्होने लगभग 20 साल से चले आ रहे गृह युद्ध में चियांग कई- शेख के नेतृत्व वाले समुदाय को हरा कर चीन कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) कि सरकार को स्थापित किया और चिआंग कई-शेक समर्थको को भाग कर ताइवान जाना पड़ा और उन्होंने वहां चीनी गणराज्य की स्थापना की ! चीन ताईवान को अपना भाग मानता है वहीं ताइवान के लोग अपनी स्वायत्तता के लिए संघर्ष कर रहे हैं !
  • आज मुख्य भूमि वाले चीन की ही वैश्विक पहचान ज्यादा है तो साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य भी वही है !
  • 1949 में स्थापित चीन मार्क्सवादी, लेनिनवादी और माओ की अपनी मिक्षित नीति जिसे माओवाद के नाम से जाना जाता है, के आधार पर आगे बढ़ा !
  • माओ ने साम्यवादी व्यवस्था के अंतर्गत केंद्रीकृत शासन स्थापित किया अर्थात निजी संपत्ति और प्राइवेट कंपनियों की अनुपस्थिति !
  • माओ की नीतियों से चीन पूर्ण रुप से तैयार नहीं था ! फल स्वरुप 1959 से 1961 के बीच चीन की स्थिति बहुत खराब हो गई और कई क्षेत्रों में भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई !
  • इस विषम परिस्थितियों में माओ जेदांग को इस्तीफा देना पड़ा !
  • 1966 में माओत्से तुंग ने Cultural Revolution प्रारंभ कर सत्ता के खिलाफ संघर्ष प्रारंभ कर दिया ! 1966- 1976 के बीच माओ की नीतियों से अलग विचारधारा वाले लोगों की बड़ी संख्या में हत्या की गई और इन लोगों पर पूंजीवादी होने का आरोप लगाया गया !
  • माओत्से तुंग (MAO ZEDONG) की 1976 में मृत्यु के बाद सत्ता DENG XIAOPING के पास आई जो पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के भी समर्थक थे, इसी कारण कल्चरल रिवॉल्यूशन के दौरान इन पर कई बार हमले भी हुए थे !
  • देंग जियाओपिंग ने अपनी अर्थव्यवस्था खोल दी, बाहरी निवेश के प्रयास किए, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में बहुत बड़ा निवेश किया, प्राइवेट सेक्टर की उपस्थिति दर्ज करवाया !
  • देंग जियाओपिंग की नीति के कारण ही चीन में आर्थिक विकास ने रफ्तार पकड़ी लेकिन कुछ सामाजिक और आर्थिक बुराइयां भी सामने आई !
  • सरकारी भ्रष्टाचार शिखर पर पहुंच गया, तकनीकी प्रयोग के कारण बेरोजगारी तथा भाई- भतीजावाद बढ़ा, मुद्रास्फीति बढ़ी क्योंकि उत्पादक अब स्वतंत्र थे ! बैंकों से ऋण या लोन मिलना कठिन हो गया ! इन सब के कारण युवाओं में गुस्सा भी आर्थिक विकास के साथ बढ़ रहा था !
  • 1984 तक आते-आते पढ़े-लिखे युवा सरकार की आलोचना करने लगे और सरकार की जवाबदेही की मांग करने लगे !
  • धीरे-धीरे युवाओं को बौद्धिक वर्ग का भी समर्थन मिलने लगा ! पहला प्रमुख नाम एस्ट्रोफिजिक्स प्रोफेसर Fang Lizhi का आता है और इन्होंने न सिर्फ युवाओं का समर्थन किया बल्कि बौद्धिक वर्ग को युवाओं के साथ बहुत मजबूती से खड़ा किया !
  • इसी क्रम में सबसे बड़ा नाम हू याओबांग (Hu Yaobang) का आता है, यह CCP के जनरल सेक्रेटरी थे ! इन्होंने आंदोलन का समर्थन किया और सरकारी जवाबदेही, प्रेस की स्वतंत्रता, लोकतंत्र का समर्थन किया !
  • हू याओ बांग को पद से हटा दिया गया ! और कुछ समय बाद 15 अप्रैल 1989 को उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई जिससे छात्रों (आंदोलन कारियों) द्वारा सरकारी मौत के रूप में माना गया !
  • घटनाक्रम (Time Line)
  • हू याओबांग की छवि सुधारक और प्रगतिशील नेता के रूप में बन चुकी थी इसलिए इनकी मृत्यु के बाद युवाओं में भारी गुस्सा भर गया !
  • 17 अप्रैल को इनकी मृत्यु का शोक मनाने के लिए हजारों लोग थ्येनआनमन चौक पर इकट्ठा होने लगे !
  • धीरे-धीरे शोक सरकारी विरोध प्रदर्शन मे बदल गया और 18-21 अप्रैल के बीच तानाशाही की समाप्ति और स्वायत्तता की मांग को लेकर लोग एकत्रित होने लगे !
  • पुलिस ने कई स्थानों पर छात्रों को यहां पहुंचने से रोकने का प्रयास किया लेकिन 27 अप्रैल को एक लाख से अधिक छात्रों ने चौक की ओर कूच किया !
  • 15 मई को सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव चीन की राजकीय यात्रा पर आए !
  • 20-24 मई को देंग जियाओपिंग द्वारा मार्शल लॉ लागू कर दिया गया !
  • 29-30 मई को इस चौक पर "गॉडेस ऑफ डेमोक्रेसी" की प्रतिमा खड़ी की गई !
  • 2 जून को 10000 सैनिक ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल और संग्रहालय के पीछे की इमारतों में छिपे और आंदोलन को समाप्त करने की रणनीति बनने लगी !
  • 3 जून को दो लाख सैनिकों को हथियारों और टैंक के साथ बीजिंग में प्रवेश कराया गया और दमन इसी दिन से प्रारंभ हो गया !
  • 4 जून को सेना ने "गोडेस ऑफ डेमोक्रेसी" टैंक से उड़ा दिया गया, ्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसाई गई, जो लोग सामने आये उनके ऊपर टैंक चढ़ा दिया गया और कुछ रिपोर्टेर्स के अनुसार लगभग 10000 लोगों का कत्लेआम किया गया !
  • चीन के अनुसार यह संख्या 200 से 300 थी और वहां की सरकार ने इस कार्रवाई का समर्थन किया !
  • मीडिया को बहुत पहले ही प्रतिबंधित कर दिया गया था इसलिए यह आंदोलन तुरंत व्यापक वैश्विक समर्थन प्राप्त नहीं कर पाया !
  • बाद में चीन सरकार ने इस आंदोलन से जुड़े सभी जानकारियों को यथासंभव समाप्त करने का प्रयास किया लेकिन लोकतंत्र का यह आंदोलन तब तक अमर हो चला था ! और चीन का घिनौना चेहरा दुनिया के सामने था !