(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 03 December 2020


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बोरिस जॉनसन हो सकते हैं अगले मुख्य अतिथि

  • भारत-यूनाइटेड किंगडम संबंध जिसे भारतीय-ब्रिटिश संबंध या इंडो-ब्रिटिश संबंध के नाम से भी जाना जाता है भारत गणराज्य और यूनाइटेड किगडम के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को संदर्भित करता है । दोनों राष्ट्र कॉमनवेल्थ के महत्वपूर्ण सदस्य हैं ।
  • दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंध उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं। स्वतंत्रता के बाद भारत ने गुटनिरपेक्षता और गैर-उपनिवेशवादी अवधारणा की वकालत की जबकि ब्रिटेन ने अमेरिका के साथ शीतयुद्ध में गठबंधन करना सही समझा। इस वजह से दोनों देशों के संबंधों में वैचारिक मतभेद बना हुआ था। हालांकि द्विपक्षीय संबंध ठीक थे।
  • 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद ब्रिटेन ने पाकिस्तान की ओर सहानुभूति प्रकट की, जिससे द्विपीय संबंधों में तल्खी आई। यह तल्खी या संबंधों में गिरावट शीतयुद्ध की समाप्ति तक जारी रही।
  • शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद वैश्विक-अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में व्यापक बदलाव आया जिसकी वजह से भारत-ब्रिटेन संबंधों में भी सकारात्मक परिवर्तन आया।
  • वर्ष 1995 में दोनों देशों के बीच रक्षा सलाहकार समूह का गठन किया गया। वर्ष 2004 में दोनों देशों में सामरिक भागीदारी समझौता किया।
  • वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन का दौरा किया। इस दौरे के दौरान अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा के संबंध में कई समझौते किये गये।
  • नवंबर 2016 में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा में (Theresa May) ने भारत का दौरा किया और ब्रेक्जिट के बाद भारत और ब्रिटेन के संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने की आवश्यकता व्यक्त की ।
  • ब्रिटेन भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। यह भारत के शीर्ष व्यापारिक भागीदारों में 15वें से 18वें स्थान पर आता है।
  • मॉरीशस, सिंगापुर, अमेरिका के साथ ब्रिटेन भारत का तीसरा-चौथा सबसे बड़ा निवेशक है।
  • दोनों देश भारत-यूके एजुकेशन फोरम, यूके-इंडिया एजुकेशन एंड रिसर्च इनिशिएटिव के माध्यम द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। इस समय लगभग 20,000 भारतीय छात्र ब्रिटेन में स्नातक और स्नाकोत्तर पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर रहे है।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार ब्रिटेन में भारतीय मूल के लगभग 1.5 मिलियन लोगों की आबादी है, जो ब्रिटेन की कुल जनसंख्या का लगभग 1.8 प्रतिशत है। भारतीय डायस्पोरा द्वारा ब्रिटेन के सकल घरेलू उत्पाद में 6 प्रतिशत योगदान दिया जाता है।
  • भारत भी ब्रिटेन में नई परियोजनाएं शुरू करने के मामले में अमेरिका, फ्रांस के बाद तीसरा सबसे बड़ा देश है। भारत की लगभग 800 से ज्यादा कंपनियों ने ब्रिटेन में 1 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार दिया। केवल टाटा ग्रुप ने ही 65000 लोगों को रोजगार दिया है।

बोरिस जॉनसन के बारे में-

  • बोरिस जॉनसन का जन्म अमेरिका के न्यूयार्क शहर में हुआ था इसलिए उनके पास अमेरिका और ब्रिटेन दो स्थानों की नागरिकता थी। इनके पिता यूरोपीय यूनियन के नोकरशाह थे।
  • बोरिस जॉनसन ऑक्सफोर्ड से पढ़े हैं और उन्हें फ्रेंच, लैटिन, ग्रीक जैसी भाषाओं की भी अच्छी समझ थे।
  • राजनीति में आने से पहले जॉनसन पत्रकार थे। वह ‘द टाइम्स’ और टेलीग्राफ के लिए काम कर चुके है। ‘द टेलीग्राफ’ में काम करते हुए वह यूरोपीय यूनियन की आलोचना करते रहे है।
  • इनकी आइडियोलॉजी कंजर्वेटिव मानी जाती है, जो हमेशा यूरोपीय यूनियन पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि ईयू (यूरोपीय यूनियन)ब्रिटेन के हितों का ख्याल नहीं रखता है।
  • वर्ष 2004 में वह टोनी ब्लेयर की सरकार के समय शैडो कैबिनेट का हिस्सा थे। वर्ष 2008 में जॉनसन लंदन के मेयर बने और 8 साल तक इस पद पर रहे थे। वर्ष 2012 में लंदन ओलंपिक के समय ब्रिटेन के झंडे के साथ तार पर लटक कर उन्होंने ओलंपिक मैदान में आनी एंट्री ली थी। वर्ष 2008 में उन्होंने अमेरिका की नागरिकता त्याग दिया।
  • वह विवादास्पद बयानों और कारनामों की वजह से चर्चा में बने रहते है। वह अपने एक्स्ट्रा मेरिटल संबंधों, नस्लीय टिप्पणी की वजह से भी चर्चा में रहते है। वह बुर्का पहनने वाली मुस्लिम महिलाओं को ‘लेटर बॉक्स’ जैसा बताया था। वह अश्वेतों और समलौंगिको के खिलाफ असम्मानजक टिप्पणी कर चुके है।
  • बुर्का पर प्रतिबंध लगाने की बात वह कह चुके है। इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय के पिछड़ेपन की वजह इस्लाम धर्म को बताया था। उन्होंने कहा था कि मुस्लिम इस्लाम की वजह से पश्चिम से दूर रहे है जिसकी वजह से पिछड़ापन बढ़ता गया और उसी के अनुसार कट्टरता भी बढ़ती गई। उनका मानना रहा है। कि इस्लाम की कट्टरता विकास विरोधी है।
  • जॉनसन की छवि असंवेदनशील और गंभीर न रहने वाले व्यक्ति के रूप में है। इन्हें ब्रिटेन का ट्रंप कहा जाता है।
  • वह महिला मुद्दों पर भी घिरते रहे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने महिला मित्र का गर्भपात करवाया था। इसके वजह से उन्हें शैडो केविनेट से बाहर कर दिया गया था।
  • वर्ष 2016 में ब्रिक्जिट के मुद्दे पर ब्रिटेन में एक जनमत करवाया गया। इस समय यहां के प्रधानमंत्री डेविड केमरून थे। केमरून ब्रिटेन को यूरोपीय यूनियन के साथ रखना चाहते थे लेकिन इस जनमत संग्रह में 52 प्रतिशत लोगों ने ब्रिटेन से बाहर होने का निर्णय लिया। डेविड केमरून ने इसे अपनी नेतृत्व क्षमता की कमजोरी मानते हुए इस्तीफा दे दिया।
  • इसके बाद थेरेसा में यहां की प्रधानमंत्री बनीं। बोरिस इनके फॉरेन सेक्रेटरी थे। बाद में बोरिस ने इस्तीफा दे दिया। कुछ समय बाद अपनी ही पार्टी पर थेरेसा में की पकड़ कमजोर होने लगी और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
  • जून 2019 में कंजर्वेटिव पार्टी का लिडरशीप चुनाव हुआ, जिसमें बोरिस जॉनसन की जीत हुई। जीत के पीछे उनका एक नारा ‘‘ब्रेक्जिट को मुकव्वल’’ करना रहा। इसके बाद जॉनसन यहां के प्रधानमंत्री बने। इसके बाद इन्होंने ब्रेक्जिट के मुद्दे पर गंभीरता पूर्वक कार्य किया।
  • 1 जनवरी 2021 से ब्रेक्जिट प्रारंभ हो रहा है जिसके वजह से ब्रिटेन को यूरोपीय यूनियन से मिलने वाला फायदा समाप्त हो जायेगा और व्यापार, वाणिज्य, परिवहन, आवागमन संबंधित नीति में बड़े बदलाव आयेंगे।
  • ब्रिटेन इसके बाद अपने उत्पादों के लिए नया बाजार खोज रहा है। ब्रिटेन की पहली पसंद भारत है। इसके बाद अफ्रीका महाद्वीप और लैटिन अमेरिका है।

भारत और ब्रिटेन दोनों FTA हस्ताक्षर करना चाहते है

  • दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहते है इसीलिए ब्रिटेन ने कहा है कि वह INS विशाल को तैयार करने में मदद करेगा और अपने सबसे बड़े एयरक्रॉफ्रट की कॉपी करवा देगा। भारत INS विक्रांत और INS विशाल का निर्माण खुद कर रहा है। अभी INS विक्रमादित्य भारत के पास है इसे रूस से लिया गया है।
  • ब्रिटेन अगले वर्ष विमान वाहक पोत HMS क्वीन एलिजाबेथ को हिंद प्रशांत क्षेत्र मे तैनात कर रहा है।
  • दोनों देश जेट टेक्नॉलजी को लेकर भी समझौता करने वाले है।
  • 5G टेक्नोलॉजी को लेकर दोनों देश D-10 के तहत काम भी कर सकते है।
  • कोरोना के बाद दोनों देशों के बीच अनेक मुद्दों पर सहयोग बन सकता है।
  • 27 नवंबर को एक औपचारिक बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भारत आने का न्योता दिया था। आज के कई न्यूज और मीडिया रिपोर्ट में यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि बोरिस जॉनसन 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि हो सकते है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया था- अगले दशक में भारत-ब्रिटेन संबंधों की महत्वाकांक्षी कार्ययोजना पर अपने दोस्त ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के साथ शानदार चर्चा की। हमने व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन तथा कोविड-19 से जंग समेत सभी क्षेत्रें में सहयोग को व्यापक रूप से बढ़ाने के लिए सहमति जताई।
  • बोरिस जॉनसन ब्रिटेन में भारत विरोधी और कश्मीर के मुद्दों पर होने वाले प्रदर्शन पर रोक लगा चुके हैं।
  • अनु. 370 में परिवर्तन के संदर्भ में भी उन्होंने कहा था कि यह भारत का आंतरिक मामला है। और आतंकवाद की लड़ाई में भी अपने को भारत के साथ खड़ा करते हैं।
  • वह दक्षिणपंथी विचारधारा के समर्थक माने जाते हैं, जैसा वर्तमान भारत सरकार के संबंध में कहा जाता है।
  • इससे पहले हमने (भारत ने) गणतंत्र दिवस के अवसर पर वर्ष 1956 में आर.ए. बटलर को बुलाया था। वर्ष 1959 प्रिंस फिलिप को बुलाया था। वर्ष 1961 में क्विन एलिजाबेथ द्वितीय को हमने आमंत्रित किया। वर्ष 1964 में लॉर्ड माउंटबेटेन को बुलाया गया था। यह वहीं माउंटबेटेन थे जिनके समय देश का बंटवारा हुआ था। पांचवी बार वर्ष 1993 में वहां के प्रधानमंत्री जॉन मेजर को आमंत्रित किया था। इस तरह बोरिस जॉनसन यदि आते हैं तो वह छठवें व्यक्ति होंगे जो गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयेंगे।
  • अमेरिका ने नए राष्ट्रपति जो बाइडन होंगे जो चीन और पाकिस्तान को लेकर नरम रूख रखते हैं, ऐसे में भारत को हिंद प्रशांत क्षेत्र में अपने हितों को संरक्षित करने के लिए कुछ ऐसे मित्रें की आवश्यकता है जो राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भारत के साथ मजबूती से खड़े हो सकें। इस नजरिए से भारत ब्रिटेन, फांस जैसे देशों को अधिक महत्व प्रदान कर रहा है।
  • हाल के समय में G-7, नॉटो, जलवायु परिवर्तन और चीन की भूमिका के संदर्भ में जिस प्रकार के परिवर्तन आये हैं भारत को अपने अधिक सहयोगियों की जरूरत है।
  • तुर्की, पाकिस्तान, चीन को काउंटर करने में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी जैसे देश महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं जिनके साथ हमें ऑस्ट्रेलिया का भी सहयोग मिल सकता है।

द्विपीय संबंधों को प्रभावित करने वाले मुद्दे-

  1. व्यापार का मुद्दा
  2. भारत न्यूरोपीय संघ संबंध और ब्रिटेन के साथ व्यापार
  3. पाकिस्तान-ब्रिटेन संबंध
  4. चीन के साथ ब्रिटेन की निकटता
  5. प्रवासी भारतीयों का मुद्दा
  6. मानवाधिकार का मुद्दा