(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 02 September 2020


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चीन को जवाब देने की बदलती भारत की रणनीति

  • भारत और चीन विश्व की दो उभरती शक्तियाँ है एवं एक दूसरे के पड़ोसी हैं जो लगभग 3500 किमी- लंबी सीमा साझा करते हैं।
  • प्राचीन समय से भारत एवं चीन के सांस्कृतिक एवं आर्थिक संबंध रहे हैं।
  • चीन में चल रहे गृहयुद्ध के दौरान भारत ने आंतरिक मामले में हस्तक्षेप न करने की नीति अपनाई।
  • 1949 में नये चीन की स्थापना के बाद अगले वर्ष भारत ने चीन के साथ राजनायिक संबंध स्थापित किये। भारत चीन को उस समय मान्यता देने वाला प्रथम गैर समाजवादी देश बना।
  • वर्ष 1954 के जून माह में भारत, चीन व म्यामांर द्वारा पंचशील का सिद्धांत अपनाया गया। इन सिद्धांतों में कहा गया- एक दूसरे की प्रभुसत्ता व प्रादेशिक अखंडता का सम्मान किया जायेगा, अंदरूनी मामलों में दखल न दिया जाये, समानता व आपसी सहयोग का विकास किया जायेगा, समरसता व आपसी लाभ के तहत शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को स्वीकार किया जायेगा।
  • चीन में 1950 के दशक में तिब्बती विद्रोह के दौरान 1959 में भारत ने दलाई लामा को शरण दी। इसके बाद भारत और चीन के संबंध तनावपूर्ण होने लगे और चीनी सेना ने 20 अक्टूबर 1962 को लद्दाख में और मैकमोहन रेखा पर हमले शुरू किये। 21 नवंबर 1962 को एकपक्षीय युद्धविराम की घोषणा कर दी। उसके बाद से अब तक दोनों देशों के संबंध पुराने रूप में सामान्य नहीं हो पाये है।
  • इस बीच 'चीन ने दुश्मन का दुश्मन सबसे अच्छा दोस्त' की रणनीति अपनायी और पाकिस्तान के साथ नजदीकी बढ़ाना प्रारंभ कर दिया और चीन इसमें सफल भी रहा है।
  • 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया।
  • पाकिस्तान ने भी चीन की तरफ दरियादिली दिखाई और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का 2600 वर्ग मील भू-भाग चीन को सौंप दिया।
  • 1991 में चीन के प्रधानमंत्री ली पेंग भारत दौरे पर आये और इस यात्र के दौरान एक ऐतिहासिक समझौता यह हुआ कि दोनों देशों ने वास्तविक नियंत्रण देखा (LAC) पर एक दूसरे के द्वारा आक्रमण नहीं करने का वचन दिया ।
  • 1993 में भारतीय प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव चीन के दौरे पर गये। यहाँ पर एक समझौता हुआ जिसमें भारत-चीन सीमा विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने पर जोर दिया गया। इसमें यह तय हुआ कि-
  1. एक दूसरे के खिलाफ बल या सेना के प्रयोग की धमकी नहीं दी जायेगी।
  2. दोनों देशों की सेनायें LAC से आगे नहीं बढ़ेंगी। यदि एक पक्ष के जवान इस रेखा को पार करते हैं तो दूसरी तरफ से संकेत मिलते ही तत्काल वापस चले जायेंगे।
  3. LAC पर सेना की संख्या बढ़ाने के लिए सलाह लेना होगा और दूसरे देश से अनुमति मिलने के बाद ही ऐसा किया जायेगा।
  4. दोनों देशों की एयरफोर्स सीमा क्राँस नहीं करेगी।
  5. LAC पर सैन्य अभ्यास से पहले सूचना देनी होगी।
  6. इसी समझौते के तहत दोनों देशों के सेनाओं द्वारा बल प्रयोग नहीं किया जायेगा। इसीकारण यहाँ गोलीबारी या हथियारों के प्रयोग की अनुमति नहीं होती है।
  • वर्ष 1998 में भारत ने परमाणु परीक्षण कर अपने आप को परमाणु शस्त्र धारक देश घोषित कर दिया। चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा परीक्षण बंद करने, शस्त्र विकास कार्य रोकने, CTBT एवं NPT पर हस्ताक्षर करने का प्रस्ताव पास करवा दिया।
  • इस समय भारत के रक्षामंत्री रहे जॉर्ज फर्नाण्डीस ने चीन को भारत का सबसे बड़ा दुश्मन बताया।
  • समय आगे बढ़ता गया और दोनों के संबंधों में उतार-चढ़ाव आते रहे।
  • दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार ने दोनों देशों को सीमा विवाद से दूर रखा तो कई बार व्यापार से बढ़कर विवाद सामने आया।
  • वर्ष 2014 में भारत में राजनीति सत्ता परिवर्तित हुई और नई सरकार ने अपने पड़ोसियों के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने का प्रयास किया। इसी क्रम में भारतीय प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर चीनी राष्ट्रपति शी-जिनपिंग अहमदाबाद आये। हालांकि सीमा विवाद पर कोई मजबूत सहमति नहीं बन पाई।
  • जून 2017 में डोकलाम के मुद्दे पर विवाद और तनाव बढ़ गया जो 73 दिनों तक चला।
  • हर देश अपनी स्वतंत्र विदेश नीति अपनाता है लेकिन उसकी विदेश नीति कई कारकों-शक्ति संतुलन, व्यापार, आपसी संबंध एवं तनाव, वैश्विक परिदृश्य, आर्थिक और सैनिक क्षमता आदि, से प्रभावित होती है।
  • भारत चीन के संबंध में एक संतुलित विदेश नीति अपनाता आया है और भारत ने लगभग अधिकांश चीनी मुद्दों पर किसी प्रकार की टीका टिप्पणी से अपने आप को दूर रखा है।
  • इस वर्ष चीन ने जिस प्रकार भारतीय सीमा पर तनाव बढ़ाया है उसकी वजह से भारत ने अपनी विदेश नीति में कई छोटे-बड़े परिवर्तन किया है।
  1. भारत ने क्वाड समूह में सक्रियता बढ़ा दिया है।
  2. मालाबार सैन्य अभ्यास में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ निकटता बढ़ाई है।
  3. हांगकंग और उइगर समुदाय के मुद्दे को मुखर तरीके से उठाया है।
  4. दक्षिणी चीन सागर में स्वतंत्र परिवहन की मुखालफत किया है।
  5. कोरोना वायरस, ऑस्ट्रलिया के साथ विवाद पर चीन का विरोध किया है ।
  • बड़े परिवर्तन-
  1. भारत ने दक्षिणी चीन सागर में अपना Warship (युद्धपोत) तैनात कर दिया है। हाल के समय की यह पहली आक्रामक नीति है जहां भारत चीन को उसी के क्षेत्र में चुनौती देने के लिए खड़ा हो गया।
    - यहाँ पहले से ही अमेरिकी नेवी मजबूत तरीके से चीन को चुनौती दे रहा है तो अब अमेरिका को भारत का सहयोग मिल रहा है।
  2. भारत ने मलक्का जलसंधि के समीप हिंद महासागर में अपने नेवी के बेडे को तैनात कर दिया है। मलक्का जलसंधि चीन के ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है, यदि भारत इस पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है तो चीन बुरी स्थिति में फस जायेगा।
  3. भारत ने ऑस्ट्रोलिया के साथ सैन्य बेस और द्वीप हस्तांतरण (आपास स्थिति में सैन्य प्रयोग) का समझौता किया है जिसके तहत भारत ऑस्ट्रेलिया के नेवी बेस का प्रयोग कर सकता है। भारत ने पश्चिमी हिंद-महासागर में भी अपनी नौसेना की तैनाती बढ़ा दिया है।
  4. भारत ने चीन के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी अमेरिका से अपनी नजदीकी बढ़ायी है जिसके कारण अमेरिका का समर्थन भारत को मिला हुआ है। इसी के साथ सैनकाकु द्वीप के कारण जापान की भी चीन से दूरी बढ़ गई है तथा भारत ने अब प्रत्यक्ष रूप से जापान के साथ अपने को खड़ा कर लिया है, जिससे भारत अभी तक बचता आ रहा था। इसीक्रम में भारत ने जापान, ऑस्ट्रेलिया और आसियान के बीच नई सप्लाई चैन के निर्माण पर कार्य प्रारंभ कर दिया है।
  5. भारत के CDS जनरल विपिन रावत ने अभी कुछ समय पहले यह भी कहा कि यदि चीन भारतीय क्षेत्र से पीछे हटने को तैयार नहीं होता है तो भारत युद्ध का भी सहारा ले सकता है। यह भारत की बदलती रणनीति में एक बड़ा बदलाव है क्योंकि भारत पहले से अपनी तरफ से इस प्रकार का स्टेटमेंट नहीं देता था।
  6. सबसे नवीन घटनाक्रम कालाटॉप क्षेत्र को चीन के कब्जे से मुक्त कराने के संदर्भ में आया है। पेंगोंगत्सो झील के दक्षिण में LAC के समीप के पहाड़ी क्षेत्र को Blacktop (कालाटॉप) के नाम से जाना जाता है। यहां पर चीन के कुछ सैनिकों ने अपना बेस बनाकर कैमरा, सर्विसलांस सिस्टम तैनात कर दिया था और वहां पर स्थायी चीनी बेस बनाने का प्रयास कर रहे थे जिसे भारत ने नाकाम कर दिया है। यह भारत की सेना की अग्रनीति को दर्शाता है। भारत ने यहां पर टेंक तक तैनात कर दिया है।
  7. भारत ने चीन के भारतीय क्षेत्र को हड़पने की नीति को दुनिया के सामने रखा है जिसका नतीजा यह है कि अमेरिका ने यह कहा है कि भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान को मिलकर चीन के खिलाफ एक NATO (North Atlantic Treaty Organisation) की तरह सैन्य संगठन बनाना चाहिए और समझौता करना चाहिए जिसमें एक देश पर हमला सभी देशों पर हमला माना जायेगा। चीन इस प्रकार के समझौते के परिणाम से वांकिफ है और चिंतित भी इसलिए उसने भारत से इसे विवाद उलझाने वाला कृत्य बताया है।
  • भारत ने पहले से ही अपने मिसाइल सिस्टम और लड़ाकू विमानों को तैनात कर रखा है तथा सड़कों की कनेक्टविटी के माध्यम से हथियारों की सप्लाई हमेशा के लिए बहाल कर दिया है फलस्वरूप भारत-चीन को हर तरह से रोकने में सक्षम है।
  • भारत ने रूस के साथ मिलकर बनाये गये ब्रह्मोस मिसाइल को अब दूसरे देशों को बेचने के लिए तैयार कर लिया है। इस मिसाइलों को भारत अब चीन के उन पड़ोसी देशों को बेचेगा जिनसे चीन का तनाव है।

तरलता बढ़ाने का RBI का प्रयास

  • भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रा की तरलता और संकुचन को नियंत्रित ओर प्रभावित करने में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • मुद्रा की तरलता का तात्पर्य बाजार में पर्याप्त मात्र में धन/पूंजी की उपलब्धता से है। यदि बैंकों के पास पर्याप्त पैसा है, ऋण की दर कम है तो यह मुद्दा की तरलता का परिचायक है।
  • मुद्रा की तरलता से लोगों के पास पैसा होता है, वह खर्च करने और निवेश करने में सक्षम होते हैं जिससे बाजार में गतिशीलता होती है।
  • अधिक तरलता का नाकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है अर्थात मंहगाई बढ़ती है।
  • वर्तमान समय में बाजार की स्थिति में एक ठहराव है जिसके पीछें एक प्रमुख कारण तरलता का अभाव है, इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए अनेक मौद्रिक नीति उपायों की घोषणा की है।
  • RBI द्वारा ऑपरेशन ट्विस्ट के तहत 20,000 करोड़ रुपये की राशि की सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) की खरीद बिक्री की जायेगी।
  • ऑपरेशन ट्विस्ट के अंतर्गत RBI दीर्घ अवधि के सरकारी ऋणपत्रों को खरीदने के लिए अल्पकालिक प्रतिभूतियों की बिक्री से प्राप्त आय का उपयोग करता है।
  • RBI इस माह के मध्य में फ्लोटिंग दरों पर (प्रचालित रेपो दर पर) 1 लाख करोड़ रुपये की कुल राशि के लिए आवधिक रेपो परिचालन का भी आयोजन करेगा। इस आवधिक रेपो परिचालन से बैंकिंग प्रणाली में तरलता बढ़ता है।
  • बैंकों को यह विकल्प दिया गया है कि जिन बैंकों ने दीर्घावधि रेपो परिचालन (Longterm Repo Operations-LTRO) के तहत धन का लाभ उठाया था वे परिपक्वता से पहले इस लेने-देन को बदलने का विकल्प चुन सकते है। अर्थात जिन बैंकों ने LTRO के तहत 5.15 प्रतिशत की दर पर RBI से उधार लिया था, वे इसे वापस कर नये रेपो दर (4 प्रतिशत) पर उधार ले सकते हैं। इससे बैंकों का ऋण सस्ता हो जायेगा।
  • LTRO के तहत बैंक एक से तीन वर्ष की अवधि के लिए ऋण प्राप्त करते हैं और RBI कोलेटरल के रूप में सरकारी प्रतिभूतियों को लंबी अवधि के लिए स्वीकार करता है।
  • LTRO के माध्यम से फंड रेपों रेट पर प्रदान किया जाता है। इससे अर्थव्यवस्था में ऋण प्रवाह सुनिश्चित होता है।
  • सरकार ने Held To Maturity-HTM श्रेणी के तहत अधिक अवसर उपलब्ध कराने की घोषणा की है।
  • बैंक, 1 सितंबर 2020 से अपने नवीन सरकारी प्रतिभूतियों के अधिगृहण के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं। वर्तमान समय में HTM श्रेणी में कुल 25 प्रतिशत तक निवेश किया जा सकता है। RBI ने इस सीमा को बढ़ाने की अनुमति दी है।