Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 02 July 2020


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G-4 वायरस क्या है ?

  • विषाणु (Virus) एक सूक्ष्म जीव है | यह जीवित कोशिकाओं के भीतर ही अपना विकास एवं प्रजनन करता है | दरअसल यह अपना विकास करने के लिए जीवित कोशिकाओं की रासायनिक मशीनरी का प्रयोग करते हैं | जिस तरह हमारे शरीर की कोशिकाएं अपनी संख्या में वृद्धि करती हैं इसी प्रकार यह विषाणु भी अपना विकास कर शरीर में अपना घातक प्रभाव उत्पन्न करते हैं |
  • वायरस भी DNA व RNA दो प्रकार के होते हैं |
  • इसी RNA वायरस का एक प्रकार इनफ्लुएंजा वायरस होता है |
  • इनफ्लुएंजा (श्लैष्मिक ज्वर) कुछ विशेष प्रकार के वायरस से होने वाला एक संक्रामक रोग है | इसमें बुखार, शारीरिक दुर्बलता एवं फेफड़ों से संबंधित बीमारी के लक्षण सामान्यत: देखे जाते हैं |
  • इनफ्लुएंजा विषाणु तीन वर्गों में विभाजित किए जाते हैं |
  • इनफ्लुएंजा विषाणु A - यह एक संक्रामक बीमारी है जिसके धारक/वाहक जंगलीय पशु पक्षी होते हैं | मानव में संचारित होने पर यह काफी घातक सिद्ध होते हैं |
  • इनफ्लुएंजा विषाणु B - यह विशेष रूप से मनुष्यों को प्रभावित करता है तथा इनफ्लुएंजा A से कम घातक होता है |
  • इनफ्लुएंजा विषाणु C - यह सामान्यता जानवरों जैसे - मनुष्य, कुत्तों एवं सूअरों को प्रभावित करता है | यह सबसे कम घातक होता है तथा केवल बच्चों में हल्के रोग का कारण बनता है |
  • वर्ष 2009 में इसी प्रकार का एक इनफ्लुएंजा वायरस आया था जिसने एक महामारी का रूप धारण कर लिया था, जो A/H1N1 वायरस से फैला था |
  • मार्च 2009 में मेक्सिको में सूअरों के माध्यम से इंसानों में फैला था इसी कारण सुअर इनफ्लुएंजा/स्वाइन फ्लू नाम दिया गया |
  • जानवरों की यह बीमारी जब मनुष्यों में फैलती है तो यह घातक रूप धारण कर लेती है | इसी कारण जून 2009 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे विश्वव्यापी महामारी घोषित कर दिया था |
  • 2009 से वर्ष 2010, 2013, 2017 में भी अपना घातक प्रभाव दिखा चुकी है |
  • चीन में सुअर पालन तथा सुअर का मांस आहार बहुत सामान्य है इसी कारण यहां भी स्वाइन फ्लू का प्रसार होता है तथा इसके आउटब्रेक का भी खतरा बना रहता है |
  • चीन में H1N1 वायरस के प्रकार एवं प्रभाव को समझने के लिए अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों ने वर्ष 2011 से 2018 के बीच चीन के 10 प्रांतों में मारे गए सुअरों से 29000 से अधिक नाक के स्वैब निकाले |
  • स्वैब से स्वाइन फ्लू कई कई सौ प्रकार के स्वाइन फ्लू के मामले सामने आए लेकिन इस बार के स्वाइन फ्लू का H1N1 वायरस कुछ बदला हुआ नजर आया | अर्थात अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि 2009 से 2019 तक H1N1 वायरस ने अपना एक नया रूप बना लिया है जिसे वैज्ञानिक G-4 नाम दे रहे हैं | इसका पूरा नाम G4EA H1N1 है |
  • सोमवार को अमेरिकी विज्ञान पत्रिका प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित रिपोर्ट में G- 4 वायरस के आउटब्रेक को रोकने की बात की गई क्योंकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन में कई लोग इससे संक्रमित भी हो चुके हैं | यह इंसानों में भी फैलने की क्षमता विकसित कर सकता है |
  • दरअसल G-4 वायरस वर्ष 2016 से ही सुअरों में पाया जाता है लेकिन अब इंसानों में भी फैल रहा है |
  • इससे प्रभावित लोगों में बुखार, खासी, सिर दर्द, जुकाम, छींक आना, ज्वाइंट पेन, आंखों में जलन, गला सूखना आदि के लक्षण देखे जा रहे हैं |
  • कई रिपोर्ट में यह कहा गया है कि यह यदि फैलता है तो यह भीषण संक्रामक बीमारी का रूप ले सकता है |
  • इसकी अभी तक कोई दवा नहीं है इस कारण यह यदि इंसानों में फैलता है तो एक नई महामारी का रूप धारण कर सकता है |
  • चूंकि इसका स्वरूप H1N1 से थोड़ा अलग है इसलिए H1N1 की दवाई इस पर असर नहीं करेंगी |
  • यदि इसे समय रहते नहीं रोका गया तो यह अपने रूप को परिवर्तित कर इंसानों से इंसानों के बीच फैलने लगेगा | इसमें यह देखा गया है कि यह सांस नली के माध्यम से अंदर पहुंचकर अपनी संख्या को बढ़ा सकता है |
  • शोधकर्ताओं का मानना है कि सुअरों के साथ काम करने वाले सभी लोगों पर नजर रखने के साथ उनके अंदर आ रहे बदलाव को समझने की जरूरत है |

गंगोत्री नेशनल पार्क चर्चा में क्यों है ?

  • भारत चीन सीमा तनाव जिस प्रकार बढ़ रहे हैं ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि भारतीय फौज सीमा पर हमेशा अपनी पहुंच सुनिश्चित कर सके |
  • BRO - Border Road Organisation लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक ऐसी स्ट्रैटेजिक सड़कों का निर्माण लंबे समय से कर रहा है लेकिन अभी भी बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं जहां सेना को पैदल चलकर सीमा तक पहुंचना होता है |
  • उत्तराखंड से लगे तिब्बती क्षेत्र में चीन द्वारा अपनी सैन्य मजबूती को बढ़ाने के लिए अनेक प्रकार के निर्माण किए गए हैं ऐसे भारतीय सेना के लिए भी एक क्षेत्र में कई प्रकार के निर्माण कार्य आवश्यक है |
  • उत्तराखंड राज्य के उत्तरी भाग में उत्तरकाशी एक जिला है | इसी जिले में एक प्रसिद्ध गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान अवस्थित है | जिसे वर्ष 1989 में स्थापित किया गया था |
  • इस उद्यान की पूर्वोत्तर सीमा तिब्बत के साथ लगी हुई है |
  • 1800 से 7000 मीटर की ऊंचाई पर यह उद्यान 1553 स्क्वायर किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है |
  • इस पार्क में हरे-भरे घास के मैदान के साथ-साथ शंकुधारी वन एवं हिमनद पाए जाते हैं |
  • गंगोत्री ग्लेशियर का गोमुख इसी उद्यान में स्थित है जहां से गंगा नदी का उद्गम होता है |
  • चीड़, देवदार, फर, स्पूस, ओक और रोड़ोडेड्रोन जैसे पौधे तथा काले भालू, भूरे भालू, हिमालयन स्नोकॉक, हिमालयन लहर, कस्तूरी मृग और हिम तेंदुए जैसे दुर्लभ जीव इसकी खूबसूरती को बढ़ाते हैं |
  • यह उद्यान क्षेत्र गोविंद राष्ट्रीय उद्यान और केदारनाथ वन्य जीव अभ्यारण के बीच एक जीवंत निरंतरता बनाता है |
  • ऊंची पर्वत श्रंखलाए, गहरे दर्रे, खड़े ढाल वाले भाग, चट्टानी नुकीले हिमनद और संकीर्ण घाटिया इसकी विशेषताएं हैं |
  • इस उद्यान से होकर एक सड़क निर्माण का विचार लंबे समय से किया जा रहा था | हाल ही में इस उद्यान में सड़क के विकास के लिए उत्तराखंड राज्य वन्यजीव सलाहकार बोर्ड ने वन भूमि के हस्तांतरण वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है |
  • लगभग 35.66 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए 3 अलग- अलग स्थलों की वन भूमि का सड़क निर्माण के लिए प्रयोग किया जाएगा |
  • सड़क निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण संबंधी प्रस्ताव राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (National Board for Wildlife) को भेजे जाएंगे |
  • यहां तक सामान्य लोगों का भी हमेशा पहुंचना संभव नहीं हो पाता है | अधिक वर्षा और शीतकाल की बर्फ बारी के बीच यह भाग आवागमन के लिए उपयुक्त नहीं रह जाता है |
  • ऐसे में सर्दियों के मौसम में यदि इस क्षेत्र में चीनी घुसपैठ होती है तो समस्या जटिल हो सकती है |
  • इस क्षेत्र में ITBP (Indo Tibetan Border Police) की मौजूदगी है जिसे 1962 में गठित किया गया था|
  • यह (ITBP) विशेष प्रशिक्षित पर्वतीय बल है जो यहां पर सड़क विकसित होने से और भी ज्यादा मजबूत और सशक्त होगी |

नमामि गंगे परियोजना की फंडिंग

  • भारत की संस्कृति के साथ एक नाम गंगा का जुड़ता है | गंगा नदी ना सिर्फ सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व रखती बल्कि भारत की सर्वाधिक जनसंख्या को जल और उससे उत्पन्न होने वाली सेवाओं की आपूर्ति करती है |
  • अधिक जनसंख्या, नगरीकरण, औद्योगिकरण क्षेत्र अतिक्रमण आदि कारणों से यह नदी बहुत प्रदूषित हो चुकी है |
  • कई औद्योगिक शहरों में तो यह नाले के जल के रूप में परिवर्तित हो चुकी है |
  • 1985 में इस नदी को साफ करने के लिए केंद्र सरकार ने गंगा एक्शन प्लान बना कर गंगा की सफाई का अभियान चलाया था लेकिन अनेक कारणों और सीमाओं की वजह से इससे बहुत उत्साहजनक परिणाम प्राप्त नहीं हुए |
  • वर्ष 2014 में एक बार फिर से गंगा की सफाई के लिए नमामि गंगे परियोजना प्रारंभ की गई | यह 100% केंद्र पोषित योजना है |
  • यह एक 18 वर्षीय योजना है जिसके तहत पांच राज्यों में गंगा को साफ किया जाएगा |
  • इस योजना का क्रियान्वयन केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है |
  • इसमें नदी की ऊपरी सतह की सफाई से लेकर, ठोस कचरे की समस्या को हल करने, नदी में मिलने वाले ग्रामीण और शहरी मैल को रोकना, शौचालय निर्माण, शवदाह गृह का आधुनिकीकरण, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, घाटों का निर्माण एवं मरम्मत आदि शामिल है |
  • कुल मिलाकर लगभग 2500 किलोमीटर लंबी नदी में उन सभी कारकों का पता लगाया जाएगा जिससे प्रदूषण फैलता है तथा उनका समाधान करने का प्रयास किया जाएगा |
  • इसमें नवीन घटनाक्रम यह हुआ है कि विश्व बैंक ने इस परियोजना के लिए 45 अरब रुपए के फंड/ ऋण को मंजूरी दे दी है |
  • इस ऋण की अवधि 5 वर्ष होगी |
  • इस परियोजना के पहले चरण ( दिसंबर 2021 तक) को 4535 करोड रुपए विश्व बैंक से पहले ही प्राप्त हो चुके हैं |
  • इस फंड का उपयोग प्रदूषण को समाप्त करने तथा अवसंरचना निर्माण पर किया जाएगा !
  • इसमे से 11.34 अरब के उपयोग से आगरा, मेरठ, तथा सहारनपुर मे गंगा की सहायक नदियों पर 3 नए हाइब्रिड एन्यूटी प्रोजेक्ट (Hybrid Annuity Project) का निर्माण किया जाएगा !
  • साथ ही बेगुसराय, मुंगेर तथा बक्सरमे चल रही कुछ परियोजनाओं पर खर्च किया जाएगा !