(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) क्या G7 में शामिल होगा भारत? (Will India Join G7 Group?)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) क्या G7 में शामिल होगा भारत? (Will India Join G7 Group?)



यूँ तो 46वां छियालिसवां जी-7 शिखर सम्मेलन का आयोजन इसी साल 10 जून से 12 जून तक होना था...लेकिन फिलहाल इस सम्मेलन को ताल दिया गया है....

जी हाँ हम बात कर रहे है 2020 में होने वाले G-7 सम्मलेन की....बतातें चले की इस साल जी-7 की अध्यक्षता अमेरिका के पास है...

आज हम DNS में बात करंगे G-7 2020 की....क्यूँ इस सम्मलेन को टाला गया....क्या इस फैसले के वजह भारत है./?...साथ ही जानेगे क्या है G-7 ..ये कैसे काम करता है...और इससे जुड़े कुछ और तथ्यों को....

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत चीन के धुर विरोधियों को शामिल करने के लिए इस सम्मेलन को आखिरी वक्त पर सितंबर तक के लिए टाल दिया है... ट्रम्प का कहना है की उन्हें नही लगता कि जी-7 ठीक से यह दर्शाता है कि दुनिया में क्या चल रहा है...साथ ही उन्होंने कहा यह सम्मलेन देशों का एक बहुत पुराना समूह है।’

बता दें कि इस संगठन में शामिल सभी सात देश कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित हैं और चीन को कई बार सार्वजनिक रूप से खरीखोटी सुना चुके हैं।

कोरोना वायरस के कारण दुनियभर में आलोचनाओं का सामना कर रहा चीन दुनिया की सबसे शक्तिशाली आर्थिक शक्तियों के संगठन में भारत के शामिल होने से बुरी तरह घिरने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत समेत चीन के धुर विरोधियों को शामिल करना चाहता है....

बता दें कि 46वें जी-7 शिखर सम्मेलन का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 10 जून से 12 जून तक आयोजन होना था....

इन देशों को शामिल करना चाहते हैं ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप जी-7 में भारत, रूस, साउथ कोरिया और ऑस्ट्रेलिया को शामिल करना चाहते हैं। इन देशों का चीन के साथ संबंध अच्छे नहीं है। बता दें कि भारत के साथ जहां लद्दाख सीमा पर तनातनी चल रही है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया के साथ भी चीन के संबंध सही नहीं है। चीन ने हाल में ही ऑस्ट्रेलिया से आयात होने वाले जौ और मांस पर प्रतिबंध लगाया है...

चलिए एक नज़र डालते है आखिर ये जी-7 सम्मेलन क्या है।... कौन-कौन से देश इसके सदस्य हैं? इसका गठन कब हुआ?

जी-7 दुनिया की विकसित अर्थव्‍यवस्‍थाओं का एक समूह है....फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन, जापान, कनाडा और अमेरिका इसके सदस्‍य हैं...इसे Group of Seven यानी जी-7 कहा जाता है.... औद्योगिक रूप में विकसित देशों का यह समूह खुद को 'कम्यूनिटी ऑफ वैल्यूज' यानी मूल्यों का आदर करने वाला समुदाय कहता है...

मानवाधिकारों की सुरक्षा, स्वतंत्रता, लोकतंत्र, कानून का शासन, आर्थिक समृद्धि व निरंतर विकास इसके मुख्‍य सिद्धांत हैं..दुनिया की अर्थव्यवस्था की चाल व रफ्तार को निर्देशित करने में इनकी महत्‍वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। दुनिया की कुल आबादी का जहां 10वां हिस्‍सा इन देशों में है, वहीं वैश्विक जीडीपी में इन देशों की 40 प्रतिशत भागीदारी है...

1970 के दशक में जब वैश्विक आर्थिक मंदी और तेल संकट बढ़ रहा था, तब फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति बैलेरी जिस्कॉर्ड डी एस्टेइंग ने जी-7 की आधारशिला रखी...1975 में जी-7 का गठन हुआ....तब इसमें सिर्फ छह संस्थापक देश थे... और इसे जी-6 के नाम से जाना जाता था...जहाँ कनाडा इसमें शामिल नहीं था..

यह सम्मेलन पहली बार 1975 पचत्तर में ही फ्रांस की राजधानी पेरिस के पास स्थित शहर रम्बोइले में हुआ था...

1976 में कनाडा को इस समूह में शामिल किया गया। तब जाकर इस समूह का नाम जी-7 रखा गया...1998 में रूस भी इसमें शामिल हुआ, लेकिन क्रीमिया पर कब्‍जे के कारण 2014 में इसे समूह से निकाल दिया गया, जिसके बाद यह फिर से जी-7 के रूप में जाना जाने लगा...जी-7 एक अनौपचारिक संगठन है। इसका न तो कोई मुख्यालय है, न ही चार्टर या सचिवालय...

प्रत्येक सदस्य देश बारी-बारी से इस समूह की अध्यक्षता करता है और दो दिवसीय वार्षिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है....यह प्रक्रिया एक चक्र में चलती है...शिखर सम्मेलन के अंत में एक रिपोर्ट जारी की जाती है, जिसमें सहमति वाले बिंदुओं का जिक्र होता है...सम्मलेन में भाग लेने वाले लोगों में जी-7 देशों के राष्ट्र प्रमुख, यूरोपीयन कमीशन और यूरोपीयन काउंसिल के अध्यक्ष शामिल होते हैं...

जी-7 में शामिल देशों में क्या है खास

जी-7 में जो देश शामिल हैं, वे कई मामलों में दुनिया में शीर्ष स्थान पर कायम हैं...ये देश दुनिया में सबसे बड़े निर्यातक हैं...इन देशों के पास सबसे बड़ा गोल्ड रिजर्व है...ये देश यूएन के बजट में सबसे ज्यादा योगदान देते हैं...ये सभी सात देश दुनिया में सबसे बड़े स्तर पर परमाणु ऊर्जा का उत्पादन करते हैं..

जी-7 में और किन संस्थाओं को बुलाया जाता है?

जी-7 बनने के बाद इसके शुरुआती दौर में इसमें शामिल सात देश ही इसके सम्मेलनों में भाग लेते थे। लेकिन 1990 के दशक के अंतिम दौर में एक नई परंपरा शुरू हुई...जी-7 के सम्मेलनों में कई अन्य संस्थाओं को भी बुलाया जाने लगा..... इनमे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन, यूनाइटेड नेशंस, अफ्रीकन यूनियन शामिल है....

इसके अलावा जी-7 के सम्मेलनों में समय-समय पर अन्य देशों को भी आमंत्रित किया जाता रहा है....ऐसे देश जो आर्थिक रूप से प्रगति कर रहे हों...

जी-7 की परंपरा रही है कि जिस देश में यह सम्मेलन आयोजित किया जाता है वही इसकी अध्यक्षता करता है। साथ ही मेजबान देश ही सम्मेलन में किन मुद्दों पर बात होगी, इसका निर्धारण भी करता है...आपको बतादें पिछले साल फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुअल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया था...

अमेरिका द्वारा G-7 सम्मलेन को टालना और भारत समेत कई और देशों को आमंत्रित करने की बात करना...इस और इशारा करता है....चीन को घेरने के लिए अमेरिका गुट बना रहा है....जी-7 की बैठक में अमेरिका कोरोना वायरस और साउथ चाइना सी मुद्दे पर चीन के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों के लिए अपने गुट को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है...