(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) कहाँ है दुनिया की सबसे साफ जगह? (Where is World's Cleanest Place)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) कहाँ है दुनिया की सबसे साफ जगह? (Where is World's Cleanest Place)



कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में कई नुक्सान हुए...लेकिन इस कोरोना काल में एक बात का बड़ा फायदा भी नजर आया है....बीते दो से तीन महीनों के दौरान दुनियाभर में प्रदूषण का स्‍तर काफी नीचे आया है....इससे पहले पूरी दुनिया में प्रदूषण से हालात इतने खराब थे...कि दुनिया के कुछ शहरों में तो सांस लेना भी दूभर हो गया था....सांस लेने के लिए साफ हवा ऐसी जगह की शायद कलपना करना भी छोड दिया था....हालांकि, ज्‍यादातर देशों में लॉकडाउन के कारण अब हवा सांस लेने लायक हो गई है.....अब असमान भी धूल की परत से परे साफ़ नज़र आता है...आज महसूस हो रहा है...की इस प्रकृति से ही हमारा अस्तित्व है और इसे संजोना हमारी ज़िम्मेदारी ......इस बीच वैज्ञानिकों ने धरती की सबसे साफ हवा वाली जगह भी ढूंढ निकाली है.....शायद आपने कभी कल्पना भी नही की होगी की इस धरती में ऐसी कोई जगह होगी जहाँ हवा सबसे साफ़ सबसे शुद्ध होगी....

आज DNS में हम बात करेंगे उस जगह की जहाँ की हवा इस धरती की सबसे साफ़ हवा है.... आइए जानते हैं कि ये जगह कहां है और किसने की इसकी पहचान...

सबसे साफ़ हवा वाली इस जगह पर कोई इंसानी गतिविधि नहीं होने के कारण अब तक प्रदूषण का एक भी पार्टिकल नहीं मिला है.... अमेरिका की कोलोराडो स्‍टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे इलाके की पहचान की जो इंसानों की वजह से अब तक बेअसर रहा है.... यह जगह इंसानी आबादी से बहुत दूर दक्षिणी ध्रुव के पास है. शोधकर्ताओं ने पाया कि अंटाकर्टिक महासागर या सदर्न ओशन (Southern Ocean) के ऊपर बहने वाली हवा में एयरोसॉल पार्टिकल्‍स नहीं हैं.....

वैज्ञानिकों ने ऑस्ट्रेलियन मरीन नेशनल फैसिलिटीज के आरवी इनवेस्टीगेटरों द्वारा जुटाए गए नमूनों के आधार पर यह दावा किया है.

प्रोफेसर सोनिया क्रिडेनवाइस और उनकी टीम के मुताबिक दक्षिण सागर के ऊपर का इलाका ऐसा है, जहां प्रदूषण का कोई भी पार्टिकल नहीं मिला. वैज्ञानिकों को वहां हवा की ऐसी परत मिली जिसमें जीवाश्म ईंधन, फसलों के अवशेष और खाद उत्पादन, परिवहन और वेस्ट वॉटर डिस्पोजल का कोई भी अंश नहीं था.

एयरोसॉल्‍स क्या है?

एयरोसॉल पार्टिकल्‍स ईंधन जलाने, फसलें उगाने, फर्टिलाइजर्स का इस्‍तेमाल करने, कूड़ा-कूचरा फेंकने जैसी इंसानी गतिविधियों से बनते हैं...एयरोसॉल्‍स जिसकी वजह से ही प्रदूषण होता है. ...ये एयरोसॉल ठोस, द्रव और गैस तीनों स्‍वरूपों में पाए जाते हैं, जो हवा में तैरते रहते हैं. ये पर्यावरण (Climate) और मौसम (Weather) दोनों को प्रभावित कर सकते हैं. दरअसल, ये सूर्य की ऊर्जा को वापस अंतरिक्ष में धकेल देते हैं. हालांकि, ये एयरोसॉल हर जगह एक समान मात्रा में नहीं पाए जाते हैं....

एक बैक्टीरिया की मदद से वैज्ञानिक हवा में घुले इन अतिसूक्ष्म कणों का पता लगाते हैं. जांच से पता चलता है कि ये कण कहां से निकले हैं....विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया भर में हर साल वायु प्रदूषण से 70 लाख लोग मारे जाते हैं....दिल की बीमारियों, स्ट्रोक और लंग कैंसर के बढ़ते मामलों के लिए भी वायु प्रदूषण को जिम्मेदार माना जा रहा है. वायु प्रदूषण के लिहाज से दुनिया के 20 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में भारत के 13 शहर शामिल हैं...

हवा से हजारों मील दूर तक जा सकते हैं माइक्रोब्‍स

साइंटिस्‍ट इससे पहले भी दुनियाभर के समुद्रों के ऊपर बहने वाली हवा पर रिसर्च कर चुके हैं, लेकिन हर जगह उन्‍हें दूसरी जगहों के माइक्रोब्‍स भी मिले थे. ये हवा के जरिये हजारों मील तक पहुंच सकते हैं. आसान शब्‍दों में समझें तो दुनिया के एक हिस्‍से में बनने वाले पार्टिकल्‍स बहुत दूर के किसी क्षेत्र के वातावरण को भी प्रभावित कर सकते हैं. वैज्ञानिकों और स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों के मुताबिक, वायु प्रदूषण महामारी की तरह है.

ऐसे में जरुरत है उस हरेक कदम की और बढ़ना जो वायु प्रदुषण को कम कर सके