(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) क्या है नाइन डैश लाइन? (What is Nine Dash Line?)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी)  क्या है नाइन डैश लाइन? (What is Nine Dash Line?)



चीन, अन्य देशों के विशेष आर्थिक क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति को मजबूत कर रहा है, जबकि संबंधित देश COVID-19 महामारी से निपटने में उलझे हुए है.... दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन, फिलीपींस, ताइवान, वियतनाम, ब्रूनेई और मलेशिया के बीच विवाद है. समुद्री और हवाई मार्गों की स्वतंत्रता का हवाला देकर 2015 में अमेरिका भी इसमें शामिल हो गया है. हाल के वर्षों में चीन ने इस क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं. ..वहीँ चीन द्वारा, अक्सर ‘नाइन-डैश लाइन’ (Nine-Dash line) का उपयोग अपने समुद्र क्षेत्रीय दावों के लिए किया जाता है,

आज DNS कर्यक्रम में हम बात करेंगे.. जिस 'नाइन डैश लाइन' का हवाला देकर चीन दक्षिण चीन सागर पर दावा कर रहा है वह है क्या?...और साथ ही एक नज़र डालेंगे दक्षिण चीन सागर को लेकर इन विवादों की वजह क्या है.....

चीन के दक्षिणी चीन सागर तथा क्षेत्र में स्थित अन्य देशो से विवादो के केद्र में समुद्री क्षेत्रों में संप्रभुता स्थापित करने संबंधी विवाद है...इस क्षेत्र में ‘पारसेल द्वीप समूह’ (Paracels Islands) तथा ‘स्प्रैटली द्वीप समूह’ (Spratley Islands) दो श्रंखलाएं अवस्थित है, यह द्वीप समूह कई देशों की समुद्री सीमा में बिखरे हुए है, जोकि इस क्षेत्र में विवाद का एक प्रमुख कारण है....

पूर्ण विकसित द्वीपों के साथ-साथ स्कारबोरो शोल जैसी, दर्जनों चट्टाने, एटोल, सैंडबैंक तथा रीफ भी विवाद का कारण हैं...

दरअसल, यह टकराव निर्जन द्वीपों पर कब्जा करने की कोशिश भर नहीं है. दक्षिण चीन सागर में मौजूद प्राकृतिक संपदा भी इसकी एक प्रमुख वजह है. एक आकलन के मुताबिक इस क्षेत्र में 11 अरब बैरल कच्चा तेल और लगभग 190 खरब क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस का भंडार मौजूद है. इसके अलावा यह क्षेत्र समुद्री व्यापारिक परिवहन के लिहाज से भी अहम है. यहां से होकर सालाना 5.3 खरब डॉलर का समुद्री व्यापार होता है. इसलिए दक्षिण चीन सागर से सटे सारे देश इस का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा अपने कब्जे में लेना चाहते हैं...

दक्षिणी चीन सागर के पैरासेल और स्प्रैटली द्वीप समूह पर अपने अधिकार को चीन काफी पुराना बताता है. वह इसके पक्ष में 1947 सैंतालिस में अपने यहां प्रकाशित एक मानचित्र दिखाता है जिसमें अंग्रेजी के यू अक्षर के आकार में 11 'डैश' लाइनें बनी हुई हैं. 50 के दशक में प्रधानमंत्री चाऊ एनलाई ने इसमें से दो डैश हटवा दिए थे. चीन इस नक्शे के आधार पर ही दक्षिणी चीन सागर को अपना आंतरिक हिस्सा बताता है. ताइवान भी ठीक ऐसा ही दावा दोहराता है. यह स्वाभाविक भी है...1947 में जब यह नक्शा प्रकाशित हुआ था तो चीन रिपब्लिक ऑफ चाइना हुआ करता था. 1949 की कम्युनिस्ट क्रांति के बाद चीन की मुख्यभूमि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना हो गई और तत्कालीन सरकार का राज ताइवान द्वीप तक सीमित रह गया जो आज भी जारी है....

जहाँ आलोचक नाइन डैश लाइन वाले नक्शे के आधार पर चीन के दावे को अस्पष्ट मानते हैं...उनका कहना है कि 1947 के मानचित्र में इसे लेकर कोई निर्देश ही नहीं हैं कि ये डैश हैं क्या....अमूमन मानचित्रों में सभी चिन्हों के बारे में निर्देश दिए जाते हैं. आलोचकों के अनुसार इससे यह भी स्पष्ट नहीं होता है कि चीन ‘नाइन डैश लाइन’ के भीतर की भूमि पर अधिकार जता रहा है या पूरे समुद्री क्षेत्र पर. इसके अलावा यह ‘नाइन डैश लाइन’ अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत अलग-अलग देशों के समुद्री अधिकार क्षेत्र को तय करने वाली व्यवस्था से भी मेल नहीं खाती है. इसी वजह से पैरासेल और स्प्रैटली द्वीप समूह को लेकर चीन का फिलीपींस और वियतनाम से सैन्य टकराव भी हो चुका है....

9 डैश लाइन क्या है?

चीन के साथ लगने वाला इसका दक्षिणी सागर जिसे साउथ चाइना सी मतलब दक्षिणी चीन सागर के नाम से जाना जाता है...9 डैश लाइन खींची गई एक काल्पनिक रेखा है....इस रेखा को सीधे रूप में ना खींच कर 9 डैश में पूरा किया गया है इसलिए इसका नाम 9 डैश लाइन पड़ा है... और क्योंकि यह रेखा दक्षिण चीन सागर से लगने वाले देश फिलीपीन्स, ताइवान, वियतनाम, मलेशिया, ब्रूनेई, इंडोनेशिया तथा सिंगापुर के आधिकारिक समुंद्री क्षेत्र से होकर गुजरती है इस कारण यह रेखा अंतराष्ट्रीय विवाद का कारण बनी हुई है...

अंतराष्ट्रीय नियमों के अनुसार जब कोई देश किसी समुंद्र के साथ सीमा बनाता है तो उस समुंद्र का 200 मील तक का क्षेत्र उस देश की आधिकारिक सम्पति बन जाता है। जबकि 9 डैश लाइन इन देशों के इस 200 मील के क्षेत्र से होकर गुजरती है। यह लाइन दक्षिणी चीन सागर के कुल भाग का 80% चीन का कब्जा बनाती है जिससे चीन का कुल सागर के 80% भाग पर दावा घोषित होता है। इस दावे को पुख्ता करने के लिए चीन 3000 वर्ष पहले जब चीन में राजाओं का राज था उस समय का हवाला देता है तथा स्पष्ट करता है कि उसका इस सागर पर ऐतिहासिक अधिकार है। चीन का कहना है कि दक्षिणी चीन सागर में सभी टापू उसके हैं तथा टापुओं के आस पास के 200 मील समुंद्री क्षेत्र पर उसका अधिकार है जो कि कुल सागर का 80% प्रतिशत बनता है...

जबकि फिलीपीन्स इस सागर के 200 मील क्षेत्र पर अपना दावा करता है जिसे अंतराष्ट्रीय न्यायालय ने भी मान्यता दी है परन्तु क्योंकि चीन अंतराष्ट्रीय न्यायालय के इस फैसले को दरकिनार करता है इसलिए फिलीपीन्स तथा चीन के मध्य विवाद की स्थिति बनी रहती है....वहीँ नाइन डैश लाइन विवाद का सबंध चीन, वियतनाम, फिलीपीन्स, ताइवान, मलेशिया, ब्रूनेई, इंडोनेशिया तथा सिंगापुर से है...दक्षिणी चीन सागर जिसमें नाइन डैश लाइन खींची गई है उसका कुल क्षेत्रफल 35 लाख वर्ग किलो मीटर...

कुछ देशों का यह भी कहना है कि चीन को आसियान के साथ बातचीत करनी चाहिए…आपको बता दें ‘क्षेत्रीय विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से हल करना’, जो ‘दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन’ (Association of Southeast Asian Nations- ASEAN) के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है... लेकिन इन वर्षों में, दक्षिण चीन सागर विवादों पर आसियान की स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि को कमजोर किया है...ऐसे में आसियान द्वारा इन विवादों को हल करने में विफल रहने से एक प्रभावी क्षेत्रीय संगठन के रूप में इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं....आपको बता दें आसियान में थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, ब्रूनेई, लाओस, वियतनाम, म्यांमार और कंबोडिया शामिल हैं...