(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) चीन के खिलाफ भारत का मिरर डिप्लॉयमेंट (What is India's "Mirror Deployment" Against China)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) चीन के खिलाफ भारत का मिरर डिप्लॉयमेंट (What is India's "Mirror Deployment" Against China)



भारत चीन सीमा पर चीन अपने आक्रामक तेवर दिखाने से बाज़ नहीं आ रहा है। चीन पूर्वी लदाख में लगातार सेना की टुकड़ियां बढ़ाता जा रहा है। चीन के आक्रामक रुख को भांपते हुए भारत ने भी एहतियाती कदम उठाते हुए पांगोंग सो झील और गालवन घाटी क्षेत्र के आस पास अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है। भारत का तर्क है की उसका यह कदम चीन के बढ़ते क़दमों को रोकना है न की कोई जंग शुरू करना। हालांकि चीन ने भी इस इलाके में अपनी मौजूदगी दर्ज़ कराने के लिए गालवन घाटी में सरगर्मियां बढ़ा दी है। गौरतलब है की चीन ने इस क्षेत्र में तकरीबन 100 टेंट गाड़ दिए है और पूरे क्षेत्र को एक सैनिक छावनी में तब्दील करने की फ़िराक में है। ये भी माना जा रहा है की चीन इस क्षेत्र में मशीनों की तादाद में भी इज़ाफ़ा कर रहा है जिसका मकसद यहां पर सैनिकों के लिए बंकर बनाना हो सकता है। हालांकि भारत ने भी चीन की इन हरकतों का माकूल जवाब देने के लिए कमर कस ली है। भारत ने चीन के विरुद्ध मिरर डिप्लॉयमेंट तकनीक का इस्तेमाल करने की योजना बनाई है।

क्या है भारत की मिरर डिप्लॉयमेंट की रणनीति और भारत किस तरह इस नीति का इस्तेमाल चीन के खिलाफ करेगा इन्ही सब बातों का विश्लेषण आज हम अपने DNS कार्यक्रम में करेंगे।

भारत चीन सीमा विवाद नया नहीं है

दोनों देश जो दुनिया के उन देशों में शुमार हैं जिनके बीच सबसे लम्बी बिना खींची सीमा है। दोनों देशों के बीच 1962 में एक जंग लड़ी गयी जिसके बाद से दोनों देशों के बीच सीमा पर छोटी मोटी झड़पें होती रहती हैं। हालांकि 1975 से अब तक इस साझा सीमा पर एक दोनों मुल्को की और से एक गोली तक नहीं चली। लेकिन हाल के घटनाक्रम को देखकर ये बात ज़ाहिर है की इस बार की झड़प एक जंग में तब्दील हो ने की पूरी गुंजाईश है। दोनों मुल्कों की और से सीमा पर सेना की तैनाती दिन बा दिन बढ़ती जा रही है। दशकों से चीन की आधिकारिक सेना पीपल लिबरेशन आर्मी भारत की एक तरह से सैन्य तैयारियों की परीक्षा ले रही है। इसके अलावा कई रणनीतिक क्षेत्रों में वो भारत के राजनीतिक सूझबूझ की भी परख कर रही है।

चीन ने सीमा पर बड़ी तादाद में बॉर्डर डिफेंस रेजिमेंट (BDR) के जवानों को तैनात किया है। चीन के इस कदम पर भारत ने भी ‘मिरर डिप्‍लॉयमेंट’ की रणनीति अपनाते हुए सीमा पर अपनी सेनाओं की उपस्थिति बढ़ा दी है । अब सवाल ये उठता है की क्या होती है मिरर डेप्लोमेंट की रणनीति।

दरसल में मिरर डिप्लॉयमेंट का मतलब है की चीन के किसी भी कदम के मुताबिक भारत वैसा ही कदम उठाएगा। मसलन अगर चीन सीमा पर अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाता है तो भारत भी उतनी ही सैन्य क्षमता सीमा के इस पार बढ़ाएगा। इसके अलावा चीन अगर सीमा पर अपने संसाधनों में इज़ाफ़ा करेगा तो भारत भी उसी तरह अपने संसाधनों में बढ़ोत्तरी करेगा। चीन ने हाल ही में पांगोंग सो झील में अपनी गश्ती नावों की संख्या बढ़ा दी है। इसके अलावा गलवान घाटी में भी चीन के हेलीकॉप्टरों को उड़ते हुए देखा गया है। भारत और चीन दोनों ने अपने कुछ हज़ार से ज़्यादा सैनिकों को सीमा पर तैनात किया है। इसके अलावा भारत एहतियात के तौर पर और भी बटालियन की इकाइयां लद्दाख भेज रहा है।

पैंगोंग झील पर 5 मई को चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच हुई झड़पों की खबर आने के बाद से पूर्वी लद्दाख में दोनों सेनाओं के बीच होने वाली सरगर्मियां बढ़ गयी हैं। गौर तलब है की पांगोंग झील पर सीमा का दो तिहाई भाग चीन के कब्ज़े में है। चीन इस घटना के बाद से अपनी सेनाओं को लगातार यहाँ बढ़ाता जा रहा है। न तनावों के बीच भारतीय सेना प्रमुख एम एम नरवणे ने पूर्वीं लदाख क्षेत्र का दौरा किया और वहां की स्थिति का जायज़ा लिया।