(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) UAE द्वारा पाकिस्तान सहित 12 देशों को वीजा देने पर रोक (UAE Prohibits Visa to 12 Countries Including Pakistan)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) UAE द्वारा पाकिस्तान सहित 12 देशों को वीजा देने पर रोक (UAE Prohibits Visa to 12 Countries Including Pakistan)



बीते दिनों, खाड़ी देश संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान समेत 12 देशों को विजिट वीजा जारी करने पर रोक लगा दी है। संयुक्त अरब अमीरात अन्य देशों को अपने यहां घूमने के मक़सद से बिजनेस, पर्यटन, ट्रांजिट और स्टूडेंट वीजा देता है। यूएई के विदेश कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि कोविड 19 महामारी की दूसरी लहर की आंशका के चलते यह निर्णय लिया गया है।

डीएनएस में आज हम जानेंगे कि आखिर क्यों UAE ने इन देशों को वीजा देने से मना कर दिया और साथ ही, समझेंगे इससे जुड़े कुछ दूसरे अहम पक्षों को भी….

जून, 2020 में जब पाकिस्तान में कोविड 19 के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई थी, उस वक़्त भी यूएई ने 3 जुलाई तक के लिए पाकिस्तान से हवाई यात्री सेवाओं पर अस्थाई रोक लगा दी थी। हालांकि कुछ विशेषज्ञ इस प्रतिबंध के पीछे दूसरी वजह भी बता रहे हैं। बताया जा रहा है कि पाक के प्रधानमंत्री इमरान खान ने यूएई के इजरायल के साथ द्विपक्षीय संबंध रखने की तीखी आलोचना की थी। इससे UAE काफी नाराज चल रहा है।

अब हाल में इसी तरह के दुबारा लिए गए फैसले में पाकिस्तान समेत जिन देशों पर यात्रा के लिए अस्थाई रोक लगाई गई उसमें टर्की, ईरान, यमन, सीरिया, लीबिया, इराक, सोमालिया, केन्या और अफगानिस्तान शामिल हैं। ग़ौरतलब है कि अगस्त महीने में कुवैत के उड्डयन मंत्रालय ने पाकिस्तान समेत 30 अन्य देशों से होने वाले व्यावसायिक उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

दरअसल कोरोना वायरस के चलते खाड़ी देशों समेत दुनिया भर के कई देश अलग-अलग स्तरों पर संरक्षणवादी नीतियां अपनाने के लिए मजबूर हैं। अपने स्थानीय नागरिकों का स्वास्थ्य और कल्याण इन देशों की पहली प्राथमिकता बन चुकी है। इसी क्रम में, अभी कुछ महीने पहले ही रोजगार की अनिश्चितताओं, तेल की घटती कीमतों, स्थानीय जनता की सुविधाओं का ध्यान, महामारी के नकारात्मक प्रभावों और वैश्विक एवं क्षेत्रीय मंदी की आशंकाओं के बीच खाड़ी देश कुवैत ने भी एक बड़ा संरक्षणवादी कदम उठाने का निर्णय लिया था। इसमें कुवैत में रहने वाले प्रवासी भारतीयों और साथ ही उनके द्वारा वहां से भेजे जाने वाले रेमिटेंस पर गंभीर विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना नजर आने लगी थी। कोरोना वायरस की महामारी के बीच खाड़ी देश कुवैत ने अपनी संसद में एक कानून पारित कर प्रावधान किया था कि अब भारतीय प्रवासी कुवैत की कुल जनसंख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकते। इसके चलते कुवैत में रहने वाले भारतीयों में से 8 लाख भारतीय असुरक्षा महसूस करने लगे थे।

इसके अलावा, खाड़ी देश ओमान ने भी अपने यहां सरकारी नौकरियों में ओमान के नागरिकों की ही भर्ती करने और उन्हें प्राथमिकता देने की घोषणा कर दी। हालांकि ये वैश्वीकरण और मुक्त प्रतिस्पर्धा को नकारने जैसा है लेकिन अपने स्वदेशी नागरिकों को तरजीह देने को सभी देश औचित्यपूर्ण ठहराने लगे हैं। बता दें कि ओमान में 7 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं जिनमें से 6 लाख शुद्ध रूप से ब्लू कॉलर श्रमिक और पेशेवर वर्ग से हैं।

संरक्षणवाद की वजह से न केवल अंतरराष्ट्रीय संबंध बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी बाधित होता है। आमतौर पर संरक्षणवाद के तहत घरेलू व्यापार और नौकरियों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने और व्यापार घाटे को सही करने के लिहाज़ से कदम उठाये जाते हैं। इसके लिए एक देश दूसरे देश से आने वाले सामान या सेवाओं पर टैरिफ या टैक्स लगा देता है या उसे बढ़ा देता है। या कभी-कभी इससे भी कड़े फैसले लिए जाते हैं, मसलन वीजा जारी करने पर प्रतिबंध लगा देना।