(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) क्या है ऑस्ट्रेलिया में लगी आग का सच? (Truth Behind Australia's Fire?)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी)  क्या है ऑस्ट्रेलिया में लगी आग का सच? (Truth Behind Australia's Fire?)


ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट में मौजूद जंगल इन दिनों बेहद ही भयावह घटना से गुज़र रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी इस आग में हज़ारों बेज़ुबान जीव जंतु मारे जा चुके हैं। साल 2019 के आखिर में लगी ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में काफी तेज़ी से फ़ैल रही है। इस आग से जंगल का लगभग 5.5 मिलियन क्षेत्रफल बर्बाद हो चुका है, साथ ही जंगल के आस - पास बसे इलाक़ों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस प्राकृतिक आपदा में अब तक क़रीब 20 से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि की गई है। गर्म हवा और जहरीले धुएंं के चलते ऑस्ट्रेलिया के ये इलाके एक तरीके से हांफ से गए हैं। हालात ये हैं कि मौजूदा वक़्त में ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबेरा दुनिया की सबसे प्रदूषित जगह बन गई है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के कई इलाकों में आपात स्थिति की घोषण की गई है।

DNS में आज हम जानेंगे कि ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग की वजह क्या है ? साथ ही समझेंगे कि आए दिन जंगलों में आग की ये घटनाएँ कैसे और क्यों घटित होती हैं।

पिछले साल अमेज़न की जंगलों में लगी आग का मंज़र अभी लोगों के दिल से उतरा भी नहीं था कि नए साल की शुरुआत में हुई इस प्राकृतिक घटना ने एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान तेजी से बदल रहे जलवायु परिवर्तन की ओर खींचा है। जंगल में लगी आग के बाद भागने की कोशिश में तार में उलझे इस ऑस्ट्रेलियाई कंगारू की तस्वीर हो या फिर ज़मीन पर राख की तरह पड़े हज़ारों बेज़ुबान जानवरों के कई और दृश्य। ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी इस आग का कहर इन तस्वीरों से साफ़ तौर पर समझा जा सकता है। घने धुंध में डूबे ऑस्ट्रेलिया के कई इलाक़ों हालात इतने ख़राब है कि अभी भी लोग बाहर आने की कोशिशों में लगे हुए हैं।

ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में ये आग साल 2019 के जुलाई महीनों से ही लगी है। ऑस्ट्रेलिया में लगी इस आग से न्यू साउथ वेल्स का क़रीब 40 हेक्टेयर इलाका तबाह हो चुका है। ऑस्ट्रेलिया में लगी इस आग के पीछे मुख्य रूप से ग्लोबल वार्मिंग को ही ज़िम्मेदार माना जायेगा। दरअसल जलवायु परिवर्तन के कारण ऑस्ट्रेलिया में तापमान काफी तेज़ी से बढ़ा है और इस साल यहां बारिश न के बराबर हुई है। ऑस्ट्रेलिया में पड़ने वाली भीषड़ गर्मी, सूखा और पिछले तीन महीनों से चल रही गर्म तेज़ हवाओं जैसी कुछ ऐसी घटनाएं रही हैं, जिसके कारण ये आग जंगलों के अलावा आस - पास के इलाकों तक भी फ़ैल गई है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में इतनी ज़्यादा गर्मी इसलिए भी पड़ती है क्यूंकि पृथ्वी की एक्सिस 23 डिग्री यानी जायरोस्कोप जैसी टिल्टेड है। ऐसे में एक ऐसा एंगल बनता है, जिसके कारण ऑस्ट्रेलिया में सूर्य की रोशनी काफी तेज़ आती है और इससे यहां गर्मी बढ़ जाती है।

बात चाहे अमेरिका के कैलिफोर्निआ के जंगलों में लगने वाली आग हो या फिर रूस के साइबरिया और ब्राज़ील के अमेजन वर्षा वनों में पैदा होने वाली वनाग्नि की घटनाओं की, इन सब के पीछे भी कमोबेश जलवायु परिवर्तन के ही कारण ज़िम्मेदार रहे है। हालांकि जंगलों में लगने वाली आग की कुछ परिस्थतियों में इंसानी भूमिका भी ज़िम्मेदार होती है। देखा जाए तो साल 2019 में जंगलों में आग की ज़्यादातर घटनाओं में इंसानी भूमिका मुख्य रूप से मानव ज़िम्मेद्दार हैं। एक आकंड़े के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया में लगभग 62 हज़ार आग की घटनाएं सालाना दर्ज़ की जाती है औरइनमें से क़रीब 13 % घटनाएं मानव जनित कारणों से होती है।

वनाग्नि क्या है और इसके क्या दुष्प्रभाव होते हैं

दरअसल वनाग्नि उस दुर्घटना को कहते हैं जब किसी प्राकृतिक या मानवीय कारण से किसी वन के एक भाग में या पूरे वन में ही आग लग जाती है और उस वन की वनस्पति एवं जैव विविधता खतरे में पड़ जाती हैं। वनाग्नि अपने विशाल आकार के कारण, इसके उद्गम स्थान से आगे फैलने की गति एवं इसकी दिशा बदलने व खाली स्थानों जैसे सड़कों, नदियों आदि से आगे बढ़ जाने की क्षमता के कारण यह अन्य अग्नियों से अलग होता है।

जंगलों में इस तरह की आग की स्थिति तब पैदा होती है जब वनस्पतियां और मिट्टी सूख जाते हैं और आद्रता भी बहुत कम होती है। इसके अलावा जंगलों में ये आग प्राकृतिक कारणों जैसे आकाशीय बिजली गिरने से या प्राकृतिक रूप से वन में उत्पन्न घर्षण से लग सकती है। साथ ही जंगलों में लगने वाली ये आग मानव निर्मित भी हो सकती है जिसमें किसी की लापरवाही से सूखे वन में सुलगती हुई सिगरेट या माचिस की तीली फैंक देने जैसे कृत्य शामिल हैं । जानकारों का कहना है कि जंगलों में लगने वाली आग जंगल में मौजूद सूखे झाडफूस और हवा के प्रभाव में तेज़ी से फैलती है।

जंगलों में लगने वाली आग का सबसे ज़्यादा असर कार्बन चक्र पर पड़ता है। दरअसल जंगल ही CO2 को सोखते हैं ऐसे में जब जंगल ही नहीं रहेंगे तो इसका सीधा असर हमारे पर्यावरण पर पड़ेगा। साथ ही जंगलों में आग लगने से वनस्पतियों और वन्यजीवों का अस्तित्व भी खतरे में आ जाता है। वनों में लगने वाली आग के कारण जैव सम्पदा के भी दुष्प्रभावित होने का ख़तरा रहता है। इसके अलावा कृषि और विकास कार्यों से मृदा क्षरण की समस्या उत्पन्न होती है । साथ ही इस तरह की घटनाओं से स्थानीय सांस्कृतिक व्यवस्था भी ख़राब होती है। ऐसे में कई स्थानीय जनजातियों जिनका अस्तित्व वहां की जैव-विविधता और प्राकृतिक वातावरण पर निर्भर करता हैं वो भी खतरे में आ जाती हैं।