(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भारत के बाघों की गिनती (Tiger Census Sets New Guinness Record in India)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भारत के बाघों की गिनती (Tiger Census Sets New Guinness Record in India)



संदर्भ:

पिछले साल वैश्विक बाघ दिवस के मौके पर घोषित, अखिल भारतीय बाघ आकलन 2018 के चौथे चरण के परिणामों ने दुनिया के ‘सबसे बड़े कैमरा ट्रैप वन्यजीव सर्वेक्षण’ होने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया है।

दरअसल में कैमरा ट्रैप मोशन सेंसर्स के साथ लगे हुए एक तरह के बाहरी फोटोग्राफिक उपकरण होते हैं , जो किसी भी जानवर के गुजरने पर रिकॉर्डिंग शुरू कर देते हैं. इन कैमरा ट्रैप को जंगल के 141 अलग अलग साइटों के 26,८३८ जगहों पर रखा गया था . इसके ज़रिये तकरीबन 1,21,337 वर्ग किलोमीटर के प्रभावी क्षेत्र का सर्वेक्षण किया गया।

भारत में वाघों की स्थिति:

  • ताज़ातरीन गिनती के मुताबिक़ , देश में बाधों की अनुमानित तादाद 2,967 हैं।
  • इस आंकड़े पर गौर करें तो , भारत के जंगलों में दुनिया के बाघों के तकरीबन 75 फीसदी बाघ मौजूद हैं.
  • गौर तलब है की भारत ने साल 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग में बाघों की संख्या दोगुनी करने का एलान किया था हालांकि भारत ने संकल्प इस निर्धारित लक्ष्य को साल 2022 से बहुत पहले ही पा लिया है ।

देश के विभिन्न राज्यों में मौजूद बाघों की संख्या

  • देश में बाघों की सबसे ज़्यादा तादाद , मध्य प्रदेश में है यहाँ कुल 526 बाघ मौजूद हैं ., इसके बाद कर्नाटक राज्य दुसरे पायदान पर है जहाँ कुल बाघों की संख्या 524 है . उत्तराखंड इस बाघ गणना में तीसरे स्थान पर है जहां 442 बाघ यहां के जंगलों में हैं
  • बीते पांच सालों में , संरक्षित क्षेत्रों की संख्या 692 से बढ़कर 860 से अधिक, और सामुदायिक संरक्षित क्षेत्रों की तादाद 43 से बढ़कर 100 हो गई है।
  • साल 2006 की बाघ गणना पर गौर करें तो , देश में बाघों की संख्या 1,411 थी, जो साल 2010 में बढ़कर 1706 और साल 2014 में बढ़कर 2,226 हो गयी थी. इससे ये पता चलता है की बीते एक दशक में बाघों की संख्या में लगातार इज़ाफ़ा हुआ है
  • मध्य प्रदेश के पेंच बाघ अभ्यारणय में बाघों की सर्वाधिक संख्या दर्ज की गयी तथा, तमिलनाडु के सत्यामंगलम बाघ अभ्यारणय में वर्ष 2014 के पश्चात ‘अधिकतम सुधार’ दर्ज किया गया।
  • छत्तीसगढ़ और मिजोरम में बाघों की संख्या में कमी पायी गई जबकि ओडिशा में बाघों की संख्या स्थिर रही। अन्य सभी राज्यों में सकारात्मक वृद्धि पायी गयी।

अखिल भारतीय बाघ आंकलन:

अखिल भारतीय बाघ आकलन को प्रति चार वर्ष में ‘राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण’ (NTCA) द्वारा भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) के तकनीकी समर्थन से आयोजित किया जाता है तथा राज्य वन विभागों और अन्य भागीदारों द्वारा इसे कार्यान्वित किया जाता है।

वैश्विक तथा राष्ट्रीय स्तर पर जारी बाघ संरक्षण के प्रयास:

  1. भारत में वर्ष 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत की गयी, जो वर्तमान में 50 से अधिक संरक्षित क्षेत्रों में, देश के भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 2.2% के बराबर क्षेत्रफल, में सफलतापूर्वक जारी है।
  2. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority- NTCA) द्वारा वन- रक्षकों के लिए एक मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम, M-STrIPES– मॉनिटरिंग सिस्‍टम फॉर टाइगर्स इंटेंसिव प्रोटेक्‍शन एंड इकोलॉजिकल स्‍टेट्स (Monitoring system for Tigers’ Intensive Protection and Ecological Status) लॉन्च किया गया है।
  3. वर्ष 2010 में आयोजित पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में, वैश्विक स्तर पर 13 बाघ रेंज वाले देशों के नेताओं ने ‘T X 2’ नारा के साथ बाघों की संख्या को दोगुना करने हेतु अधिक प्रयास करने का संकल्प लिया।
  4. विश्व बैंक ने अपने ‘ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव’ (GTI) कार्यक्रम, के माध्यम से, अपनी उपस्थिति और संगठन क्षमता का उपयोग करते हुए, बाघ एजेंडे को मजबूत करने हेतु वैश्विक साझेदारों को एक मंच पर एकत्रित किया है।
  5. इन वर्षों में, ‘ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव’ (GTI) पहल, ‘ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव काउंसिल (GTIC) के संस्थागत रूप में स्थापित हो गयी है, तथा अब यह, – ग्लोबल टाइगर फोरम (Global Tiger Forum) तथा ग्लोबल स्नो लेपर्ड इकोसिस्टम प्रोटेक्शन प्रोग्राम (Global Snow Leopard Ecosystem Protection Program)- के माध्यम से बाघ संरक्षण संबंधी कार्यक्रम चला रही है।