(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) टास्क फोर्स "ताकूबा" (Task Force "TAKUBA")


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) टास्क फोर्स "ताकूबा" (Task Force "TAKUBA")



हाल ही में, फ्रांस की पहल पर ख़ास यूरोपीय सिपाहियों का एक नया सैन्य दस्ता गठित किया गया है. इसका नाम है टास्क फोर्स ताकूबा. यह अफ्रीका के साहेल प्रांत में आतंकवादियों के खिलाफ लड़ने का काम करेगी. फिलहाल यह दस्ता माली के विशिष्ट फौजी दस्तों की मदद कर रही है।

डीएनएस में आज हम आपको ताकूबा फोर्स के बारे में बताएंगे और साथ ही समझेंगे इससे जुड़े कुछ दूसरे महत्वपूर्ण पक्षों को भी…...

अगर ताकूबा के शाब्दिक अर्थ की बात करें तो यह उत्तरी अफ्रीका के सहेल क्षेत्र में बनने वाले एक खास किस्म के तलवार को कहा जाता है। आमतौर पर इसकी लंबाई लगभग एक मीटर होती है और इसके ब्लेड सीधे और दुधारी होते हैं।

यहां यह बताना जरूरी है कि सहेल किस क्षेत्र को कहते हैं. दरअसल साहेल या सहेल पट्टी अफ़्रीका के पश्चिम से पुर्व तक फ़ैला एक इलाक़ा है जो सहारा के रेगिस्तान को दक्षिण के घास के मैदानो से अलग करता है। सहेल पट्टी सेनेगल, मॉरीतानिया, माली, बुर्किना फासो, नाइजर, नाईजीरिया, चाड, सूडान और इरीट्रिया में फ़ैली हुई है। सहेल पट्टी की लंबाई तकरीबन 3862 किलोमीटर है। यह अटलांटिक महासागर से लेकर लाल सागर तक फ़ैली हुई है। सहेल इलाके में विकास से जुड़ी नीतियों को बनाने और सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए G5 सहेल नाम का एक संगठन बनाया गया. इस संगठन के 5 सदस्य हैं, जिनमें बुर्किना फासो, चार्ट, माली, मॉरिटानिया और नाइजर शामिल है.

साल 2012 में माली में जिहादी चरमपंथ की शुरुआत हुई थी। इससे निपटने के लिए फ्रांस ने अगले साल इस देश में अपने सिपाही तैनात कर दिए थे। लेकिन उनकी उपस्थिति के बावजूद वहां जिहादी हिंसा पड़ोसी देशों बुर्किना फासो और नाइजर में फैल गई है। अब आलम ये है कि पूरा उत्तरी अफ्रीका आतंकवाद से जूझ रहा है। अभी तक इस इलाक़े में हजारों सैनिक और नागरिक हिंसा में मारे जा चुके हैं और लाखों लोग बेघर हो गए हैं। गौरतलब है कि 2014 में फ्रांस के करीब 4500 सैनिकों ने पश्चिमी अफ्रीकी देशों की मदद करने के लिए बरखाने नामक अभियान शुरू किया था।

बहरहाल माली की इंसर्जेन्सी का अंत नजर ही नहीं आ रहा है और जनता में इसे लेकर एक समय में इतना आक्रोश था कि पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम बुबाकर कीटा के खिलाफ भारी प्रदर्शन हुए। अगस्त 2018 में एक सैन्य तख्ता पलट के बाद उन्हें सत्ता से हाथ धोना पड़ा।

जब इस क्षेत्र में आतंकवाद पर लगाम लगाना इन देशों के लिए मुश्किल हो गया तो इन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से गुजारिश की कि वहां पर एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य बल तैनात किया जाए. इसी क्रम में फ्रांस और उसके कई यूरोपीय सहयोगियों ने आधिकारिक रूप से एक नई टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसे ताकुबा कहा जाता है. यह खास सशस्त्र बल माली और नाइजर की सेनाओं के साथ मिलकर पश्चिम अफ्रीकी क्षेत्र साहेल में आतंकवादी समूहों से लड़ेगा।

ताकुबा फोर्स में सहयोग करने के लिए कुल 13 देशों ने सहमति जाहिर की है. इन देशों में बेल्जियम, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्टोनिया, फ्रांस, जर्मनी, माली, नीदरलैंड, नाइजर, नॉर्वे, पुर्तगाल, स्वीडन और यूके शामिल हैं।

यूएन, फ्रांस और अमेरिका ने सहेल में शांति स्थापित करने के मकसद से अरबों डॉलर खर्च किए हैं, लेकिन वाजिब सफलता नहीं मिली है। ताकूबा अभी शुरूआती चरण में ही है और अभी यह देखने वाली बात होगी कि इसमें योगदान करने का वादा करने वाले दूसरे देश इसमें अपने सैन्य बल कब भेजेंगे।