(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) ताल ज्वालामुखी (Taal Volcano Eruption : Widespread Destruction in Philippines)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) ताल ज्वालामुखी (Taal Volcano Eruption : Widespread Destruction in Philippines)


चारों तरफ राख का अंबार, बीच-बीच में तेजी से हो रहे धमाके एवं भूकंप के झटके, चारों तरफ भागते हुए लोग।यह नजारा बिल्कुल फिल्मों में दिखाए जाने वाले पृथ्वी के अस्तित्व की समाप्ति वाले दृश्य के समान प्रतीत होता है। लेकिन यह नजारा पृथ्वी के अस्तित्व की समाप्ति का नहीं बल्कि यह नजारा फिलीपींस में हुए एक ज्वालामुखी विस्फोट का है। आपको बता दें ताल ज्वालामुखी फिलीपींस देश के लूज़ोन द्वीप पर स्थित एक सक्रिय ज्वालामुखी है। यह फिलीपींस के सबसे सक्रिय ज्वालामुखीयों में से एक है जिसमें अब तक 30 से भी ज्यादा विस्फोट हो चुके हैं। दशकों बाद फिलीपींस के ताल ज्वालामुखी ने पुनः आग उगलना शुरू किया है। वैसे तो ताल ज्वालामुखी को दुनिया के सबसे छोटे ज्वालामुखीयों में शामिल किया जाता है लेकिन इतिहास गवाह है कि जब-जब यह ज्वालामुखी सक्रिय हुआ तब तब हजारों जिंदगियां इसकी भेंट चढ़ गई। 1911 में इस ज्वालामुखी के फटने से 1300 से ज्यादा लोग मारे गए वहीं 1965 में 190 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। इसके साथ ही इस ज्वालामुखी में 1960 से लेकर 1980 के दशक में कई विस्फोट भी हुए। वर्तमान में हुए इस ज्वालामुखी विस्फोट ने फिलीपींस के कई किलोमीटर का क्षेत्र अपनी आगोश में ले लिया है। ताल ज्वालामुखी के चारों ओर ताल झील फैली हुई है। यह एक क्रेटर झील है। ताल झील के कारण ताल ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा तो मुख्य जमीन पर तो नहीं आ पायेगा लेकिन इससे निकलने वाली राख आसमान के रास्ते यहां के लोगों पर गिर रही है। आलम यह है कि राख के इस अंबार ने सूर्य की रोशनी को भी रोक रखा है। ज्वालामुखी से उठने वाली राख ने सड़कों , खेत, घरों, पेड़-पौधों इत्यादि सब कुछ को अपनी चपेट में ले लिया है। फिलीपींस प्रशासन इस आपदा से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य कर रहा है। लोगों को इस द्वीप को छोड़कर सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा रहा है। इलाकों में फैली राख और खराब हवा को देखते हुए सरकारी दफ्तर और स्कूल बंद रखने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों को सांस की समस्या से जूझ रहे लोगों की देखभाल करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही लोगों को घर के अंदर रहने की चेतावनी भी जारी की गई है। मनीला एयरपोर्ट से उड़ान भरने वालीफ्लाइट्स को उड़ान भरने से रोक दिया गया है।

आज के DNS कार्यक्रम में हम जाने की कोशिश करते हैं कि आखिर ज्वालामुखी होता क्या है?

दरअसल ज्वालामुखी भूपटल पर स्थित एक प्राकृतिक छेद या दरार होता है जिससे पृथ्वी के अन्दर का पिघला पदार्थ, गैस, भाप, राख इत्यादि बाहर निकलते हैं। पृथ्वी के सतह के अंदर पिघले हुए पदार्थ को मैग्मा कहते हैं वही जब यह मैग्मा पृथ्वी से बाहर आता है तो इसे लावा कहा जाता है। ज्वालामुखी विस्फोट के समय पृथ्वी से यही मैग्मा बाहर निकलता है एवं इसके साथ भारी मात्रा में जलवाष्प, राख एवं विभिन्न प्रकार के गैस इत्यादि बाहर निकलते हैं।

ज्वालामुखी तीन प्रकार होते हैं-

  1. सक्रिय ज्वालामुखी
  2. सुषुप्त ज्वालामुखी
  3. मृत ज्वालामुखी

सक्रिय ज्वालामुखी- उन ज्वालामुखीयों को कहा जाता है जिन पर समय-समय पर विस्फोट होता रहता है। संसार के कुछ सक्रिय ज्वालामुखी में हवाई द्वीप का मौना लोआ, सिसली का एटना और स्ट्राम्बोली, इटली का विसुवियस , इक्वेडोर का कोटोपैक्सी, अंडमान और निकोबार का बैरन द्वीप ज्वालामुखी एवं फिलीपींस का ताल ज्वालामुखी इत्यादि शामिल है।

सुषुप्त ज्वालामुखी- उन ज्वालामुखीयों को कहा जाता है जो वर्षों से शांत पड़े होते हैं लेकिन उनमें कभी भी ज्वालामुखी विस्फोट होने की संभावना बनी रहती है संसार के निष्क्रिय ज्वालामुखीयों में इटली का विसूवियस, जापान का फ्यूजीयामा, इंडोनेशिया का क्राकाटोआ एवं अंडमान और निकोबार का नारकोंडम ज्वालामुखी इत्यादि शामिल है।

मृत ज्वालामुखी- ऐसे ज्वालामुखीयों को कहा जाता है जो कई युगो से शांत है एवं उनमें विस्फोट होना बंद हो गया है। संसार की कुछ मृत ज्वालामुखीयों में म्यांमार का पोपा, अफ्रीका का किलिमंजारो, दक्षिण अमेरिका का चिम्बराजो, हवाई द्वीप का मोंनाको, ईरान का कोह सुल्तान इत्यादि शामिल है।

ज्वालामुखी विस्फोट से व्यापक पैमाने पर धन-जन की व्यापक हानि होती है। इतिहास में कई ऐसी घटनाएं घटी जब पूरे के पूरे शहर ज्वालामुखी से होने वाले विस्फोट के कारण काल के ग्रास में समा गए। उदाहरण के लिए इटली के दो प्रसिद्ध शहर पम्पियाई और हरक्युलैनियम ज्वालामुखी विस्फोट से बर्बाद हो गए। हालांकि ज्वालामुखी विस्फोट कई तरीके से लाभकारी भी होते है। इससे ना केवल नवीन संरचनाओं का निर्माण होता है जैसे की क्रेटर झील, लैकोलिथ, फैकोलिथ इत्यादि बल्कि कई खनिजों समेत काली मिट्टी के स्रोत भी ज्वालामुखी के लावा होते हैं।