(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) क्या होता है सुपर ब्लड मून? (What is Super Blood Moon?)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) क्या होता है सुपर ब्लड मून? (What is Super Blood Moon?)



क्या होता है सुपर ब्लड मून?

26 मई को चंद्र ग्रहण के दौरान दुनिया के कई हिस्सों में सुपर ब्लड मून दिखाई देखा। ये एक अनोखी घटना होती है जब चंद्र ग्रहण लगेगा और हमें ब्लड मून यानी चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देखा। पूर्ण चंद्र ग्रहण पश्चिमी उत्तर अमेरिका, पश्चिमी दक्षिण अमेरिका और पूर्वी एशिया में देखा जा सकेगा, जबकि भारत में आंशिक चंद्र ग्रहण ही देखा जा सकेगा।

DNS में आज हम आपको ‘सुपर ब्लड मून’ के बारे में बताएंगे और साथ ही समझेंगे इससे जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को भी।

सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के बीच में इस तरह आ जाती है कि चंद्रमा पृथ्वी की छाया से छिप जाता है। यह तभी संभव है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा अपनी कक्षा में एक दूसरे की बिल्कुल सीध में हों। दूसरे शब्दों में समझाएं तो पूर्णिमा के दिन जब सूर्य और चंद्रमा की बीच पृथ्वी आ जाती है तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इससे चंद्रमा का छाया वाला भाग अंधकारमय रहता है, और इस स्थिति में जब हम धरती से चंद्रमा को देखते हैं तो वह भाग हमें काला दिखाई पड़ता है। इसी वजह से इसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है।

सुपरमून क्या होता है?

सुपर मून ऐसी खगोलीय घटना होती है जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है। इसलिए वो बड़ा नजर आता है और 14 फ़ीसदी अधिक चमकीला भी। इसे पेरिगी मून भी कहते हैं। बता दे कि चंद्रमा या किसी दूसरे उपग्रह की धरती से सबसे नजदीक वाली स्थिति को पेरिगी और सबसे दूर वाली स्थिति को अपोगी कहते हैं। पेरगी के करीब घटने वाली फुल मून यानी पूर्णिमा को सुपर मून कहा जाता है। गौरतलब है कि साल में 12 पूर्णिमा होती है। कभी-कभी इनकी संख्या 13 भी हो जाती है। पेरगी के समय पूर्णिमा भी पड़े यह एक खास घटना होती है।

ब्लड मून क्या होता है?

चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया में चला जाता है। इसी दौरान कभी-कभी यह चंद्रमा पूरी तरह लाल भी दिखाई देता है। इसे ही ब्लड मून कहा जाता है। इसकी व्याख्या आपको समझाएं तो सूरज की किरणें धरती के वातावरण में घुसने के बाद मुड़ती हैं और फैलती हैं। नीला या वायलेट रंग, लाल या नारंगी रंग के मुकाबले अधिक फैलता है। इसलिए आकाश का रंग नीला दिखता है। लाल रंग सीधी दिशा में आगे बढ़ता है, इसलिए वो हमें सूर्योदय और सूर्यास्त के वक्त ही दिखाई देता है। उस वक्त सूर्य की किरणें धरती के वातावरण की एक मोटी परत को पार कर हमारी आंखों तक पहुंच रही होतीं हैं। चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्योदय या सूर्यास्त के समय की बची हुई लाल किरणें पृथ्वी के वातावरण से होते हुए चांद की सतह तक पहुंच जाती हैं। इसलिए ग्रहण के दौरान चंद्रमा हमें लाल नजर आने लगता है। पृथ्वी के वातावरण में ग्रहण के दौरान जितने ज़्यादा बादल या धूल होगी, चंद्रमा उतना ही ज़्यादा लाल दिखेगा।

ब्लू मून क्या होता है?

यह महीने के दूसरे फुल मून यानी पूर्णिमा का मौक़ा होता है। जब फुल मून महीने में दो बार होता है तो दूसरे वाले फुल मून को ब्लू मून कहते हैं।

गौरतलब है कि सुपरमून और चंद्र ग्रहण दोनों अगल-अलग खगोलीय घटनाएं हैं, जो कभी-कभी एक साथ घटित होती हैं। आज वाली घटना यह एक सुपरलूनर (superlunar) घटना है क्योंकि यह सुपर मून, चंद्र ग्रहण और रेड ब्लड मून होगा।