(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) सामाजिक बदलाव सूचकांक (Social Change Index)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) सामाजिक बदलाव सूचकांक (Social Change Index)


भारत में आजादी से लेकर अब तक लोगों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए कई सारी योजनाएं और नीतियां बनाई गई। लोगों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान को लेकर काफी सारे दावे किए गए। लेकिन हाल में ही विश्व आर्थिक मंच द्वारा प्रस्तुत सामाजिक गतिशीलता सूचकांक भारतीय नीतियों पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। विश्व आर्थिक मंच के द्वारा इस सूचकांक में भारत को 82 देशों की सूची में 76 वां स्थान प्राप्त हुआ है।

आज के DNS कार्यक्रम में जानते हैं कि विश्व आर्थिक मंच द्वारा प्रस्तुत सामाजिक गतिशीलता सूचकांक आखिर है क्या?

सामाजिक गतिशीलता से तात्पर्य किसी व्यक्ति विशेष का अपने माता-पिता के संदर्भ में ऊपर या नीचे की ओर सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता से है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो सामाजिक गतिशीलता से तात्पर्य एक बच्चे को अपने माता पिता से बेहतर जीवन का अवसर प्राप्त करने की क्षमता से है। इसी संदर्भ में सापेक्षिक सामाजिक गतिशीलता से तात्पर्य किसी व्यक्ति के सामाजिक- आर्थिक उपलब्धियों पर सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि के प्रभाव का आकलन को कहा जाता है। सामाजिक गतिशीलता को स्वास्थ्य, शैक्षिक उपलब्धि से लेकर आय तक के विस्तृत आयामों के द्वारा मापन किया जा सकता है।

क्यों इस नए सूचकांक की जरूरत पड़ी?

आधुनिक जीवन के संदर्भ में सामाजिक गतिशीलता एक ज्वलंत मुद्दा है।सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के संदर्भ में हालांकि अत्यधिक गरीबी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तो सुधार हुए हैं लेकिन अन्य मानकों के संदर्भ में देशों की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। इस बिगड़ती स्थिति के लिए अक्सर भूमंडलीकरण और प्रौद्योगिकी को दोषी ठहराया जाता है लेकिन रिपोर्ट में इसके साथ कई अन्य कारणों पर भी प्रकाश डाला गया है।उदाहरण के लिए अकुशल नीति एवं इनका अकुशल कार्यान्वयन। अतः सामाजिक गतिशीलता को रोकने वाले समस्त कारकों की पहचान हेतु इस नए सूचकांक को तैयार किया गया है।

जहां अन्य सूचकांक के द्वारा पीढ़ियों के दरमियान होने वाली सामाजिक गतिशीलता के परिणामों पर फोकस किया गया वहीं इस सूचकांक में सामाजिक गतिशीलता को प्रभावित करने वाले कारकों पर फोकस किया गया है। सूचकांक में नीतियों, प्रक्रियाओं और संस्थानों को पर्याप्त जगह दी गई है जिसके कारण यह संपूर्ण क्षेत्र के साथ पीढ़ियों के तुलनात्मक अध्ययन करने में हमें सक्षम बनाता है।

सूचकांक के प्रमुख मानक क्या क्या है?

सामाजिक बदला सूचकांक की रैंकिंग को के संदर्भ में देशों को पांच कसौटियां पर परखा गया है, जिसके 10 आधार स्तंभ शामिल हैं। ये कसौटियां

  1. स्वास्थ्य,
  2. शिक्षा (जिसमें शिक्षा तक पहुंच शिक्षा की गुणवत्ता एवं शिक्षा में समानता शामिल है),
  3. प्रौद्योगिकी,
  4. कामकाज ( जिसमें कामकाज के अवसर, वेतन, काम करने की स्थिति शामिल है ) और
  5. संरक्षण एवं संस्थान (जिसमे सामाजिक संरक्षण तथा समावेशी संस्थान शामिल हैं)

इस सूचकांक में पहले पायदान पर डेनमार्क (85 अंक) है। इसके बाद नॉर्वे, फिनलैंड, स्वीडन और आइसलैंड है।शीर्ष दस देशों की सूची में नीदरलैंड (6वें), स्विट्जरलैंड (7वें), ऑस्ट्रिया (8वें), बेल्जियम (9वें) और लक्जमबर्ग (10वें) पायदान स्थान पर रहे। कुल 82 देशों के इस सूची में भारत 76वें स्थान पर रहा। जीवन शिक्षा के संदर्भ में भारत जहां 41वें स्थान पर रहा वहीं कामकाज की परिस्थितियों के आधार पर भारत 53वें पायदान पर है। भारत को जिन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सुधार करने की जरूरत है वह सामाजिक सुरक्षा और उचित वेतन का वितरण क्योंकि इन में क्रमशः भारत को 76 वें और 79वें स्थान पर रखा गया है।
विश्व आर्थिक मंच के इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सामाजिक बदलाव में 10 फीसद वृद्धि से ना केवल सामाजिक एकता को लाभ होगा बल्कि वैश्विकअर्थव्यवस्था 2030 तक करीब पांच फीसद बढ़ सकती है।इस रिपोर्ट में यह भी दर्शाया गया है कि द कि उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और आजीवन शिक्षा का सामाजिक बदलाव में सबसे बड़ा योगदान है।

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्वीकरण और चौथी औद्योगिक क्रांति जहां एक और लाभ मिला है तो वहीं दूसरी ओर इसने असमानता को भी बढ़ा दिया है। चौथी औद्योगिक क्रांति ने श्रम बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी खासकर उन देशों में जो इन नए अवसरों का लाभ उठाने हेतु तैयार नहीं थे। इससे आर्थिक असमानता में वृद्धि हुई। जहां एक और उच्च आय वाले देशों से कम आय वाले देशों की ओर कम-कुशल श्रम की मांग का हस्तांतरण होने से असमानता बढ़ी। वही तकनीकी के आगमन से कम कुशल श्रमिकों की मांग में लगातार कमी आई है।

इस रिपोर्ट में भावी चुनौतियों से निपटने के लिए एक रोल मॉडल भी प्रस्तुत किया गया है जिस को दो भागों में बांटा गया है पहला सरकार के लिए दूसरा व्यवसाय के लिए।

सरकार को दिए गए सुझावों में सामाजिक गतिशीलता के लिए नए वित्तीय मॉडल को अपनाए जाने पर बल दिया गया है जिसमें व्यक्तिगत आयकर में सुधार करना, धन के संकेंद्रण को रोकने वाली कराधान नीतियों को अपनाना इसके साथ ही सार्वजनिक खर्च और नीतिगत प्रोत्साहन पर बल देना शामिल है इसके साथ ही सरकार को शिक्षा की उपलब्धता गुणवत्ता और व्यक्ति के कौशल को विकास में वृद्धि हेतु नीति बनाने पर बल दिया जाना चाहिए। शिक्षा के वित्त पोषण के संदर्भ में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के समन्वय पर बल दिया गया है। सरकार को दिए गए सुझाव में सामाजिक सुरक्षा अनुबंध भी शामिल है जिसके तहत श्रमिकों को समग्र सुरक्षा प्रदान करना शामिल है जिसके तहत तकनीकी परिवर्तन और औद्योगिक संक्रमण के संदर्भ में श्रमिकों को सुरक्षा उपलब्ध हो सके।

वहीं इस रिपोर्ट में व्यवसाय को लेकर जो सुझाव दिए गए हैं उसमें चयन प्रक्रिया में योग्यता की संस्कृति को बढ़ावा देते हुए व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करना, रीस्किलिंग और अपस्किलिंग के साथ-साथ उचित वेतन देना शामिल है। इसके साथ ही प्रत्येक उद्योग के लिए विशिष्ट कार्य योजना भी बनाना शामिल है जो उद्योगों की परिस्थितियों में ध्यान रखते हुए हो।

विश्व आर्थिक मंच के द्वारा सामाजिक गतिशीलता को बढ़ाने हेतु सरकार एवं व्यवसाय के द्वारा समन्वित प्रयासों पर बल दिया गया है। क्योंकि बढ़ती हुई असमानता सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी के साथ-साथ अनिश्चितता भी लाती है। लोगों का सार्वजनिक संस्थाओं, सार्वजनिक जीवन एवं राजनीतिक प्रक्रियाओं से मोहभंग होता है जिससे समाज में अवस्था जन्म लेती है। इसके समाधान हेतु सरकार एवं व्यवसाय के द्वारा सामाजिक गतिशीलता के संदर्भ में ठोस कदम उठाने की जरूरत है जिसमें सब को आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध हो।