(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) भारतीय रेलवे की रो-रो सेवा (RO-RO Service of Indian Railway)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) भारतीय रेलवे की रो-रो सेवा (RO-RO Service of Indian Railway)



हाल ही में, दक्षिण पश्चिम रेलवे के नेलमंगला जो बेंगलुरु के पास है यहाँ से बेल जो सोलापुर के पास है..यहाँ तक पहली बार रोल ऑन रोल ऑफ़ (Roll on Roll off- RORO) सेवा शुरू की गयी है....बतातें चलें बेंगलुरू – सोलापुर खंड पर रो-रो रेल सेवाएं भारतीय रेलवे में केवल निजी तौर पर संचालित RORO ट्रेन सेवाएं होंगी।

क्या है RORO और यह कब अस्तित्व में आई?

Roll on Roll off- RORO विभिन्न वस्तुओं से भरे सड़क वाहनों को खुले समतल रेलवे वैगनों पर ले जाने की एक अवधारणा है....रो-रो सेवाएं इस अर्थ में सड़क और रेल परिवहन की सर्वोत्तम विशेषताओं का संयोजन हैं कि वे बड़े और प्रत्यक्ष रेल लिंक द्वारा न्यूनतम हैंडलिंग के साथ घर-घर सेवाएं प्रदान करती हैं...

RO-RO के लाभ:

रो-रो सेवा एक मल्टीमॉडल डिलीवरी मॉडल है, तथा इसके मुख्य लाभ माल और आवश्यक वस्तुएं लाने – ले जाने की तेज़ गतिविधि, शहरों के बीच सड़कों पर जाम की वजह से ट्रकों का गंतव्य तक पहुंचने में लगने वाले समय को कम करता है...सड़कों पर भीड़ को कम करता है..कीमती ईंधन बचाता है...कार्बन उत्सर्जन को कम करता है...

ट्रक के चालक दल के लिए राहत क्योंकि यह लंबी दूरी की ड्राइविंग से बचाता है....चेक पोस्ट / टोल गेट आदि का कोई झंझट नहीं...मौजूदा ट्रैक पर रोडवेज और रेलवे-इंटर-मोडल परिवहन के बीच निर्बाध अंतर-संचालन...आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना....

किसानों को उनकी उपज के लिए सही बाजार और सही मूल्य को सुनिश्चित करता है...

वस्तुओं की कमी वाले और अधिकता वाले बाज़ारों को आपस में जोड़ता है और दोनों में संतुलन बनाए रखता है...बतातें चलें भारतीय रेल में रो-रो ट्रेन सेवाओं को पहली बार 1999 निन्यानवे में कोंकण रेलवे में शुरू किया गया था और तब से यह सफलतापूर्वक चल रहा है...