(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन (President's Rule in Maharashtra)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन (President's Rule in Maharashtra)


बीते दिनों महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री बी एस- कोस्यारी ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रस्ताव राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुुत किया जिसके बाद से यह विषय चर्चा में है

हमारे आज के DNS मे हम राष्ट्रपति शासन व इससे जुडे़ कुछ खास तथ्यों को जानेंगे साथ ही महाराष्ट्र में लगे राष्ट्रपति शासन की भी समीक्षा करेंगे

  • दरअसल महाराष्ट्र में हाल ही में सामप्त हुए चुनावों के नतीजो मे किसी भी दल को बहुमत नही मिला। जिसके बाद से वहाँ चार सबसे बड़ी पार्टियों भारतीय जनता पार्टी ,शिवसेना NCP व कांग्रेस के बीच सरकार बनाने को लेकर जोडतोड चल रहा था।
  • किसी भी दल द्वारा बहुमत पेश न किये जाने पर राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी गौरतलब है कि महाराष्ट्र की विधानसभा में 288 सीटे है जिनमें BJP को 105 ,शिवसेना को 56 NCP को 54 व कांग्रेस को 44 सीटों पर जीत मिली है

क्या होता है राष्ट्रपति शासन या (President's Rule)

  • राष्ट्रपति शासन से सम्बन्धित अनुच्छेद अब तक के सबसे विवादित अनुच्छेद में से एक रहे है
  • डा. भीम राव अम्बेडकर ने राष्ट्रपति शासन को संविधान के लिये एक Dead Letter बताया था
  • संविधान के अनुच्छेद 356 में राष्ट्रपति शासन को लाने का प्रावधान दिये गये है
  • Article 356 Government of India act 1935 के section 93 पर आधारित है
  • अनुच्छेद 355 यह कहता है कि यह संघ या केन्द्र की जिम्मेदारी होगी कि वह यह सुनिश्चित करे कि हर राज्य को बाहरी व आन्तरिक खतरों से बचाया जाए एंव हर राज्य संविधान के अनुरूप के ही कार्य करें
  • अनुच्छेद 356 यह कहता है कि किसी राज्य में संवैधानिक ढ़ांचे के असफल होने के कारण वहाँ पर राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है । लेकिन इसके भी दो मुख्य प्रावधान है-
  • पहला यह कि ऐसा केवल राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को भेजी गई रिपोर्ट के द्वारा ही किया जा सकता है उस रिपोर्ट से यदि राष्ट्रपति संतुष्ट होता है केवल तब ही राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। और इस प्रतिवेदन मे राज्यपाल ,राज्य में संवैधानिक ढ़ांचे के असफल होने का जिक्र करता हैं
  • दूसरा यह कि अनुच्छेद 365 के मुताबिक,अगर कोई राज्य,केन्द्र सरकार द्वारा दिये गये निदेशों का पालन करने मे असफल रहता है यह पालन नहीं करता है तो राष्ट्रपति ऐसी स्थिति में वहाँ राष्ट्रपति शासन इस आधार पर लगा सकता है कि वहाँ संवैधानिक तंत्र असफल हो गया है
  • राष्ट्रपति द्वारा लगाये गये राष्ट्रपति शासन को दो महीनो के भीतर संसद के दोनो सदनों द्वारा पारित करना जरूरी होता है
  • और अगर यह पारित हो गया तो 6 महीनों तक के लिये उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा रह सकता है। गौरतलब है कि इस अवधि को हर 6 महीनों मे संसद द्वारा पारित कराकर 3 साल तक बढ़ाया जा सकता है
  • यहाँ जानने योग्य बात यह है कि अगर लोकसभा इन 6 महीनो के भीतर भंग हो गई तो सिर्फ राज्य सभा द्वारा पारित कराकर इसे 30 दिनों के लिये और बढ़ाया जा सकता है लेकिन 30 दिनों के बाद इसे नवनिर्वाचित लोकसभा द्वारा पारित करना जरूरी होता है।
  • 44वे संविधान संशोधन 1978 द्वारा इसमें कुछ बदलाव किये गये और वे कुछ इस प्रकार है
  • राष्ट्रपति शासन के 1 साल से ज्यादा बढ़ाने के लिये दो शर्तें अनिवार्य है
  • पहली यह किया देश मे देश के किसी भाग में आपातकाल लगा हुआ हो
  • दूसरी यह कि- या फिर चुनाव आयोग ने कहा हो कि उस राज्य मे राष्ट्रपति शासन जरूरी हो क्योंकि विधानसभा के चुनाव कराने मे उसे दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
  • राष्ट्रपतिशासन लगने के बाद उस राज्य की सारी गातिविधियाँ व शक्ति राष्ट्रपति के हाथो मे आ जाती है। सिवाय उर राज्य के उच्च न्यायालय को छोड़कर ।
  • राज्य की विधायिका की सारी शक्तियां राष्ट्रपतिशासन के दौरान संसद के हाथो में होती है
  • इस दौरान राज्य में बनाया गया कोई भी कानून तब तक लागू रहता है जब तक कि उस राज्य की विधायिका द्वारा उसे खारिज या संशोधित न किया जाए।



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