(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) प्रधानमंत्री कुसुम योजना (Pradhan Mantri Kisan Urja Suraksha evam Utthaan Mahabhiyan (PM-KUSUM) Scheme)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) प्रधानमंत्री कुसुम योजना (Pradhan Mantri Kisan Urja Suraksha evam Utthaan Mahabhiyan (PM-KUSUM) Scheme)


साल 2020 -21 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री कृषि ऊर्जा सुरक्षा उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम) के विस्तार का एलान किया । प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 20 लाख किसानों को सोलर पंप लगाने में सरकार मदद करेगी । वित्त मंत्री ने कहा की 15 लाख किसानों को ग्रिड से जुड़े सोलर पंप लगाने के लिए धन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा किसान इन सोलर पंपों के ज़रिये बनने वाली अतिरिक्त बिजली की आपूर्ति ग्रिड को भी कर सकेंगे।आपको बता दें की फरवरी 2019 के दौरान पेश बजट में पीएम कुसुम योजना की शुरुआत की गयी थी। मोदी सरकार ने इस योजना के लिए 34,422 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की घोषणा की थी।

लोकसभा में अपने बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने बताया कि इस योजना से किसानों की डीजल और केरोसिन तेल पर निर्भरता कम हुई है और वे सौर ऊर्जा के माध्यम से जुड़े हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि कुसुम योजना के ज़रिये किसान सौर ऊर्जा का उत्पादन करने और उसे ग्रिड को बेचने के काबिल बने हैं। बंजर जमीन पर सौर ऊर्जा पैदा करके किसान अपनी आमदनी में भी बढ़ोत्तरी कर सकेंगे। आपको बता दें की पीएम कुसुम योजना के तीन अहम् घटक हैं- 10,000 मेगावाट क्षमता के ग्रिड से जुड़े विकेंद्रीकृत नवीकरणीय बिजली संयंत्र, 17 ।50 लाख ग्रिड से पृथक सौर बिजली कृषि पंप और ग्रिड से जुड़े हुए 10 लाख सौर बिजली कृषि पंपों का सोलराइजेशन। कुसुम योजना के ज़रिये इन तीनों घटकों को मिलाकर 2022 तक कुल 25,750 मेगावाट सौर ऊर्जा तैयार करने की योजना है।

कुसुम योजना का अहम् मकसद किसानों द्वारा अपनी ज़मीन पर सोलर पैनल लगाकर इससे पैदा बिजली का इस्तेमाल खेती के लिए करना है। किसान की जमीन पर बनने वाली बिजली से देश के गावों में बिजली कि समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।

केंद्र सरकार की कुसुम योजना किसानों को दो तरह से फायदा पहुंचा रही है । एक तो उन्हें सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली मिल रही है और दूसरा वह अतिरिक्त बिजली बना कर ग्रिड को भेजकर कमाई भी कर रहे हैं । अगर किसी किसान के पास बंजर ज़मीन है तो वह उसका इस्तेमाल सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए कर सकता है। इससे उन्हें बंजर जमीन से भी आमदनी होने लगेगी।

कुसुम योजना की कुछ ख़ास बातें

सौर ऊर्जा उपकरण लगाने के लिए किसानों को महज़ 10 फीसदी रकम का भुगतान करना पड़ता है । केंद्र सरकार किसानों को बैंक खाते के ज़रिये सब्सिडी की रकम देती है । इसके अलावा सौर ऊर्जा के लिए प्लांट बंजर भूमि पर लगाये जाते हैं।

कुसुम योजना में बैंक किसानों को क़र्ज़ के रूप में 30% रकम देते हैं । सरकार किसानों को सब्सिडी के रूप में सोलर पंप की कुल लागत कि 60 फीसदी रकम देती है।

कुसुम योजना शुरू करने का मकसद

भारत जैसे देश में जहां खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर है ज़्यादातर किसान खेती के लिए सिंचाई पर निर्भर रहते हैं । मगर किसानों को सिंचाई में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है और अधिक या कम बारिश की वजह से किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं। ऐसे में कुसुम योजना किसानों के लिए एक वरदान के रूप में साबित हुई है जिससे किसान न सिर्फ फसलों कि सिंचाई बल्कि अपनी आमदनी को भी बढ़ा सकते हैं।

कुसुम योजना से सिंचाई में लगने वाली डीजल की खपत कम होगी और इस तरह भारत द्वारा कच्चे तेल के आयात पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।कच्चे तेल का आयात कम होने से भारत सरकार के राजस्व घाटे में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा कोष में भी बढ़ोत्तरी भी होगी।