(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) पेगासस स्पाइवेयर (Pegasus Spyware)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) पेगासस स्पाइवेयर (Pegasus Spyware)


  • चर्चा में क्यों है?
  • परिचय
  • पेगासस स्पाइवेयर क्या है?
  • इसके द्वारा भारत में प्रस्तुत की गई चुनौतियां
  • भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा व निजता के अधिकार के मध्य संतुलन
  • निष्कर्ष

चर्चा में क्यों है?

व्हाट्सअप द्वारा हाल ही में पुष्टि की गई है कि एक स्पाइवेयर का प्रयोग भारत सहित विश्व के अनेक देशों में अधिकारियों, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, वकीलों आदि की जासूसी करने में किया जा रहा था।

परिचय

ऐसा दावा किया जा रहा है कि पेगासस नामक एक जासूसी उपकरण के माध्यम से भारत में पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर निगरानी रखी गई थी। लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफार्म का प्रयोग दुनिया भर के और मानवाधिकार कार्यकर्त्ताओं के साथ-साथ भारत में भी किया जाता था। पेगासस स्पाइवेयर को इजरायली फर्म द्वारा विकसित माना जा रहा है।

पेगासस स्पाइवेयर क्या है?

  • पेगासस एक विद्धेषपूर्ण सॉफ्टवेयर है जिसे एक इजरायली निगरानी फर्म द्वारा विकसित किया गया है, जिसे एन एस ओ समूह कहा जाता है।
  • यह केवल एक अनुचित लिंक भेजकर काम करता है। और यदि लक्षित उपयोगकर्त्ता लिंक पर क्लिक करता है तो मैलवेयर या कोड उपयोगकर्त्ता के फोन पर निगरानी रखने की अनुमति ले लेता है।
  • एक बार पेगासस स्पाइवेयर की मोबाइल तक पहुँच होने के पश्चात् हैकर के पास लक्षित उपयोगकर्त्ता के फोन तक पहुँच सुनिश्चित हो जाती है।
  • इसमें पासवर्ड, कॉन्टैक्ट्स, टेक्टस् मैसेज कैलेंडर तक जानकारी चुराने और लाइव मैसेजेस ट्रैक करने के लिए फोन के कैमरा, माइक्रोफोन और जीपीएस तक पहुँच सुनिश्चित हो जाती है। साथ ही मैसेजिंग एप व्हाट्सअप के द्वारा वाइस कॉल भी की जा सकती है।
  • स्पॉयवेयर ने व्हाट्सअप वी ओ आई पी (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) में भेद्यता को लक्षित किया है जिसका उपयोग वीडियो और ऑडियो कॉल करने के लिए किया जाता है।
  • किसी के व्हाट्सअप नंबर पर मिस्ड कॉल देने के बाद पेगासस की डिवाइस तक पहुँच सुनिश्चित हो जाती है। यह व्हाट्सअप की डेटा टू डेटा सुरक्षा को भेदता है अतः यह व्हाट्सअप के डेटा टू डेटा सुरक्षा के वक्त्वय पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

इसके द्वारा भारत में प्रस्तुत की गई चुनौतियां

  • दुनियाभर में आतंकी गतिविधियों में बढ़ोत्तरी हुई है इन आतंकी समूहों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए राज्यों ने मोबाइल मैलवेयर का उपयोग प्रारंभ किया है। जासूसी के ये उपकरण वर्तमान में एक समस्या बन गये हैं।
  • भारत में ये समस्या अत्याधिक विकराल है क्योंकि इस समस्या के समाधान के लिए भारत में स्पष्ट कानूनों का अभाव है। अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाने के लिए हम ऐसी महत्वपूर्ण गतिविधियों तक विदेशी कंपनियों की पहुँच सुनिश्चित कर देते हैं। जो हमारी स्वंय की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाती है।
  • स्पाइवेयर द्वारा इस प्रकार की घुसपैठ न केवल देश के नागरिकों के अधिकारों के लिए बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक चुनौती है।
  • इस प्रकार के स्पाइवेयर हमलों से डिजिटल प्लेटफार्मों पर हमारी अक्षमता पता चलती है। नागरिकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले व्हाट्सअप या किसी भी अन्य मैसेजिंग ऐप पर एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड संदेशों की ‘‘ट्रैसबिलिटी’’ को लागू करने के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए।

भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा और निजता के अधिकार के बीच संतुलन:

  • यह निजता के हमारे मौलिक अधिकार का एक मुख्य हिस्सा है।
  • सरकार ने कहा है कि वह भारत के नागरिकों की गोपनीयता भंग होने से चिंतित है।
  • यह समझने की आवश्यकता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा की शुरूआत हर एक भारतीय के स्मार्टफोन में स्पायवेयर तैनात करने के बजाय एन्क्रिप्शन जैसी तकनीकों को अपनाने से होती है।
  • व्हाट्सअप से इस विषय पर स्पष्टीकरण मांगा गया है कि वह लाखों भारतीयों की निजता की रक्षा के लिए क्या कर रहा है।
  • भारत में डेटा सुरक्षा और गोपनीयता कानून अभी भी प्रारम्भिक अवस्था में बना हुआ तथा इस तरह की घटनाएं डिजिटल समाज में गोपनीयता और स्वतंत्रता के बड़े खतरों को उजागर करती हैं।
  • गोपनीयता पर एक ठोस संदेश देने की आवश्यकता है। जिस प्रकार से वर्ष 2017 में, सर्वोच्च न्यायालय ने जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार को मौलिक अधिकारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा घोषित किया था।

निष्कर्ष

निजता का अधिकार संविधान द्वारा भारत के लोगों को दिया गया एक मौलिक अधिकार है। निगरानी के उद्देश्य से, फोन की हैंकिंग निजता के अधिकार के साथ-साथ बड़े पैमाने पर लोकतंत्र के लिए भी खतरा है। सरकार को राष्ट्रीय हितों और नागरिकों की गोपनीयता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।