(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) ऑपरेशन हॉट परश्यूट (Operation Hot Pursuit)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) ऑपरेशन हॉट परश्यूट (Operation Hot Pursuit)



ऐसे बहुत से मौके आये जब हमारे देश के जांबाज सनिकों ने दुश्मनों को दांतों तले ऊँगली दबाने पर मजबूर कर दिया......पाकिस्‍तान में हुई सर्जिकल स्‍ट्राइक तो आपको याद ही होगी....लेकिन क्‍या आपको इससे पहले हुई ऐसी ही सर्जिकल स्‍ट्राइक के बारे में पता है..?

इस सर्जिकल स्‍ट्राइक में भारतीय स्‍पेशल फोर्स के 20 जांबाजों ने भारत की म्‍यांमार से लगती पूर्वी सीमा पर एनएससीएन-के (खापलांग) ग्रुप के उग्रवादियों को उनकी उस काली करतूत की सजा दी थी जिसे

जिसे उन्होंने 4 जून 2015 को अंजाम दिया गया था….

आज के DNS कार्यक्रम में हम बात करेंगे, उग्रवादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड- खापलांग पर भारतीय सनिकों की सर्जिकल स्ट्राइक की..... ऑपरेशन हॉट परस्‍यूट की....जानेगे एनएससीएन से जुड़ीं बातों को ...

4 जून 2015 को दिन के उजाले में एनएससीएन-के (नेशनल सोशलिस्‍ट काउंसिल ऑफ नगालैंड-खापलांग) के उग्रवादियों ने मणिपुर के चंदेल जिले में 6 डोगरा रेजिमेंट के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में भारतीय सेना के 18 जवान शहीद हो गए थे..... ये काफिला नगालैंड के डीमापुर की तरफ जा रहा था

नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (NSCN) नॉर्थ-ईस्ट में एक्टिव एक विद्रोही गुट है। 1980 में इसकी स्थापना थुइंगलेंग मुइवा और इसाक चिशी स्वू ने की थी। 2012 से ये गुट नॉर्थ-वेस्ट म्यांमार में अपनी एक्टिविटीज चला रहा है। गुट का मकसद आजाद नगा राज्य (नगालिम) बनाना है। इसमें नॉर्थ-ईस्ट इंडिया और नॉर्थ-वेस्ट म्यांमार में रहने वाले नगा लोग शामिल होंगे।

1988 अट्ठासी में एसएस खापलांग ने एनएससीएन से अलग होकर NSCN (K) गुट बना लिया। भारत सरकार की तरफ से इसे आतंकी गुट करार दिया गया है। सरकार के मुताबिक, NSCN (K) नगालैंड के बड़े विद्रोही गुटों में से एक है

एनएससीएन-के तहत कई उग्रवादी संगठन काम करते हैं। एनएससीएन-के पैसे लेकर उग्रवादियों की हर तरह की मदद करता है। धन उगाही के लिए ये नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्‍करी करते थे। डरा धमकाकर, अपहरण कर पैसा वसूलते हैं। जवानों पर हमले की कार्रवाई की रणनीति इन्‍होंने ही बनाई थी और बाद में इसकी जिम्‍मेदारी भी ली थी।

इस हमले ने सेना के अंदर अपने जवानों को खोने का दुख और दर्द भर दिया था....हमले के तुरंत बाद पूरे इलाके में नाकेबंदी कर दी गई। खुफिया विभाग हाई-अलर्ट पर था..

जवानों पर हमले के बाद एनएससीएन-के इस कदर उत्‍साहित था कि एक और हमले को अंजाम देने के लिए वह उग्रवादियों को एकत्रित कर रहा था। इस जानकारी में ये साफ हो गया था कि यदि इन्‍हें जल्‍द ही न रोका गया तो ये हमें नुकसान पहुंचा सकते हैं। केंद्र में लगातार हर चीज पर बैठकें चल रही थीं। इन बैठकों के दौर से जो निकला उसका नाम था ऑपरेशन हॉट परस्‍यूट (Operation Hot Pursuit)...कह सकते है ये ऑपरेशन उग्रवादियों की कब्र खोदने के लिए तैयार किया गया था...

इन बैठकों में पीएम नरेंद्र मोदी, तत्‍कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल, सेना प्रमुख जनरल दलबीर सुहाग मौजूद रहे थे.... बैठक में बनी योजना के हिसाब से ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए भारतीय सेना की स्‍पेशल फोर्स को चुना गया....

इस फोर्स के 21 जांबाजों को अगले कुछ ही दिनों में अपने ऑपरेशन को अंजाम भी देना था और सकुशल वापस भी आना था। इस काम को अंजाम देने के लिए भारतीय सेना पैरा कमांडोज जिन्‍हें पैरा एसएफ भी कहा जाता है, भारतीय सेना के 21 पैरा कमांडोज ने इस ऑपरेशन का मॉक ड्रिल किया था...5 दिनों तक ऑपरेशन की तैयारी चली....8 और 9 जून की रात को भारतीय सेना के जवान तीन टीमों में ध्रुव हेलीकॉप्टर से म्यांमार सीमा में दाखिल हुए। इसके बाद तड़के 3 बजे ऑपरेशन शुरू हुआ... भारतीय सेना के जांबाज जवानों ने महज 8 घंटो मे इस ऑपरेशन को खत्म कर दिया था...भारतीय सेना के पास जानकारी थी कि म्यांमार के पोन्यु इलाके के पास उंजिया में उग्रवादी गुट 'द नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड- खापलांग' (NSCN-K) के कैंप सक्रिय हैं. .... भारतीय सेना के जवानों के पास एक-दूसरे के बात करने के लिए रेडियो सेट थे. इसके अलावा उनके पास ग्रेनेड, नाइट विजन डिवाइस, ट्रेवोर राइफल, माउंटेड डिवाइस से लेकर रॉकेट लॉन्चर तक थे...

लेकिन म्‍यांमार सीमा में ऑपरेशन को अंजाम देने के दौरान तकनीक का इस्‍तेमाल नुकसानदेह हो सकता था। वायरलैस से मिलने वाले संकेतों को को उग्रवादी संगठन पकड़ सकते थे। इसलिए ये ऑपरेशन एक सीमा के बाद इसकी भी इजाजत नहीं देता था। आपको बता दें कि भारत और म्‍यांमार के बीच 1600 किमी लंबी सीमा रेखा है। लेकिन कई जगहों पर फैंसिंग नहीं है। कुछ जगहों पर केवल जानकार ही सीमा का पता लगा पाते हैं या फिर वो लोग जो यहां पर रहते हैं। सीमा से सटे इलाकों में कुछ समय के लिए दोनों देशों के लोग खेती करने के लिए तय समय के दौरान आते और जाते भी हैं। इनमें से कुछ उग्रवादियों के मुखबिर भी होते हैं। यही वजह थी कि इन जवानों के लिए ये ऑपरेशन कई तरह की चुनौतियों से भरा था..

इससे पहले भी कई बार ऐसा हुआ जब भारत ने दुश्मनों के घर में घुसकर मारा हो....

सन 1995 में भारत ने मयंमार मे बने उग्रवादी संगठनों को खत्म करने के लिए...ऑपरेशन गोल्डन बर्ड चलाया था...

साल 1988 में मालद्वीप में तख्तापलट की कोशिशें की जा रही थी...ऐसे में मालद्वीप ने भारत की मदद मांगीं...भारत ने ऑपरेशन कैकटस के तहत मालद्वीप में 1400 कमांडों को उतारा...

1987 में भारत ने श्रीलंका में जा कर उग्रवादियों को मार गिराया था....जहाँ भारत ने अपने शांति रक्षा बालों के 50 हजार जवान श्रीलंका के जाफना में तैनात किय था...सूत्रों के अनुसार इस ऑपरेशन में 1200 जवान शहीद हो गये the...ये ऑपरेशन 1990 तक चला

1971 के युद्ध में बंगलादेश में घुस कर भारतीय सनिकों ने उसे आज़ाद करवाने में सफलता हासिल की. 1995 उग्रवादियों के खिलाफ म्यांमार में ऑपरेशन चलाया. 2015 दोबारा म्यांमार सीमा के अंदर कार्रवाई . 2016: PoK में सर्जिकल स्ट्राइक. साल 2017 में उड़ी आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने 29 सितंबर को नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार जाकर सर्जिकल स्‍ट्राइक को अंजाम दिया. बालाकोट पकिस्तान हवाई हमला 26 फरवरी 2019 को, भारतीय वायु सेना के 12 मिराज 2000 जेट्स ने नियंत्रण रेखा पार की और बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद संचालित आतंकवादी शिविर पर हमला किया। भारतीय मीडिया ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान लगभग 200 - 300 आतंकवादी मारे गए थे...