(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) वन हेल्थ मॉडल (One Health Model)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) वन हेल्थ मॉडल (One Health Model)



COVID- 19 की वजह से पूरी दुनिया सकते में है । कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते पूरी दुनिया में आपातकाल की जैसी स्थिति हो गयी है जहाँ एक और इस वायरस की चपेट में दुनिया के तमाम देश आ चुके हैं वहीं इस लाइलाज बीमारी के चलते दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने इसके इलाज़ पर काम करना शुरू कर दिया है । हालांकि ऐसा माना जा रहा है की इस इलाज़ की खोज में अभी और वक़्त लगेगा । इस कोरोना वायरस की विभीषिका ने इंसानों और जानवरों के सेहत से जुड़े मुद्दों को भी उजागर किया है। ऐसे में भारत जैसे देश में एकीकृत स्वास्थ्य फ्रेमवर्क- जिसे ’वन हेल्थ मॉडल’ (Onehealth Model) के तौर पर भी जाना जाता है, को देश में लागू करने पर आम राय बनने लगी है।

आज के DNS में हम जानेंगे की क्या है ओने हेल्थ मॉडल और किस तरह से कोरोना वायरस से निपटने में ये मददगार साबित हो सकता है

साल 2018 में केरल में ‘निपाह वायरस’ ने दशहत फैला रखी थी । राज्य प्रशासन ने इस वायरस के प्रकोप से निपटने के लिये स्वास्थ्य के मद्देनज़र एक नया प्रयोग किया जिसे ओने हेल्थ मॉडल के नाम से जाना जाता है।

हालांकि ‘वन हेल्थ मॉडल’ की संकल्पना हाल ही में सामने आयी है लेकिन , भारत जैसे देश में कर्नाटक ने ‘क्यासानूर फॉरेस्ट डिज़ीज़’ या मंकी फीवर के चलते इसे इस्तेमाल में लाया जा चूका है।

वन हेल्थ मॉडल क्या है

यह एक ऐसा मॉडल है जिसमें पर्यावरण जानवरों और इंसानी सेहत का सामूहिक रूप से संरक्षण किया जाता है। पूरी दुनिया में इस मॉडल को महामारियों के अनुसंधान, उसके निदान और नियंत्रण के लिये इस्तेमाल किया जाता है।

वन हेल्थ मॉडल के ज़रिये उभरते या मौजूदा पशुओं से फैलने वाले रोगों पर रोकथाम लगाने में मदद मिलती है इस मॉडल में सही और सटीक परिणामों को पाने के लिये स्वास्थ्य विश्लेषण और डेटा प्रबंधन तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

तेज़ी से नष्ट हो रहा प्राकृतिक पर्यावरण , दुनिया में तेज़ी से बढ़ता व्यापार , लोगों द्वारा की जाने वाली अधिक यात्राएँ, और फ़ास्ट फ़ूड कल्चर ने जानवरों से इंसानों में फैलने वाले रोगों में इज़ाफ़ा किया है इसके अलावा वैज्ञानिकों के मुताबिक़ जंगली जानवरों के निवास स्थलों में हास हुआ है जिसकी वजह से ज़्यादा जानवरों के ज़रिये फैलने वाले रोगों में बढ़ोतरी हुई है । जानवरों से इंसानों में फैलने वाले रोगों में इबोला, वेस्ट नाइल वायरस, सार्स , निपह वायरस और मारबर्ग वायरस आदि मुख्य है।

केरल सरकार ने वन-हेल्थ मॉडल आधारित ‘केरल मॉडल’ के ज़रिये ‘निपाह वायरस’ से संक्रमित लोगों की संख्या को 23 पर सीमित कर स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया मकाम हासिल किया । केरल ने अपने मज़बूत सार्वजनिक स्वस्थ्य बुनियादी ढाँचे , राजनीतिक इच्छाशक्ति , अनुभवी विशेषज्ञों की मदद से इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सफलता हासिल की।

भारत में वन हेल्थ मॉडल का सफलतम प्रयोग साल 1950 के दशक में ‘क्यासानूर वन रोग ’ (Kyasanur Forest Disease-KFD) आपदा से निपटने के दौरान देखा गया था । इसे अंजाम देने के लिए तत्कालीन रॉकफेलर फाउंडेशन (Rockefeller Foundation), वायरस रिसर्च सेंटर (बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी) पुणे, विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization- WHO) तथा बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (Bombay Natural History Society) जैसी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने मिलकर काम किया था।

भारत सरकार ने हाल ही में जैव विविधता और मानव कल्याण पर एक राष्ट्रीय मिशन (National Mission on Biodiversity and Human Well-being) की शुरुआत की है ।इस मिशन का मकसद जलवायु परिवर्तन और इससे होने वाली आपदाओं के प्रभावों को कम करने के लिए स्वास्थ्य, आर्थिक विकास, कृषि उत्पादन, आजीविका हेतु उत्पादन जैसे कई क्षेत्रों में जैव विविधता और मानव कल्याण के बीच रिश्तों को फिर से कायम करना है।

वन हेल्थ मॉडल को इस मिशन के एक भाग के रूप में देखा जा रहा है जिसका मकसद एक स्पष्ट ढाँचे को विक्सित कर इन्सानी सेहत और जैव विविधता रिश्तों को फिर से बहाल करना है।