(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 (National Security Act 1980)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 (National Security Act 1980)


दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी कर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA के तहत दिल्ली पुलिस आयुक्त को किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार प्रदान किया है। रिपोर्ट के मुताबिक़ ये नियमित आदेश है जो हर तीन महीने पर जारी किया जाता है। उपराज्यपाल अनिल बैजल की ओर से दिए गए आदेश के मुताबिक दिल्ली पुलिस आयुक्त को 19 जनवरी 2020 से शुरू होकर अगले तीन महीने तक के लिए NSA के तहत हिरासत में रखने की शक्तियां दी गई हैं। दिल्ली पुलिस आयुक्त को 18 अप्रैल तक किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार दिया गया है। ऐसा ही एक आदेश दिल्ली में उपराज्यपाल नजीब जंग ने अपने कार्यकाल के दौरान 16 अक्टूबर 2015 को भी जारी किया था जिसमे पुलिस आयुक्त को 19 अक्टूबर 2015 से 18 जनवरी 2016 तक किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने की शक्तियां दी गयीं थी।

DNS में आज हम जानेंगे कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून क्या है? साथ ही समझेंगे इस क़ानून के दूसरे पहलुओं के बारे में...

इस अधिसूचना के मुताबिक़ उपराज्यपाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 की धारा तीन की उपधारा (3) का इस्तेमाल करते हुए 19 जनवरी से 18 अप्रैल तक दिल्ली पुलिस आयुक्त को किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार दिया है। आपको बता दें कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980, देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से जुड़ा एक कानून है। यह कानून सरकार को किसी संदिग्घ व्यक्ति की गिरफ्तारी की शक्ति देता है। सरकार को यदि लगता है कि कोई शख़्स देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कामों को करने से उसे रोक रहा है तो वो उस शख़्स को गिरफ्तार करवा सकती है। देखा जाए तो इस कानून के अंतर्गत जमाखोरों की भी गिरफ्तारी की जा सकती है। इस कानून का इस्तेमाल जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, राज्य सरकार अपने सीमित दायरे में भी कर सकती है। अगर सरकार को ये लगे तो कोई व्यक्ति बिना किसी मतलब के देश में रह रहा है और उसे गिरफ्तार किए जाने की ज़रूरत तो सरकार उसे भी गिरफ्तार करवा सकती है।

इस क़ानून की पृष्ठिभूमि की बात करें तो 1980 में दोबारा सत्ता में आई इंदिरा गांधी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून को संसद से पास किया गया था । बाद में 27 दिसंबर 1980 को तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी की मंज़ूरी मिलने के इसे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 के रूप में जाना जाने लगा। इस क़ानून के अन्य पहलुओं का ज़िक्र करें तो यह कानून ऐसे व्यक्ति को एहतियातन महीनों तक हिरासत में रखने का अधिकार देता है, जिससे प्रशासन को राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए खतरा महसूस होता है । इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को पहले तीन महीने के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है। उसके बाद ज़रूरत के मुताबिक़ तीन-तीन महीने हेतु गिरफ्तारी की अवधि बढ़ाई जा सकती है। साथ ही यदि किसी अधिकारी ने ये गिरफ्तारी की हो तो उसे राज्य सरकार को बताना होता है कि उसने किस आधार पर ये गिरफ्तारी की है। अगर रिपोर्ट को राज्य सरकार मजूरी दे देती है तो इसे सात दिन के भीतर केंद्र सरकार को भेजना होता है। इस रिपोर्ट में इस बात का जिक्र करना ज़रूरी होता है कि किस आधार पर यह आदेश जारी किया गया है और राज्य सरकार का इसपर क्या विचार है और यह आदेश जरूरी क्यों है।

इस कानून के मक़सद से केंद्र सरकार और राज्य सरकार ज़रूरत के मुताबिक़ एक या एक से ज़्यादा सलाहकार समितियां बना सकती हैं। इस कानून के अंतर्गत गिरफ्तार किसी व्यक्ति को तीन सप्ताह के अंदर सलाहकार समिति के सामने पेश करना होता है। यदि सलाहकार बोर्ड व्यक्ति की गिरफ्तार के कारणों को सही मानता है तो सरकार उसकी गिरफ्तारी को एक उपयुक्त समय तक बढ़ा सकती है। इसके अलावा यदि समिति गिरफ्तारी के कारणों को पर्याप्त नहीं मानती है तो गिरफ्तारी का आदेश रद्द हो जाता है और व्यक्ति को रिहा करना पड़ता है।