(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) नमामि गंगे : उत्तराखंड में 6 नयी परियोजनाएं (Namami Gange : 6 New Projects in Uttarakhand)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) नमामि गंगे : उत्तराखंड में 6 नयी परियोजनाएं (Namami Gange : 6 New Projects in Uttarakhand)



हाल ही में उत्तराखंड में 6 बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया.... ये उद्घाटन प्रधानमन्त्री द्वारा विडियो कांफ्रेसिंग के ज़रिये किया गया....ये 6 मेगा परियोजनाएं उत्तरखंड के हरिद्वार, ऋषिकेश और बद्रीनाथ समेत अलग अलग शहरों में मौजूद हैं....इन परियोजनाओं का लोकार्पण प्रधानमंत्री ने नमामि गंगे मिशन जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत किया है...

गौर तलब है की इस कार्यक्रम के दौरान गंगा को समर्पित एक संग्रहालय गंगा अवलोकन का भी उद्घाटन किया गया…प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और भारतीय वन्यजीव जनसंस्थान की ओर से प्रकाशित पुस्तक रोविंग डाउन द गंगा का विमोचन भी किया….इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल जीवन मिशन के लोगो को भी लांच किया...

नमामि गंगे मिशन के तहत छह मेगा परियोजनाओं के अंतर्गत 68 अडसठ मिलियन लीटर प्रतिदिन की क्षमता वाले एक नए अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (एसटीपी) का निर्माण, हरिद्वार के जगजीतपुर में स्थित 27 एमएलडी क्षमता वाले अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र का अपग्रेडेशन और हरिद्वार के ही सराई में 18 एमएलडी क्षमता वाले अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र का निर्माण शामिल हैं...

जगजीतपुर का 68 अडसठ एमएलडी क्षमता वाला अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र सार्वजनिक निजी भागीदारी या PPP मॉडल पर आधारित है....इसी क्रम में ऋषिकेश के लक्कड़घाट पर 26 मिलियन लीटर पर डे क्षमता वाले एक अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र का भी उद्घाटन किया गया…

उत्तराखंड में गंगा नदी में हरिद्वार-ऋषिकेश इलाके से तकरीबन 80 फीसदी अपशिष्ट जल बहाया जाता है....ऐसे में यहां कई अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र परियोजनाओं के चलते गंगा नदी को साफ़ रखने में काफी मदद मिल सकेगी.....हरिद्वार के चंद्रेश्वर नगर में मुनि की रेती शहर में 7.5 एमएलडी क्षमता वाला अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र देश का पहला ऐसा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र है जो 4 मंजिला है...4 मंजिला शोधन संयंत्र बनाने का मकसद यहाँ भूमि की उपलब्धता का कम होना है .....

अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र को 900 वर्ग मीटर से कम इलाके में बनाया गया है….गंगा नदी के किनारे बसे 17 शहरों से नदी में प्रवाहित होने वाले अपशिष्ट जल के उचित प्रबंधन के लिए उत्तराखंड में शुरू की गई सभी 30 परियोजनाओं का निर्माण कार्य सौ फीसदी पूरा हो चुका है ….

गंगा अवलोकन संग्रहालय

इन परियोजनाओं के साथ साथ प्रधानमंत्री मोदी ने गंगा अवलोकन के नाम से एक संग्रहालय का भी उद्घाटन किया। यह संग्रहालय हरिद्वार के चंडी घाट में स्थित है। यह संग्रहालय गंगा नदी को समर्पित अपनी तरह का पहला संग्रहालय है। इस संग्रहालय के ज़रिये लोगों को गंगा नदी के बारे में जानकारी दी जाएगी। इस संग्रहालय में गंगा नदी की जैव विविधता, इसके पुनर्नवीनीकरण और संस्कृति के बारे में भी लोगों को जानकारी मुहैया कराई जाएगी...

जलजीवन मिशन लोगो :

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने जल जीवन मिशन लोगो का भी उद्घाटन किया। इसके अलावा ग्राम पंचायतों के लिए जलजीवन मिशन की मार्गदर्शिका और पानी समिति का भी उद्घाटन किया गया...

क्या है नमामि गंगे परियोजना :

नमामि गंगे परियोजना को केंद्र सरकार द्वारा साल 2014 में शुरू किया गया था। इस परियोजना का मकसद गंगा नदी के बढ़ते प्रदूषण को कम करना और गंगा नदी को पुनर्जीवित करना था....इस योजना को लागू करने का कार्य केंद्रीय जल संसाधन,नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्रालय का है...जुलाई 2020 में विश्व बैंक ने 300 करोड़ रुपए (400 बिलियम डॉलर) की ‘नमामि गंगे परियोजना’ (Namami Gange Project) को 45 अरब रुपए के अनुदान की मंज़ूरी दी थी। 45 पैंतालिस अरब रुपए की ये रकम क़र्ज़ के तौर पर विश्व बैंक ने पाँच सालों के लिए मुक़र्रर की है। अब तक इस मिशन के तहत विश्व बैंक ने 25,000 करोड़ रुपए की 313 परियोजनाओं को मंज़ूरी दे दी है।

गंगा नदी हिमालय के ग्लेशियर गौमुख से निकलती है। मैदानी भाग में सबसे पहले यह हरिद्वार में प्रवेश करती है। गंगा नदी के किनारे 118 से 120 शहर बसते हैं। इन शहरों से आने वाला गंदा कचरा गंगा में प्रवाहित होता है। गौर तलब है की गंगा नदी में प्रदूषण आज से नहीं हो रहा है। गंगा नदी का दूषित होना आज से 85 साल पहले ही शुरू हो गया था।

साल 1932 में बनारस में एक नाले को गंगा से जोड़ने का आदेश तत्कालीन कमिश्नर हॉकिंस ने दिया था। बाद में कई उद्योगों ने भी अपने गंदे कचरे और खतरनाक रसायनों को गंगा में बहाना शुरू कर दिया…..वर्तमान केंद्र सरकार ने नमामि गंगे योजना के लिए 2018 के बजट में 20,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया था। नमामि गंगे परियोजना को पूरा करने के लिए 5 साल का लक्ष्य तय किया गया था।