(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) मिशन सागर (Mission Sagar)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) मिशन सागर (Mission Sagar)



भारत सरकार के 'मिशन सागर’ के के तहत भारतीय नौसेना का जहाज‘केसरी’ खाद्य वस्तुएं, एचसीक्‍यू गोलियों सहित कोविड सम्‍बन्धित दवाएं और विशेष आयुर्वेदिक दवाओं और चिकित्‍सा सहायता दलों के साथ 10 मई 2020 को मालदीव,मॉरीशस, सेशेल्स, मेडागास्कर और कोमोरोस रवाना हो गया है।

क्या है सागर मिशन?

  • समुद्री कूटनीति को प्राथमिकता देते हुए भारत सरकार के द्वारा कई नीतियां चलाई गई हैं। भारत सरकार के द्वारा 2015 में मिली अर्थव्यवस्था पर ध्यान देते हुए सागर (Security And Growth for All in the Region- SAGAR)कार्यक्रम की शुरुआत की गई। सागर नीति के तहत भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि भी सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है।

क्यों शुरु किया गया?

  • हिंद महासागर चालीस देशों को स्पर्श करता है, और इसके तटों पर विश्व की चालीस प्रतिशत जनसंख्या बसती है। विश्व के समस्त तेल व्यापार का दो तिहाई हिस्सा और सम्पूर्ण माल-वहन का एक तिहाई हिस्सा केवल हिन्द महासागर से गुजरता है। संक्षेप में कहें तो यह क्षेत्र सी लाइन कम्युनिकेशन का हृदय है। इस में स्थित कई सारे देश भविष्य और सुरक्षा के दृष्टिकोण से भारत की ओर देखते हैं। भारत के लिए भी हिंद महासागर का बड़ा ही महत्व है क्योंकि एक तो यहां पर मिलने वाले समुद्री संसाधन और अनन्य आर्थिक से संसाधनों के दोहन की व्यापक संभावना है।
  • हालांकि भारत की दूरगामी समुद्री दृष्टिकोण काफी संकुचित रहा है जिसके कारण भारत इस क्षेत्र में रणनीतिक रूप से काफी पिछड़ गया था। हिन्द महासागर चीन और अमेरिका की प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र बनता गया। चीन नेस्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स नीति के तहत भारत को घेरने की कार्य योजना पर बढ़ते हुएपाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में ग्वादर से लेकर श्रीलंका(हंबनटोटा पोर्ट), मालदीव(मराओ पोर्ट),बांग्लादेश (चटगांव पोर्ट),समेत म्यांमार तक अपने समुद्री प्रभाव का विस्तार किया।इसके साथ ही चीन ने अफ्रीकी देश जिबूती में अपनी पहली सैन्य चौकी बनाई।
  • गर हम चीन की स्ट्रिंग आफ पर्ल्स नीति के साथ चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर( सीपीईसी) और बांग्लादेश, चीन, इंडिया म्यांमार (बीसीआईएम) को आपस में मिलाएं तो जो मानचित्र हमारे सामने आता है उसमें भारत को चारों ओर से घेरने की नीति को पूर्ण होते देखा जा सकता है। चुकि भारत का अधिकतर आयात और निर्यात हिंद महासागर से होता है एवं पेट्रोलियम का तो लगभग पूरा व्यापार हिंद महासागर के जरिए ही होता है।अतः यहां पर चीन की बढ़ती भूमिका भारत को रणनीतिक दृष्टिकोण से काफी पीछे छोड़ देगी।

हिन्‍द महासागर में चीन को प्रतिसंतुलित करने के उठाये गए कदम

  • हालांकि पिछले कुछ वर्षों से समुद्री कूटनीति को प्राथमिकता देते हुए भारत सरकार के द्वारा कई नीतियां चलाई गई हैं। भारत सरकार के द्वारा 2015 में मिली अर्थव्यवस्था पर ध्यान देते हुएसागर (Security And Growth for All in the Region- SAGAR) कार्यक्रम की शुरुआत की गई।सागर नीति के तहत भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि भी सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है। नई दिल्‍ली में आयोजित एक सम्मेलन में एक सहकारी समुद्रीय सुरक्षा पहल के रूप में हिन्‍द महासागर नौसैनिक सिम्‍पोशियम (आईओएनएस) की शुरुआत की गई थी।
  • पूर्वी अफ्रीकाऔर हिंद महासागर में चीन की बढ़ती पकड़ और मौजूदगी को प्रति-संतुलित करने के लिए भारत ने मेडागास्कर में डिफेंस अताशे की तैनाती की है। आपको बता दें दूतावासों में राजदूत अतिरिक्त नियुक्त सैन्य राजनयिक को डिफेंस अताशे कहा जाता है। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय के द्वारा हिंद महासागर के देशों श्रीलंका, मालदीव, मॉरीशस और सेशेल्स के लिए इंडियन ओसियन रीजन डिविजन का गठन भी किया गया। यह डिविजन पश्चिमी हिंद महासागर के देशों मेडागास्कर, कोमोरोस और फ्रेंच रीयूनियन के मामलों को भी डील करेगा। इसके साथ ही भारत द्वारा मेडागास्कर और कोमरोस से रक्षा सहयोग समझौते भी किए गए। इसके साथ साथ भारत में हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए क्वाड (QUAD) मैं भी शामिल हुआ। आपको बता दें की क्वाड संकल्पना के जरिये भारत,अमेरिका,जापान ऑस्ट्रेलिया संयुक्त रूप से चीनी आक्रामक समुद्री नीतियों का प्रतिरोध करेंगे एवं मुक्त समुद्र नीति की व्यवस्था को सुनिश्चित करेंगे।भारत में एक रणनीति कदम उठाते हुए व्लादिवोस्तक चेन्नई मेरीटाइम कॉरिडोर(वीसीएमसी) पर मुहर लगाकरसम्पूर्ण इंडो पैसिफिक क्षेत्र की भू सामरिक महत्व और "सिक्योरिटी आर्किटेक्चर" में आमूल चूल परिवर्तन ला दिया है।