(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) #मी टू आन्दोलन (# Me Too Movement : An Era of Change)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) #मी टू आन्दोलन (# Me Too Movement : An Era of Change)



क्या है मीटू जिसे 21वीं सदी का सबसे बड़ा आंदोलन कहा जा रहा है

हॉलीवुड के जाने माने फिल्मकार हार्वी वीनस्टीन (Harvey Weinstein) को यौन उत्पीड़न और बलात्कार का दोषी पाया गया....हालांकि इस फिल्म निर्माता को हिंसक यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी कर दिया गया है.. सात पुरुषों और चार महिलाओं की जूरी ने वीनस्टीन को फर्स्ट डिग्री के आपराधिक यौन कृत्य और थर्ड डिग्री के रेप का दोषी पाया जिसे ‘मीटू मुहिम’ (#MeToo) की आशिंक जीत के तौर पर देखा जा रहा है....इस मामले में उन्हें 25 साल तक जेल हो सकती है..हालांकि फिल्मकार को फर्स्ट डिग्री रेप और हिंसक यौन उत्पीड़न के मामलों में दोषी नहीं पाया गया..यदि ये आरोप साबित हो जाते तो उन्हें आजीवन कारावास की सजा हो सकती थी.....

कौन हैं हार्वे विंस्टन :

हार्वी हॉलीवुड की बड़ी प्रॉडक्शन कंपनी मीरामैक्स के को-फाउंडर हैं। हार्वी के नाम के साथ GANGS OF NEWYORK, LORD OF THE RINGS, THE AVIATOR, GOOD WILL HUNTING SCARY MOVIE, KILL BILL, RAMBO और THE HATEFULL EIGHT जैसी बड़ी फिल्में जुड़ी हैं...

मीटू यानी 'मैं भी' या 'मेरे साथ भी'..25 सितंबर 2018 के बाद से यौन उत्पीड़न की शिकार हुईं ढेर सारी भारतीय महिलाएं सोशल मीडिया पर हैशटैग #MeToo के साथ अपनी कहानियां बयां कर रही हैं...
पर यह #MeToo है क्या? क्यों इसे एक आंदोलन माना जा रहा है और इससे महिलाओं का क्या फायदा हो रहा है और क्यों ये मुद्दा अब चर्चा में है इन सब सवालों के जवाब आज हम जानेंगे अपने DNS कार्यक्रम में......

ये आंदोलन महिलाओं पर होने वाले यौन उत्पीड़न, शोषण और बलात्कार के खिलाफ है, जिसमें महिलाएं #MeToo हैशटैग के साथ अपनी कहानियां बयान कर रही हैं। इसके ज़रिये कई महिलाओं ने उन वाकयों को साझा किया जिसमे उनकी ज़िंदगी में कब किसी प्रभावशाली या उनके करीबी शख्स ने उनका यौन उत्पीड़न किया। #MeToo के साथ महिलाएं ताज़ा मामलों से लेकर दशकों पुराने मामले सामने ला रही हैं......#MeToo के ज़रिये उन महिलाओं की कहानियां सबसे ज़्यादा सामने आयी हैं जिनका कार्यस्थल यावर्क प्लेस पर यौन उत्पीड़न किया गया।

कब शुरू हुआ #MeToo आंदोलन

#MeToo आंदोलन की बात करें तो ये असल में तो शुरू हुआ था साल 2006 में लेकिन ये अक्टूबर 2017 के बाद ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहा । 16 अक्टूबर 2017 की दोपहर अमेरिकी अभिनेत्री एलिसा मिलानो ने खुद पर हुए यौन हमले और उत्पीड़न को लेकर एक ट्वीट किया , जिसमें उन्होंने #MeToo का इस्तेमाल किया। एलिसा के इस ट्वीट के बाद उसी दिन के आखिर में #MeToo के साथ दो लाख से ज़्यादा ट्वीट किए गए और 17 अक्टूबर तक ये आंकड़ा 5 लाख से ज़्यादा हो गया था....फेसबुक पर पहले 24 घंटे में 47 लाख से ज़्यादा लोगों ने अपनी 1 करोड़ 20 लाख पोस्ट्स में #Me-too का इस्तेमाल किया.... इनमें से 45 फीसदी लोग अमेरिकी थे....लाखों लोगों ने यह हैशटैग इस्तेमाल किया और हज़ारों लड़कियों ने अपने खिलाफ हुए यौन उत्पीड़न की कहानियां बयान कीं.... जिनमें,ग्वेनेथ पाल्ट्रो, ऐश्ली जूड, जेनिफर लॉरेंस और उमा थर्मन जैसी दिग्गज अभिनेत्रियां शामिल थीं...

भारत में # MEE TOO आंदोलन

अक्टूबर 2017 में जब अमेरिका में #MeToo आंदोलन ने ज़ोर पकड़ा , तो इसका कुछ असर भारत में भी दिखाई दिया । कई महिलाओं ने बताया कि कैसे उनके वर्क प्लेस पर उनका यौन उत्पीड़न किया गया। लेकिन, भारत में यह आंदोलन सही मायनों में 25 सितंबर 2018 को शुरू हुआ, जब बॉलीवुड एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने एक्टर नाना पाटेकर के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। तनुश्री के बाद भारत की फिल्म और टीवी इंडस्ट्री की तमाम महिलाएं आगे आईं और उन्होंने एक से एक दिग्गज कलाकारों का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने काम देने के बहाने उनका यौन उत्पीड़न किया था। इस क्रम में एक्टर आलोक नाथ, पीयूष मिश्रा, रजत कपूर, रोहित रॉय, डायरेक्टर विकास बहल, सुभाष घई, साजिद खान, सुभाष कपूर, लव रंजन, विवेक अग्निहोत्री जैसे नामी गिरामी लोग शामिल थे ।

गौरतलब है कि भारत में साल 2018 मीटू आंदोलन के नाम रहा... कामकाजी महिलाओं ने अपने खिलाफ हो रहे यौन शोषण पर आवाज उठाई.....भाजपा नेता एमजे अकबर पर उनकी पत्रकारिता के दिनों की महिला सहकर्मियों ने यौन उत्पीड़न के कई आरोप लगाए.....केंद्र सरकार ने इस आंदोलन पर संज्ञान लेते हुए अक्टूबर 2018 में कुछ मंत्रियों की एक कमेटी बनाई...जिसका जिम्मा गृह मंत्रालय को सौंपा गया था....लोकसभा 2019 चुनाव के बाद बनी नई सरकार ने फिर से इसे गठित किया है....इस कमेटी में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल और महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी शामिल हैं.....

भारत में कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013

यह अधिनियम 9 दिसंबर, 2013 को प्रभाव में आया था। यह अधिनियम उन संस्थाओं पर लागू होता है जहाँ दस से अधिक लोग काम करते हैंl यह क़ानून कार्यस्थल या workplace चाहे वो सरकारी हो या private, महिलाओं के यौन उत्पीड़न को अवैध करार देता है...यह क़ानून यौन उत्पीड़न के विभिन्न प्रकारों को चिह्नित करता है और यह बताता है कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की स्थिति में शिकायत किस प्रकार की जा सकती है....यह क़ानून हर उस महिला के लिये बना है जिसका किसी भी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न हुआ हो। इस क़ानून के अनुसार यह ज़रूरी नहीं है कि जिस कार्यस्थल पर महिला का उत्पीड़न हुआ है, वहाँ वह नौकरी करती हो। ....सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान बनाम विशाखा केस 1997 (सत्तानवे) में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामले को परिभाषित किया है। इसके मुताबिक़ किसी भी तरह का अस्वीकृत यौन निर्धारित व्यवहार (प्रत्यक्ष या दबाब में) शारीरिक सम्पर्क या प्रस्ताव, यौन अनुग्रह हेतु मांग या प्रार्थना, अश्लील व अभद्र टिप्पणी, अश्लील साहित्य या यौन प्रकृति के अन्य शारीरिक, मौखिक या गैर-मौखिक आचरण को शामिल किया है...