(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) पृथ्वी का मंगल - दलोल (Mars of Earth: Dallol)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) पृथ्वी का मंगल - दलोल (Mars of Earth: Dallol)


धरती पर आपने कई अजीबो ग़रीब जगहों के बारे में जाना या सुना होगा। शायद ऐसी जगहों के बारे में जानना आपको काफी रोमांचाकरी और दिलचस्प भी लगता हो। आज मैं आपको धरती पर मौजूद एक ऐसी ही जगह ले चलूँगा। जहां जल होने के बावजूद भी किसी तरह का जीवन संभव नहीं है।

अफ्रीकी महाद्वीप का एक देश इथोपिया...

हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका और रेड सी के क़रीब बसा है इथोपिया का ये दलोल इलाका। दलोल इलाके के जियोथर्मल ज़ोन के तालाबों को अगर आप मैप में देखेंगे तो ये आपको बेहद ही ख़ूबसूरत और रंग बिरंगा सा दिखाई देगा। लेकिन दलोल इलाके के जियोथर्मल ज़ोन में मौजूद तलाबों का रंगबिरंगा दिखने वाला ये पानी हक़ीक़त में बेहद ही गर्म, खारा, एसिडिक और ज़हरीला है। शोधकर्ताओं के मुताबिक़ दलोल का जियोथर्मल ज़ोन धरती का एक ऐसा हिस्सा है जहां इंसान तो दूर इस जगह पर वायरस, बैक्टीरिया और माइक्रोऑर्गनिज़म तक का जीवन संभव नहीं है। शोधकर्ताओं की माने तो इथियोपिया में मौजूद दलोल पृथ्वी की सबसे इन्हैबिटेबल जगह है।

दरअसल इस इलाके की स्थिति इतनी अजीबो गरीब होने की वजह दलोल क्षेत्र का volcanic crater यानी ज्वालामुखी के मुहाने के पास मौजूद होना है। इसके चलते दलोल इलाके के जियोथर्मल ज़ोन के तालाबों में ढेर सारा मैग्नीशियम, आयन और एसिड मौजूद होता है। इसके ज्वालामुखी के मुहाने पर होने के नाते इस एरिया में विषाक्तता यानी toxicity आ जाती है। volcanic crater के नज़दीक होने के नाते इस इलाके की स्थिति इतनी अजीबो गरीब हो जाती है कि सर्दियों में भी यहां का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहंच जाता है।

आपको बता दें कि लम्बे अरसे से वैज्ञानिकों की एक टीम इथोपिया के इस दलोल इलाक़े पर शोध कर रही थी। गहन शोध के बाद शोधकर्ताओं की ये टीम इस नतीज़े पर पहुँची है कि दलोल का जियोथर्मल ज़ोन धरती का एक ऐसा हिस्सा है जहां इंसान तो दूर इस जगह पर वायरस, बैक्टीरिया और माइक्रोऑर्गनिज़म तक का जीवन संभव नहीं है। शोधकर्ताओं की माने तो इथियोपिया में मौजूद दलोल पृथ्वी की सबसे इन्हैबिटेबल जगह है। ऐसे में भारत के पश्चिम में मौजूद अफ्रीकी महाद्वीप का ये इलाका पूरी दुनिया भर को ये सन्देश देता है कि अगर हमे हमारे सोलर सिस्टम में कहीं पानी मिल भी जाता है तो ये ज़रूरी नहीं है कि वहां जीवन संभव ही होगा।




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