(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) कावासाकी बीमारी (Kawasaki Disease)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) कावासाकी बीमारी (Kawasaki Disease)



कोरोना वायरस से जूझ रहे ब्रिटेन में एक और रहस्यमय बीमारी ने अपनी दस्तक दी है। यह बीमारी बच्चों को अपना शिकार बना रही हैं। लगभग 100 से अधिक बच्चे इस बीमारी का शिकार हुए है। यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस बीमारी से संक्रमित रोगियों की संख्या बढ़ सकती है। डॉक्टरों ने इस बीमारी को कावासाकी नाम दिया है। दुनिया में इस संक्रमण की तुलना कोरोना वायरस के साथ की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक़ , 5 से 16 साल के बच्चे कावासाकी नाम की एक संक्रामक बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। अब तक ब्रिटेन में 100 से अधिक बच्चों को कावासाकी बीमारी हुई है। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं की इस तरह का संक्रमण शायद कोविड -19 से प्रभावित बच्चों में हो रहा है।

आज के DNS में जानेंगे इस रहस्यमई बीमारी कावासाकी के बारे में और साथ ही समझेंगे की दुनिया भर के डॉक्टर कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान कैसे इस बीमारी से निपटने की ज़द्दोज़हद कर रहे हैं

कावासाकी बीमारी एक ऐसी बीमारी है, जो रक्त वाहिकाओं पर असर डालती है। कावासाकी रोग त्वचा और नाक, गले और मुंह के अंदर स्थिति म्युकस मेम्ब्रेन्स पर प्रभाव डालती है। कावासाकी रोग को म्यूकोस्यूटियस लिम्फ नोड सिंड्रोम (mucocutaneous lymph node syndrome) भी कहा जाता है।

कावासाकी रोग होने पर बच्चों की पूरी बॉडी में रक्त वाहिकाओं में सूजन आ जाती है। इससे ह्रदय की धमनियां क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। यह रक्त वाहिकाएं खून को दिल तक लेकर जाती हैं। जापान, कोरिया और ताइवान को मिलाकर पश्चिम एशिया में कावासाकी रोग 10-20 गुना ज्यादा है। इससे पीड़ित अधिकतर बच्चे पांच वर्ष से कम उम्र के होते हैं और औसत आयु वाले करीब दो साल के होते हैं। लड़कियों की तुलना में लड़कों को यह बीमारी होने की संभावना दो गुना होती है।

कावासाकी रोग के लक्षण चरणों में उभरकर आते हैं। कावासाकी रोग के पहले चरण में आमतौर पर 102। 2 फेरहनहाइट (F) से अधिक बुखार रहना हाथों-पैरों की सूजन, होंठ और गले में जलन और सूजन और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इस बीमारी के दूसरे चरण में हाथ और पैर की त्वचा का पीला पड़ना,जोड़ों में दर्द, डायरिया, उल्टी, पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं ।

कावासाकी रोग को कई लक्षणों के दिखाई देने की वजह से कावासाकी सिंड्रोम के नाम से भी जाना जाता है। साल 1967 में जापान के एक बच्चों के डॉक्टर ‘टोमीसाकू कावासाकी’ (Tomisaku Kawasaki) ने पहली बार इस रोग की पहचान की थी । इन्ही के नाम पर इस बीमारी को कावासाकी रोग के नाम से जाना गया । साल 1976 में पहली बार इस रोग के मामले जापान से बाहर अमेरिका के ‘हवाई’ (Hawaii) राज्य में दिखाई दिए ।

डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के पास अभी तक इस बीमारी की असली वजह को लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। यह बीमारी एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलती है। अक्सर कावासाकी रोग सर्दियों के अंत और पतझड़ (वसंत ऋतु) की शुरुआत में होने की गुंजाईश रहती है

कई शोधों में इस बीमारी की वजह बैक्टीरिया, वायरस या पर्यावरणिक कारकों को बताया गया है , लेकिन अभी तक इनमें से किसी भी कारक की पुष्टि नहीं की गई है। कभी कभी इस बीमारी की वजह माता पिता से बच्चों में आए जीन को भी बताया है।

यूँ तो इस बीमारी की शुरुआत में ही इसके लक्षणों के सामने आने पर इसको ठीक किया जा सकता है लेकिन कुछ ख़ास मामलों में जहां इसका इलाज़ करना थोड़ा मुश्किल होता है वहां सर्जरी की भी ज़रुरत पैदा हो सकती है । कुछ मामलों में दिल की धड़कन का असामान्य होना हार्ट की मांसपेशियों में सूजन हार्ट वेल्व्स का क्षतिग्रस्त होना और रक्त वाहिकाओं में सूजन आने की वजह से परिस्थितियां असामान्य हो सकती हैं ।नवजात शिशुओं में गंभीर खतरों की सबसे ज्यादा संभावना रहती है।

COVID-19 और कावासाकी:

कोरोना संक्रमित बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता के कम होने की वजह से कावासाकी की तीव्रता ज़्यादा पायी गयी । इसके अलावा कोरोना संक्रमित बच्चों में इस रोग के होने की संभावना भी ज़्यादा पायी गयी । हालांकि कोरोना महामारी के बाद में कावासाकी से ग्रस्त बच्चों में रोगों से लड़ने की क्षमता की सक्रियता काफी बढ़ गयी थी ।

हालांकि भारत में कावासाकी रोग के मामले काफी कम पाए गए हैं लेकिन पिछले दो दशकों में इसके मामले तेज़ी से बढे हैं । इन आंकड़ों के मद्देनज़र महामारी के दौरान बच्चों की सेहत पर ख़ास ध्यान देने की ज़रुरत है । भारत और दुनिया के तमाम देशों को इस बात पर गौर करने की ज़रुरत है की कोरोना महामारी में ऐसी बीमारियों को नज़रअंदाज़ न किया जाए और इसकी दवा और इलाज़ पर शोध को वरीयता दी जाये ताकि दुनिया में बच्चों के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह न लगे ।