(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) हरिकेन हन्ना (Hurricane Hanna)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) हरिकेन हन्ना (Hurricane Hanna)



अमेरिका के सबसे बड़े कोरोना हॉटस्पॉट में से एक टेक्सास इस समय एक नयी चुनौती से जूझ रहा है। बीते शनिवार को टेक्सास के तटों पर हारिकन हन्ना का हमला हुआ। मौसम अधिकारियों ने हन्ना की वजह से जानलेवा तूफ़ान और तेज़ हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। गौर तलब है की टेक्सास में अब तक कोरोना संक्रमितों की तादाद 3 लाख 80 हज़ार पहुँच चुकी है जबकि कोरोना से मरने वालों की संख्या रिकॉर्ड 5000 के पार है

कितना तेज़ है हरिकन हन्ना

हन्ना हरिकेन में हवाएं तकरीबन 90 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से चल रही हैं। हरिकेन से दक्षिणी टेक्सास और उत्तर पूर्वी मेक्सिको इलाकों में भारी बारिश होने के आसार हैं। इस भारी बारिश से बादल फटने और नदी में बाढ़ आने के आसार भी बन रहे हैं।

अमेरिका के राष्ट्रीय हरिकेन केंद्र की ताज़ा जानकारी के मुताबिक़ हन्ना का केंद्र उत्तर पूर्वी मेक्सिको की तरफ बढ़ गया है और टेक्सास में तूफ़ान के तेज़ होने की चेतावनी अब वापस ले ली गयी है।

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात हवा की रफ़्तार के मद्देनज़र 5 तरह का होता है। हन्ना इन चक्रवात में पहली श्रेणी का चक्रवात है। जब घूमती हवाओं की रफ़्तार 39 मील प्रति घंटे तक पहुँचती है तो इसे उष्णकटिबंधी तूफ़ान कहा जाता है जबकि जब इन्ही हवाओं की रफ़्तार 74 मील प्रति घंटे तक पहुँचती है तो तूफ़ान चक्रवात का या हरिकेन का रूप ले लेता है।

जैसे ही उष्ण कटिबंधीय चक्रवात तटों पर पहुँचता है कमज़ोर पड़ने लगता है जिसकी वजह यह है उसे सागर से नमी मिलनी बंद हो जाते है लेकिन चक्रवात के पूरी तरह ख़त्म होने से पहले वे तटों पर भारी वर्षा करते हैं और तेज़ हवाओं से भारी तबाही मचाते हैं।

इस चक्रवात की एक वजह अटलांटिक महासागर और कैरेबियाई सागर की सतह का तापमान औसतन समुद्री तापमान से ज़्यादा होना और अटलांटिक महासागर की सतह पर चलने वाली व्यापारिक हवाओं का कमज़ोर होना है। इसके साथ साथ पश्चिमी अफ्रीकी मानसून का मज़बूत होना भी इसकी एक वजह है।

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात या हरिकेन के लिए आम तौर पर गर्म और नम हवाएं ईंधन की तरह काम करती हैं और यही वजह है की ऐसे हरिकेन ज़्यादातर वहां पैदा होते हैं जहां समन्दर की सतह गर्म होती है जैसे की भूमध्य रेखा या इक्वेटर। नासा के मुताबिक़ जब गर्म और नम हवा जो की हल्की होती है समंदर की सतह से ऊपर की ओर उठती है तो यह नीचे कम दबाव का क्षेत्र बनाती है। इस वजह से अगल बगल के इलाकों की हवाएं इस कम दबाव के क्षेत्र की ओर आते हैं जिससे ये हवा भी धीरे गर्म होकर ऊपर उठने लगती हैं और इस तरह चक्रवात का निर्माण होता है।

गर्म हवाओं के ऊपर उठने से ये धीरे धीरे ठंडी होती हैं और इनमे मौजूद नमी धीरे ठंडी होकर बादलों का निर्माण करती हैं और इस तरह यह बादल और हवाएं धीरे तेज़ और घुमावदार होती जाती हैं और चक्रवात और विकराल रूप ले लेता है।

जैसा की ये तूफ़ान काफी तेज़ी से घूमता रहता है इसके केंद्र में एक आँख का निर्माण होता है। धरती के अपने अक्ष पर घुमते रहने की वजह से भूमध्य रेखा के उत्तर की तरफ बनने वाले तूफानों में हवा घड़ी के सुई की उल्टी दिशा में घूमती है जबकि दक्षिणी तरफ यह घड़ी के सुई की दिशा में घूमती है।

कैसे दिया जाता है तूफानों का नाम

साल 1953 से अटलांटिक में उठने वाले उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों का नाम नेशनल हर्रिकाएँ सेंटर द्वारा सुझाये गयी सूची के हिसाब से रखा जा रहा है। साल 1978 में यह फैसला लिया गया की NHC अब चक्रवातों का नाम आदमियों और महिलाओं के नाम पर बारी बारी से रखेगा। आपको बता दे की इस तरह से तूफानों का नाम रखने की कवायद सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में साल 1975 में शुरू हुई थी ।

ये नाम विश्व मौसम विभाग की अंतर्राष्ट्रीय समिति द्वारा इज़ाद किये जाते है और उन्ही समय समय पर बदला जाता है। विश्व मौसम विभाग 120 देशों की नुमाइंदगी करता है और इसके लिए दुनिया के हर समुद्री बेसिन के लिए पूर्व निर्धारित नामों की सूची का इस्तेमाल करता है। आम तौर जो भी नाम रखा जाता है वो छोटा होता है ताकि उसे प्रसारित करने में आसानी हो।

आप को बता दे की ऐसे नामों की कुल 6 सूचियां हैं जिनमे हर सूची में तकरीबन 21 नाम हैं। हर एक नाम एक अलग वर्णमाला के अक्षर से शुरू होता है। वर्णमाला के अक्षरों जैसे Q U X Y और Z का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

हालाँकि उन तूफानों जिनसे काफी नुक्सान और मौतें हुई होती हैं उन्हें दुबारा नहीं इस्तेमाल किया जाता है। अगर तूफानों की तादाद सूची में मौजूद नामों से ज़्यादा होती है तो नेशनल हरिकेन सेंटर ग्रीक वर्णमाला के मुताबिक़ नाम देता है। कुछ ख़ास तूफानों के नाम जिन्हे अब इस्तेमाल नहीं किया जाता है उनमे से 2015 में आया तूफ़ान एरिका , 2017 में आया तूफ़ान इरमा और 2018 में आया तूफ़ान फ्लोरेंस हैं
किसी तूफ़ान का नाम उन्ही हालात में दुबारा एक सा रखा जाता है जब ये दुबारा पैदा होता है।

हरिकेन और उष्ण कटिबंधीय चक्रवात में क्या फ़र्क़ है

वैसे तो दोनों के बीच कोई फ़र्क़ नहीं है। हरिकेन को उनकी पैदा होने की जगह के आधार पर टाइफून या साइक्लोन कहा जा सकता है। अटलांटिक महासागर या पूर्वी प्रशांत महासागर में पैदा होने वाले चक्रवातों को हरिकेन जबकि उत्तरी पश्चिमी प्रशांत महासागर में पैदा होने वाले तूफानों को टाइफून कहा जाता है।