(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) कितने सुरक्षित है सिख पाकिस्तान में : ननकाना साहिब हमला (How Safe are Sikhs in Pakistan: Nankana Sahib Attack)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी)  कितने सुरक्षित है सिख पाकिस्तान में : ननकाना साहिब हमला (How Safe are Sikhs in Pakistan: Nankana Sahib Attack)


हाल ही में, पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारे ननकाना साहिब पर आक्रोशित मुस्लिमों की एक भीड़ द्वारा पथराव करने का मामला सामने आया। किसी शख्स ने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। जिसके बाद, भारत में इस घटना को लेकर काफी आक्रोश देखने को मिला। पवित्र गुरुद्वारे पर हुए इस हमले को लेकर भारत ने एक आधिकारिक बयान जारी करके इसकी कड़ी निंदा की और पाकिस्तान सरकार से सिख समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। साथ ही, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी ट्वीट करके पाकिस्तान सरकार से श्रद्धालुओं और गुरुद्वारे की सुरक्षा की आग्रह की।

डीएनएस में आज हम आपको ननकाना साहिब के बारे में बताएँगे और साथ ही इसके दूसरे पहलुओं से भी आपको रूबरू कराएँगे।

तकरीबन 80 हजार की आबादी वाला ननकाना साहिब, पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में स्थित एक पवित्र शहर है। इसका मौजूदा नाम सिखों के पहले गुरू श्री गुरू नानक देव जी के नाम पर रखा गया है। इस शहर का पुराना नाम तलवंडी था। ये लाहौर से करीब 80 किमी की दूरी पर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। साल 1469 में, सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी का जन्म इसी तलवंडी में हुआ था। चूंकि ये जगह गुरू नानक देव का जन्म स्थान है, इसलिए ये सिखों का बेहद ही पवित्र और ऐतिहासिक तीर्थस्थल माना जाता है।

तलवंडी शहर की स्थापना एक अमीर जमींदार राय भोई द्वारा किया गया था। बाद में, राय भोई के पोते, राय बुलर भट्टी ने, गुरु नानक देव के सम्मान में इसका नाम बदल कर 'ननकाना साहिब' रख दिया। 'साहिब' एक अरबी मूल का लफ़्ज़ है जिसका इस्तेमाल सम्मान दर्शाने के लिए किया जाता है।

साल 1818-19 के दौरान, मुल्तान की लड़ाई के बाद लौटते वक्त महाराजा रणजीत सिंह ने ननकाना साहिब का दौरा किया था। और उन्होंने ही तीर्थ स्वरूप इस जन्म स्थान पर एक गुरुद्वारे का निर्माण करवाया था।
ननकाना साहिब में गुरु नानक देव के ‘जनम अस्थान’ के अलावा तकरीबन 11 और गुरुद्वारे स्थित हैं। जिनमें गुरुद्वारा पट्टी साहिब, गुरुद्वारा बाल जी लीला, गुरुद्वारा माल जी साहिब और गुरुद्वारा किआरा साहिब शामिल हैं। ये सभी गुरुद्वारे श्री नानक देव जी के जीवन के अलग-अलग चरणों से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा यहां पर सिखों के पांचवें गुरु - गुरु अर्जन देव और 6वें गुरु - गुरु हरगोबिंद जी को भी समर्पित गुरुद्वारे बनाए गए हैं।

अंग्रेजी शासनकाल के दौरान, करीब 1920 के दशक में, ननकाना साहिब सिख सुधार आंदोलनों का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा था। दरअसल उस वक्त इन गुरुद्वारों के महंतों ने काफी बुराइयां और भ्रष्टाचार फैला रखा था। जिसको लेकर इन धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में सुधार की मांग जोर पकड़ने लगी थी। 1921 में, एक विरोध के दौरान, गुरुद्वारे के एक महंत द्वारा 130 अकाली सिखों की हत्या कर दी गई। जिसके बाद, सिख सुधार आंदोलन और भड़क उठा। इसी आंदोलन का नतीजा रहा कि 1925 में सिख गुरुद्वारा अधिनियम पारित किया गया और गुरुद्वारों पर महंतों का क़ब्ज़ा ख़त्म हो गया। साल 2014 में, इस जगह पर मारे गए लोगों की याद में एक स्मारक भी बनवाया गया।

कुछ लोगों का ये भी आरोप है कि ननकाना साहिब हमला 1955 के पंत-मिर्जा समझौते का उल्लंघन है। आपको बता दें कि पंत-मिर्जा समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान ने एक दूसरे से वादा किया था कि वे इस तरह के धार्मिक और पूजा स्थलों की पवित्रता को बनाए रखेंगे और इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

आज़ादी के पहले तक, ननकाना साहिब में हिंदू, मुस्लिम और सिखों की तादाद लगभग बराबर थी, लेकिन बंटवारे के बाद यह शहर मुस्लिम बाहुल्य हो गया। जिसके बाद से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाले अत्याचार की ख़बरें आए दिन सुनने को मिलती रहती हैं।