(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) H-1B VISA और भारतीय कंपनियां (H-1B VISA and Indian Companies)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) H-1B VISA और भारतीय कंपनियां (H-1B VISA and Indian Companies)


महत्वपूर्ण बिंदु

H-1B Visa को लेकर ट्रंप प्रशासन के कड़े नियमों के कारण हाल ही में एक अमेरिकी थिंक टैंक द्वारा कराये गये सर्वे में ये बात सामने आई है कि इन नियमों का सबसे बुरा प्रभाव भारतीय I-T सेक्टर की कंपनियों पर पड़ा है।

हमारे DNS के आप के कार्यक्रम में हम जानेंगे कि क्या है H-1B Visa और भारत व दुनिया भर की कंपनियों को ये कैसे प्रभावित करते हैं-

  • दरअसल H-1B Visa अमेरिकी सरकार द्वारा प्रदान एक ऐसी अनुमति होती है जिसके माध्यम से अमेरिकी व अन्य कंपनियाँ अमेरिका में चल रहे अपने उद्योगों के लिये बहुत ही कुशल एवं दक्ष कर्मचारियों को नौकरी पर रखती हैं।
  • H-1B Visa एक प्रकार का Non-immigrant Visa होता है जो केवल 6 वर्षों के लिये ही मान्य होता है।
  • H-1B Visa का प्रयोग कंपनियाँ विदेशी कर्मचारियों को अपने रिक्त पदों को भरने के लिये प्रयोग करती हैं।
  • इस Visa की खास बात यह हैं कि वीजा धारक अमेरिका में Permanent Residency यानि स्थाई नागरिकता के लिये आवेदन कर सकता है साथ ही उसे अमेरिका में सम्पत्ति खरीदने व बेचने का भी अधिकार होता है।
  • मेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आते ही इस बात के संकेत दे दिये थे कि उनकी नीतियाँ Protectionist यानि संरक्षवादी होंगी साथ ही उन्होने 'America First' का भी नारा दिया था।
  • दरअसल H-1B Visa के कारण अमेरिकी कंपनियाँ कम Salary पर ही कुशल कर्मचारियों को भारत व चीन जैसे देशों से Hire करती हैं जिसके कारण अमेरिका में बेरोजगारी व अमेरिकी कर्मचारियों को छँटनी का सामना करना पड़ रहा है।
  • अमेरिकी युवाओं में इस बात को लेकर खासा रोष था और ट्रंप ने अपने Election Manifesto में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था।

H-1B Visa से जुड़ी कुछ खास बातें-

  • कोई भी ऐसा व्यक्ति जो व्यावसायिक रूप से दक्ष है यानि Professionally skilled है और उस Profession से सम्बन्धित Graduation स्तर की डिग्री रखता है H-1B Visa के तहत आता है।
  • H-1B Visa को US citizenship and immigration services यानि USCIS स्वीकार करती हे।
  • USCIS में H-1B Visa के लिये सिर्फ कंपनियां ही आवेदन कर सकती है कोई व्यक्ति इसमें आवेदन नहीं कर सकता।
  • H-1B Visa धारक अपने साथ अपने पति या पत्नी व बच्चे जिसकी उम्र 21 साल से कम हो, को अपने साथ H-4 Visa catagoryके साथ आश्रित यानि Dependent के रूप में अमेरिका ले जा सकते है।
  • खास बात यह है कि H-4 Visa धारक यानि पति या पत्नी और बच्चे U.S में किसी प्रकार की नौकरी नहीं कर सकते लेकिन वे स्कूल या कॉलेज जा सकते हैं। साथ ही वे अमेरिका में Bank Account और Driving License के लिये आवेदन भी कर सकते हैं।
  • नये नियमों के तहत USCIS ने एक साल में दिये जाने वाले Visa की सीमा निश्चित कर दी है।
  • यह सीमा अमेरिकी सरकार के निर्देशों पर बदलती रहती है।
  • H-1B Visa में हुए बदलाव के मुताबिक अब केवल उच्च पदों, उच्च वेतन व उच्च कार्यक्षमता वाले कर्मचारियों को ही कंपनियाँ hire कर सकती हैं।
  • साथ ही वे कर्मचारी जो कंपनियाँ बदलना चाहते हैं उन्हें ऐसा करने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
  • नियमों के इस बदलाव का शिकार सबसे ज्यादा भारतीय कंपनियाँ हुई हैं-
  • हाल ही में हुए सर्वे के मुताबिक Tech Mahindra, Wipro, TCS और Infosys जैसे कंपनियों को भारी मात्र में Visa की कटौती की गई है।
  • 2015 की तुलना में Tech Mahindra को 4 प्रतिशत से 41 प्रतिशत, TCS को 6 प्रतिशत से 34 प्रतिशत Wipro को 7 प्रतिशत से 54 प्रतिशत, व Infosysको 2 प्रतिशत से 45 प्रतिशत कम H-1B Visa आवंटित किये गये।
  • गौर करने वाली बात यह है कि ऐसी कटौती अमेरिकी कंपनियों के साथ नहीं की गई जिससे यह भेदभाव स्पष्ट रूप से दिखता है।
  • जहाँ 2015 में Amazon, Microsoft, Intel व Google जैसी कंपनियों को 1 प्रतिशत कम Visa दिये गये थे वहीं 2019 में यह बढ़कर क्रमशः 6, 8, 7 और 3 प्रतिशत हो गई।
  • भारत सरकार ने अमेरिकी सरकार से इस मुद्दे पर नरमी बरतने को कहा है परन्तु अभी तक H-1B Visa को पूर्ण रूप से Diplomatic मुद्दा नहीं बनाया है, अब आगे यह देखना होगा कि भारत सरकार अमेरिका से इस मुद्दे पर बात करेगी या नहीं।
     



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