(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) एस. आर. बोम्मई मामला और राज्यपाल (Governor and S. R. Bommai Case)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) एस. आर. बोम्मई मामला और राज्यपाल (Governor and S. R. Bommai Case)


हाल ही महाराष्ट्र में चल रहे राजनैतिक उठापटक के कारण राज्यपाल व उनकी कार्यशाक्तियां एक बार फिर से सवालों के घेरे मे आ गई है।

हमारे आज के D.N.S मे हम भारतीय संविधान के अनुसार राज्यपाल की भूमिका का विश्लेषण करेंगे साथ ही इससे जुडे महत्वपूर्ण S.R Bommai care के बारे में भी चर्चा करेंगे।

  • भारतीय संविधान के अनुसार जो कार्य केन्द्र में राष्ट्रपति करता है लगभग वही कार्य प्रदेश में राज्यपाल का होता है। दरअसल राज्यपाल प्रदेश मे कार्यकारी प्रमुख यानि Executive Head के रूप मे कार्य करता है।
  • राज्यपाल की दो प्रमुख भूमिकाएं कुछ इस प्रकार होती है-
  • पहली यह कि वह राज्य का कार्यकारी प्रमुख होता है
  • दूसरी यह कि वह केन्द्र व राज्य सरकार के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है।
  • राष्ट्रपति की तरह ही इसके लिये भी राज्य की मंत्रिपरिषद की सलाह इसके लिये बाध्यकारी होती है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 मे गवर्नर यानि राज्यपाल का उल्लेख मिलता है तथा इससे यह भी लिखा है कि एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल भी बनाया जा सकता है।
  • अनुच्छेद 154 में राज्यपाल को राज्य की कार्यकारी शाक्तियां प्रदान की गई है तथा अनुच्छेद 155 में राज्यपाल के निुयक्ति की शक्ति राष्ट्रपति को दी गई है।
  • राज्यपाल का कार्यकाल वैसे तो 5 वर्षों का होता है पर राष्ट्रपति द्वारा मंत्रिपरिषद की सलाह पर उसे कमी भी पद से हटाया जा सकता है।
  • हालांकि बिना किसी जायज कारण के राज्यपाल को पद से नही हटाया जा सकता इसके अलावा राज्यपाल स्वयं से भी Resignation यानि त्यागपत्र दे सकता है।
  • नियुक्ति एंव योग्यता के सम्बन्ध में ऐसा कोई भी व्यक्ति जो भारत का नागरिक हो एंव 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो को राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है।

राज्यपाल के पद से जुड़े विवाद-

राज्यपाल के पद के विवादों में रहने के वैसे तो कई कारण है पर उनमे से कुछ प्रमुख इस प्रकार है।

  • जैसे केन्द्र में सत्ताधारी पार्टी के द्वारा राज्यपालो की नियुक्ति की प्रक्रिया
  • केन्द्र के प्रति विशेष झुकाव रखने वाले लोगो की ही राज्यपाल के पदों पर नियुक्तियां
  • राज्यपाल के द्वारा राष्ट्रपति शासन का दुरूपयोग
  • राज्यपाल के द्वारा चुनावों के बाद मुख्यमंत्री की नियुक्ति में किसी एक पक्ष का साथ देना तथा राज्य की गलत रिपोर्ट या यूं कहे कि रिपोर्ट को तोड़मरोड़ करना केन्द्र को पेश करना इत्यादि आता है।
  • इन्हीं कारणों की वजह से राज्यपाल को केन्द्र का दूत यानि Agent of the centre रबर स्टाम्प आदित नामों से सम्बोधित किया जाता है।
  • इसके साथ राज्यपाल को तरीके से पद से हटाना भी विवादों का कारण रहता है
  • 1994 में हुए S.R. Bommai Case में सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का अनुसरण करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य मे संवैधानिक तंत्र के विफल होने का कारण व राज्यपाल की रिपोर्ट दोनो की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक तंत्र की विफलता को निम्न चार कारकों में बांटा है-
  • जिनमे राजनैतिक संकट,आंतरिक भ्रष्टकारिता यानि Internal Sub Version भौतिक विकार यानि Physical breakdown और केन्द्र के द्वारा दिये निर्देशों को पालन न करना आदि आते है
  • S.R. Bommai Case की वजह से अनुच्छेद 356 के दुरूपयोग पर भी सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था जिससे राज्य सरकार के मनमाने रूप से हटाना और राष्ट्रपति शासन लगाने पर भी रोक लगी थी।
  • इस केस के फैसले मे यह भी कहा गया कि राष्ट्रपति शासन संसद के दोनो सदनों द्वारा पारित किये जाने के बाद ही केवल राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है तब तक राष्ट्रपति विधानसभा को केवल सस्पेंड कर सकता है।
  • यदि राष्ट्रपति शासन को घोषणा के दो महीनों के अन्दर संसद इसे पारित नही करती है तो घोषणा समाप्त हो जायेगी तथा बरखास्त की नई सरकार फिर से सत्ता मे आ जायेगी।