(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) देहिंग पटकाई वन्यजीव अभ्यारण्य (Dehing Patkai Wildlife Sanctuary)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) देहिंग पटकाई वन्यजीव अभ्यारण्य (Dehing Patkai Wildlife Sanctuary)



एक जंगल और वहां रहने वाले जीव-जंतुओं को बचाने के लिए विरोध की लहर चली...सोशल मीडिया पर बड़ा विरोध हुआ...स्टूडेंट द्वारा कैंपेन चलाया गया...हम बात कर रहे है...असम के देहिंग पटकाई WILDLFE SANCTUARY की.....जिसको बचने के लिए ट्विटर पर(#savedehingpatkai),(#save_amazon_of_east), (#Elephant_Reserve) और (#Coal_India) जैसे कई हैशटैग ट्रेंड कर रहे थे...

महीनों के विवाद ने , असम सरकार को देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य को राष्ट्रीय उद्यान में अपग्रेड करने के लिए फैसला लेने पर मजबूर कर दिया ...जहाँ इस फैसला की 6 जुलाई, 2020 को असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल द्वारा घोषणा की गई….

आज DNS कर्यक्रम में चलिए जानते है देहिंग पटकाई WILDLIFE SANCTURY के बारे में....साथ ही उस विवाद के बारे में जिसके बाद इस WILDLIFE SANTUARY को NATIONAL PARK में अपग्रेड करने का फासला लिया गया....

अप्रैल, 2020 के महीने में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से पर्यावरणविदों के नेतृत्व में एक विरोध अभियान चलाया गया था.. यह अभियान स्टैंडिंग कमेटी की 57वीं बैठक के दौरान नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ (एनबीडब्ल्यूएल) द्वारा किए गए विवादास्पद निर्णय के कारण था..

इस निर्णय के तहत सालेकी प्रस्तावित आरक्षित वन के 98.57 हेक्टेयर क्षेत्र के अंदर कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी नार्थईस्टर्न कोलफील्ड (NEC) को कोयला खनन के लिए प्रारंभिक स्वीकृति दी गयी थी...सालेकी प्रस्तावित आरक्षित वन ‘इको-सेंसिटिव ज़ोन’ के भीतर आता है, जो कि देहिंग पटकाई वन्यजीव अभ्यारण्य के 10 किलोमीटर के दायरे में है,..

विवाद के बाद, इस स्थान पर 3 जून को कोयला खनन कार्य बंद कर दिया गया। कोल इंडिया लिमिटेड की इकाई NEC 2003 से बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के इस स्थान पर खनन कर रही थी। इसके लिए असम के वन विभाग ने मई, 2020 में कोल इंडिया लिमिटेड पर 43 तैंतालीस .24 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था…

देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य

केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय के प्रोजेक्ट एलीफेंट के तहत 1992 में देहिंग पटकाई को एलीफेंट रिजर्व घोषित किया गया था, पर बाद में 13 जून, 2004 को देहिंग पटकाई को एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया था....इसे जेपोर रेनफॉरेस्ट (Jeypore Rainforest) के नाम से भी जाना जाता है, तथा यह अभयारण्य देहिंग पटकाई एलीफेंट रिज़र्व का हिस्सा है...

यह असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया ज़िलों में स्थित है और 111.19 वर्ग किमी वर्षा वन क्षेत्र को कवर करता है।

देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य को जून, 2004 को वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था।

इस अभ्यारण्य में 47 स्तनपायी, 47 सरीसृप यानी REPTILES और 310 तितली प्रजातियां पायी जाती है...देहिंग पटकाई भारत में उष्णकटिबंधीय तराई वर्षा वनों का सबसे बड़ा क्षेत्र है...

देहिंग इस जंगल से होकर बहने वाली नदी का नाम है वहीँ यह अभयारण्य पटकाई पहाड़ी की तली में अवस्थित है....इसलिए इसे देहिंग पटकाई नाम दिया गया...

राष्ट्रीय उद्यान (National Park)

भारतीय पर्यावरण और वन मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय उद्यान वह संरक्षित क्षेत्र होता है, जिसे राज्य सरकार द्वारा किसी अभ्यारण्य के अंतर्गत अथवा बाहर के किसी क्षेत्र को पारिस्थितिक, पशु-पक्षी, वनस्पति, भू-आकृति, अथवा जैव संरचना के महत्व, संरक्षण तथा प्रसार के उद्देश्य से संरक्षित घोषित किया जा सकता है..

भारत में राष्ट्रीय उद्यान IUCN के अंतर्गत श्रेणी II में सूचीबद्ध संरक्षित क्षेत्र हैं,...बता तें चलें भारत में पहला राष्ट्रीय उद्यान वर्ष 1936 में हैली नेशनल पार्क के रूप में स्थापित किया गया था, जिसे वर्तमान में जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, उत्तराखंड के रूप में जाना जाता है....