(Daily News Scan - DNS) विज्ञान आजकल: चंद्रयान 2 - अंतरिक्ष की दौड़ (Chandrayaan - 2: Odyssey in Space)


(Daily News Scan - DNS) विज्ञान आजकल: चंद्रयान 2 - अंतरिक्ष की दौड़ (Chandrayaan - 2: Odyssey in Space)


मुख्य बिंदु:

दुनिया की चाँद पर जाने की जिद काफी पुरानी है। चाँद पर जाने के लिए समय- समय पर वैज्ञानिकों द्वारा प्रयास किए जाते रहे हैं। साल 1969 को पहली बार किसी इंसान ने चाँद पर कदम रखा था। जिसके बाद चाँद पर जाने का सिलसिला शुरू हो गया।

आज हम आपको पृथ्वी के सबसे करीब पाए जाने वाले ग्रह यानी चन्द्रमा पर जाने के लिए लिए गए पहले प्रयास के बारे में बातएंगे और साथ ही भारत के चंद्रयान मिशन -1 और चंद्रयान मिशन -2 के महत्वपूर्ण पहलुओं से भी रूबरू कराएंगे।

20 जुलाई 1969 को जब पहली बार नील एल्डन आर्मस्ट्रांग ने चाँद की धरती पर कदम रखा तो ये पल हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में कैद हो गया।

ये पहला ऐसा मौका था जब किसी इंसान को चाँद की धरती पर उतारा गया था। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अपोलो मिशन के ज़रिये वैज्ञानिकों को चाँद पर भेज गया था। अपोलो मिशन 1960 के दशक में चन्द्रमा पर इन्सानों को भेजने के लिए तैयार की गई थी। जिसकी सफलता साल 1969 में अपोलो मिशन की 11वीं उड़ान के ज़रिये अमेरिकी वैज्ञानिकों को हांसिल हुई।

नील आर्मस्ट्रांग अपोलो मिशन के कमांडर थे। इस मिशन में नील आर्मस्ट्रांग के आलावा 2 और वैज्ञानिक बज़ एल्ड्रिन, और माइकल कॉलिंस भी शामिल थे।

इस मिशन के दौरान ही आर्मस्ट्रांग के बाद बज़ एल्ड्रिन ने चाँद की धरती पर कदम रखा। जिसके बाद से उन्हें चनद पर जाने वाले दुसरे वैज्ञानिक के नाम से जाना जाता है। जबकि इस मिशन में शामिल माइकल कॉलिंस चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगा रहे यान से ही जानकारियां जुटाते रहे। इस मिशन के दौरान करीब 166 घंटे तक ये वैज्ञानिक चाँद पर मौजूद रहे और वहां से मिट्टी और चट्टानों के टुकड़े जमा किए। नील एल्डन आर्मस्ट्रांग के बारे में आपको बता दे की ये एक अमेरिका के एक ASTRONAUT यानी खगोलयात्री होने के साथ एयरोस्पेस इंजीनियर, नौसेना अधिकारी, परीक्षण पायलट, और प्रोफ़ेसर भी थे। जिन्हे इस काम के लिए अमेरिका के 37वें राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने प्रेसिडेंसियल मेडल ऑफ फ्रीडम से सम्मानित किया गया था ।

अभी तक कुल 12 अंतरिक्षयात्री चाँद पर उतर चुके हैं। चाँद पर इन्सानों को भेजने के लिए मानव रहित विमान और रोबो रोवेरों का इस्तेमाल किया जाता है। मौजूदा वक़्त में अभी अमेरिका, रूस और चीन ही चाँद तक वैज्ञानिकों को भेजने में सक्षम है। भारत भी 2022 तक गगनयान के ज़रिये भारतीय वैज्ञानिको को चाँद पर भेजने की तैयारी कर रहा है। जिसके बाद भारत इंसानों को अंतरिक्ष में पहुंचने वाला चौथा देश बन जायेगा। अमेरिका यूरोप और रूस के आलावा भारत भी चाँद पर किए जा रहे प्रयोगों का हिस्सा है। 22 अक्टूबर 2008 को भारत की ओर से पहला चंद्रयान भेजा गया था। इस मिशन का लक्ष्य चन्द्रमा की कक्षा में एक यान स्थापित करना था। जिसमें आंकड़े जुटाने सम्बन्धी उपकरणों का इस्तेमाल हुआ था। चंद्रयान मिशन - 1 के ज़रिये चन्द्रमा पर पानी और बर्फ की तलाश के साथ खनिज और रासायनिक तत्वों का पता लगाने के साथ चद्र्मा की 3 -D फोटो तैयार करना था।

चंद्रयान 1 मिशन में भारत अपनी पहली ही कोशिश में सफल हो गया था। जिसे PSLV यानी पोलर सैटेलाइट लॉन्च वेह्किल C -11 |