(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) ब्लैक बॉक्स (Black Box)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी)  ब्लैक बॉक्स (Black Box)


यूक्रेन के दुर्घटनाग्रस्त विमान का फ़्लाइट रिकार्डर ‘ब्लैक बाक्स‘ मिल गया है । ईरान ने ब्लैक बाक्स को बोइंग बनाने वाली अमेरिकी कंपनी के सुपुर्द करने से इंकार किया है और कहा है की ईरान न तो अमेरिका न ही यूक्रेन को यह ब्लैक बॉक्स देगा । गौरतलब है की अमरीकी कंपनी बोइंग के अलावा विश्व में कुछ ही ऐसे देश हैं, जो ब्लैक बाक्स के डाटा के विश्लेषण से दुर्घटना का पता लगा सकते हैं। वैश्विक विमानन नियमों के अनुसार मेज़बान देश को ब्लैक बाक्स की जांच पड़ताल का हक़ है।

मंगलवार को हुए इस हादसे में बोइंग 737-800 इस क़दर क्षत -विक्षत हो गया था यूक्रेन इंटरनेशनल एयरलाइंस बोइंग 737 टेकऑफ के तुरंत बाद तेहरान के इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास के क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान में मौजूद ईरान, यूक्रेन, अफगानिस्तान, कनाडा, जर्मनी, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम के नागरिकों सहित सभी 176 लोग मारे गए थे।

हालांकि इस हादसे और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमलों का वक़्त तक़रीबन आसपास ही था लेकिन ईरानी अधिकारियों का दावा है कि इस दुर्घटना का मिसाइल प्रक्षेपण से कोई तालुक नहीं है। ईरानी संगठन ने कहा है कि यूक्रेन चाहे तो इस जाँच कार्य में सहयोग दे सकता है। उधर बोइंग ने भी कहा है कि वह मदद देने को तत्पर है। इस विमान में यूक्रेन के अलावा ज़्यादातर यात्री कनाडा के थे।

बेहद कम लोग यह बात जानते होंगे कि ब्लैक बॉक्स क्या होता है? आपको बता दें की ब्लैक बॉक्स के नाम से जाने जाने वाले बॉक्स का रंग असल में नारंगी होता है।

यूक्रेनियन हवाई हादसे से पहले एक इंडोनेशियाई प्लेन के क्रैश होने की वजह से 188 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इस हादसे के बाद भी समंदर में हवाई जहाज का ब्लैक बॉक्स बरामद किया गया। ज्यादातर हादसों की वजहों की तफ्तीश में ये ब्लैकबॉक्स काफी कारगर माना जाता है।

आइये आज के DNS में जानते हैं इस ब्लैकबॉक्स से जुडी बातों के बारे में

दरअसल में ब्लैक बॉक्स एक फ्लाइट रिकार्डर की तरह काम करता है। ब्लैक बॉक्स विमान की पल-पल की जानकारी रखता है। यह किसी भी विमान में उड़ान के दौरान होने वाली सभी गतिविधियों को बारीकी से रिकॉर्ड करने वाला उपकरण है। यह हवाई जहाज के पिछले हिस्से में फिट होता है। दिलचस्प बात है कि विमान में लगा 'ब्लैक बॉक्स' प्लेन क्रैश के बावजूद सही सलामत बच जाता है। गौरतलब है की ब्लैकबॉक्स टाइटेनियम धातु का बना होता है जो काफी मजबूत धातु मानी जाती है। ब्लैक बॉक्स को टाइटेनियम के एक डिब्बे में बंद करके रखा जाता है। इसी कारण अगर ब्लैक बॉक्स काफी ऊंचाई से गिरता है य तो भी उसे नुकसान नहीं पहुंचता।

कैसे हुई ब्लैक बॉक्स की खौज

साल 1953-54 में हवाई हादसों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए विमान बनाने वाली कंपनियों ने विमान में ऐसे उपकरण लगाने की बात की जो हादसों के सही कारण को बता सके ताकि भविष्य में हादसों से सीख कर बचा जा सके। इसके लिए ब्लैक बॉक्स का आविष्कार किया गया। ब्लैक बॉक्स का रंग लाल होता है इसलिए शुरुआत में इसे 'रेड एग' कहते थे। लेकिन बाद में इसका नाम ब्लैक बॉक्स पड़ गया। दरअसल, ब्लैक बॉक्स की भीतरी दीवार को काला रखा जाता था शायद इसीलिए।

फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर: इसमें विमान की दिशा, ऊंचाई , ईंधन कितना है, गति, हलचल, केबिन का तापमान इत्यादि सहित 88 प्रकार के आंकड़े रिकॉर्ड होते हैं। यह 25 घंटों से अधिक की रिकार्डेड जानकारी एकत्रित रखता है। ब्लैक बॉक्स 11000°C के तापमान को एक घंटे तक झेल सकता है और उसके भीतर लगा यंत्र 260°C के तापमान को 10 घंटे तक सहन कर सकता है।

कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर: ब्लैक बॉक्स में लगा यह रिकार्डर फ्लाइट की उड़ान के 2 घंटे के समय की आवाज रिकार्ड करता है। यह इंजन की आवाज, आपातकालीन अलार्म की आवाज, केबिन की आवाज और कॉकपिट की आवाज और फ्लाइट कंट्रोल के बीच की बातचीत रिकार्ड करता है। ताकि पता चल सके हादसे के पहले विमान का माहौल कैसा था।

कैसे खोजते हैं ब्लैक बॉक्स

ब्लैक बॉक्स 30 दिनो तक बिना विद्युत के काम कर सकता है। जब यह विमान से अलग होता है तो प्रत्येक सेकंड एक बीप की आवाज/तरंग निकालता है। यह तरंग 30 दिनों तक निकलती है। जिसे खोजी दल 2 से 3 किलोमीटर की परिधि में आसानी से खोज सकते हैं। 15000 फीट गहरे समुंदर में से भी यह तरंगें भेजता रहता है।