(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (Beti Bachao Beti Padhao)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (Beti Bachao Beti Padhao)


मुख्य बिंदु:

6 सितम्बर को हुए 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' पुरस्कार 2019 समारोह में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने 5 राज्यों को सम्मानित किया । इस योजना को सफलता पूर्वक लागू करने तथा लिंगानुपात में सुधार के लिए दिल्ली, हरयाणा, उत्तराखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को पुरस्कार से सम्मानित किआ गया । 10 राज्यों के प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्रों में जन्म के समय के लिंगानुपात को बढ़ाने के लिए भी पुरस्कार से सम्मानित किआ गया । इसके अलावा 10 जिलों में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के लिए जागरूकता फ़ैलाने और सक्षम रूप से इसे लागू करने के लिए भी पुरस्कार का वितरण किआ गया।

आज के DNS में हम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के बारे में चर्चा करेंगे और जानेगे इस से जुड़ी कुछ अहम् बातों को।

पुरस्कार वितरण समारोह में 10 राज्यों को जिनमे हिमाचल प्रदेश , तमिल नाडु , शिमला , सिरमौर , गुजरात , उत्तर प्रदेश, राजस्थान,जम्मू एंड कश्मीर , कर्नाटक , नागालैंड के ज़िलों को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना सक्षम रूप से लागू करने और जागरूकता फ़ैलाने के लिए पुरस्कार दिए।

भारत में जहाँ औरतों को पूजते है वही एक तरफ कुछ लोग ऐसे भी है जो उन्ही औरतो और बेटिओ को बोझ भी समझते है । बेटियों को जनम लेने के बाद मार दिया जाता है क्यूकी उन्हें परिवार पर एक बोझ और एक कमज़ोर हिस्सा समझा जाता है । जनगणना 2011 के अनुसार भारत में CHILD sex Ratio शिशु लिंगनुपात- (0 – 6 साल) में गिरावट हुई है । 2001 में प्रति 1000 पुरुषों पर 927 महिलाएं थी जो 2011 में घटकर , 919 महिलाएं प्रति हजार पुरुष 2011 में हो गई थी ।लड़कियों के साथ होने वाले सामाजिक भेदभाव और आसानी से मिलने वाले नैदानिक उपकरनो के दुरूपयोग की वजहों से शिशु लिंगनुपात में कमी आई है ।वही शिशु लिंगनुपात में कमी की एक और वजह जनम के पहले और बाद में होने वाले भेदभाव, पक्षपात और कन्या भ्रूण हत्या भी है।

भारत में बेटियों की घटती संख्या और उनके प्रति होने वाले पक्षपात, भेदभाव को ध्यान में रखते हुए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत की गई । इस योजना की शुरुआत २२ JANUARY 2015 को हरयाणा के पानीपत से प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा हुई थी।

इस योजना के अंतर्गत CSR (शिशु लिंगनुपात) , जीवन चक्र निरंतरता और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पे विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है। बालिकाओं के अस्तित्व और संरक्षण को भी इस योजना मे सुनिश्चित किआ जा रहा है । यह योजना महिला और बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थय और परिवार कल्याण मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की संयुक्त पहल है ।

इस योजना को राष्ट्रीय अभियान के माध्यम से लागू किया गया, जिनमे 100 जिलों का चयन किया गया जहाँ csr (शिशु लिंगनुपात) कम था और साथ ही सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश को भी शामिल किया गया था । इस योजना के अहम् मकसदों में बालक बालिका अनुपात बढ़ाना, साथ ही बेटियों के हक़ को सुनिश्चित करना और भारतीय समाज में पितृसत्ता की मान्यताओं को खत्म करना भी है।

योजना की शुरुआत देश के 10 जिलों से हुई और बाद में 640 ज़िलों में लागु कर दी गई । इस योजना के माध्यम से लड़कियों की सेहत को ठीक करने के लिए विशेष अभियान भी शुरू किआ गया और स्कूल जाने वाली बच्चियों को छात्रवृत्ति की भी सुविधा दी गई जिसकी वजह से आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवार भी अपनी बच्चियों को स्कूल में पढ़ा सकेगें । इसके साथ ही कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए कानून लागू करना , बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करना और शिक्षा के अधिकार को कारगर रूप से लागू करना भी इस अभियान का हिस्सा है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम को लोगो तक पहुंचने और जागरूक करने के लिए सभी प्रकार के मीडिया जैसे रेडियो, टेलीविज़न सिनेमा, सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया का सहयोग लिया गया । बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए नुक्कड़ नाटक का भी आयोजन बाजारों में दर्शकों बीच जागरूकता पैदा करने के लिए भी किआ गया है।

इस योजना के माध्यम से उत्सवों का आयोजन जैसे लड़की का जनम दिन मानना, साधारण तरीके से विवाह को बढ़ावा देना, महिलाओ के संपत्ति के अधिकार को समर्थन देना और साथ ही सामाजिक तौर तरीको को चुनौती देने वालो को सम्मानित करना शामिल है।

ग्राम पंचायतों में गुड्डा गुड्डी बोर्ड लगाए गए है जिसमे गांव से सम्बंधित बालक बालिका अनुपात को दर्शाया जाता है । ग्राम पंचायत की ओर से बेटी के जन्म पर उसके परिवार को तोहफा दिया जाता है और साथ ही ग्राम पंचायत अपनी ओर से लड़कियों का जनम दिन भी मानते है । कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए कॉलेज और स्कूल को भी इस अभियान में शामिल किया गया है।

अगर हम इस योजना के लागू होने के बाद की स्थिति देखे तो, 2018 - 19 में बाल लिंगानुपात 918 से बढ़कर 931 हो गया है । भारत में जिन राज्यों में सेक्स रेश्यो चिंता का विषय है उनमे हरयाणा - 836 लड़कियां /1000 लड़के , दिल्ली - 817, पुडुचेर्री में 843 , अंडमान निकोबार में 859 , पंजाब 860 और सिक्किम में सबसे काम 809 है।

लिंगानुपात में सबसे बेहतर केरल है जहाँ प्रति 1000 पुरुष 1047 महिलाए है । इसके अलावा मेघालय,गोवा और छत्तीसगढ़ भी लिंगानुपात में आगे है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के ज़रिये लड़कियों को काफी मदद दी जा रही है और साथ ही कई अन्य योजनाए जैसे सुकन्या समृद्धि योजना और कई राज्यों द्वारा दी जाने वली योजनाओ की सुविधा बेटियों की सफलता का कारन और कन्या भ्रूण हत्या जैसे मामलों को खत्म करने में एक अहम् भूमिका भी निभा रहे है।




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