(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान: कहानी बांग्लादेश की (Bangabandhu Sheikh Mujibur Rahman: Story of Bangladesh)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान: कहानी बांग्लादेश की (Bangabandhu Sheikh Mujibur Rahman: Story of Bangladesh)



भारत हमेशा से अपने पड़ोसी मुल्कों के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्ते कायम करने में विश्वास करता रहा है । भारत ने कभी भी अपने पड़ोसी मुल्कों को दबाने या उनकी ज़मीन या संसाधनों पर कब्ज़ा करने की नीति नहीं रखी। बल्कि भारत अपने पड़ोसी देशों की समय समय पर मदद ही करता रहा है और इन देशों में की जाने वाले नापाक हरकतों को भी नेस्तनाबूत करता रहा है । प्राकृतिक आपदाओं , आर्थिक संकट या मानवाधिकार उल्लंघन के मामले हो या फिर गृह युद्ध भारत ने सभी मसलों पर अपने पड़ोसी देशों के साथ उदारता दिखाते हुए एक कदम आगे बढ़कर मदद की है । भारत ने हमेशा से ही अमन पसंदी और शांति सौहाद्र का परिचय दिया है इसके अलावा जब भी किसी मुल्क ने अपनी सीमा को लांघने की कोशिश की है या भारत के धैर्य की परीक्षा ली है तो हमने भी इन देशों को माकूल जवाब दिया है।

17 मार्च को बांग्लादेश के संस्थापक नेता और देश के पहले प्रधानमंत्री बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की जयन्ती मनाई जाती है । उन्हें शेख मुजीब या बंगबंधु के नाम से जाना जाता है । इस साल शेख मुजीबुर्रहमान की जन्म शताब्दी है लेकिन यहाँ पर होने वाले सभी आयोजनों को तेज़ी से फैलते कोरोना वायरस संक्रमण के चलते रोक दिया गया है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इन आयोजनों में शिरकत करने की उम्मीद की जा रही थी।

आज DNS में हम बात करेंगे बांग्लादेश की लड़ाई लड़ने वाले शेख मुजीबुर रहमान की, बांग्लादेश के स्वतंत्रता दिवस पर, बांग्लादेश की आजादी में भारत के योगदान की और साथ ही साथ बात करेंगे भारत और बांग्लादेश के रिश्तों की।

बांग्लादेश की आज़ादी में शेख मुजीबुर्रहमान लोगों की आवाज़ बनकर उभरे थे । पाकिस्तान के बढ़ते ज़ुल्मों के खिलाफ शेख ने लोगों के एक ऐसे नेता के रूप में अगुवाई की जिसने न सिर्फ बंगलाभाषी लोगों को नयी उम्मीद दी बल्कि उन्हें आज़ादी के लिए उठ खड़े होने का भी हौसला दिया।

शेख मुजीबुर्रहमान ढाका के करीब गोपालगंज ज़िले में 17 मार्च 1920 को जन्मे थे । शेख मुजीबुर्रहमान की शुरुआती पढ़ाई गोपालगंज में हुयी इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने कोलकाता का रुख किया जहाँ उनके राजनैतिक जीवन की शुरुआत हुई । शेख ने ाल इंडिया मुस्लिम फेडरेशन के ज़रिये छात्र राजनीती की शुरुआत की । 1943 में उन्होंने बंगाल मुस्लिम लीग की सदस्यता ली । आज़ादी के बाद जब उर्दू को पाकिस्तान की राजभाषा बनाने का एलान किया गया तो शेख मुजीब इसके विरोध में आ गए और मुस्लिम लीग को उन्होंने अलविदा कह दिया ।शेख मुजीब अवामी मुस्लिम लीग का भी अहम् हिस्सा रहे थे । 1955 से 58 के दरमियान वो पाकिस्तान संविधान सभा के भी रहे । 1963 में वो अवामी लीग के अध्यक्ष भी रहे ।1968 में वो जनरल अयूब के खिलाफ आंदोलन का भी हिस्सा बने । 2 दिसंबर 1969 को उन्होंने एलान किया की पूर्वी पाकिस्तान अब बांग्लादेश कहलायेगा । इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ सशत्र संग्राम की अगुवाई की । शेख मुजीब आज़ाद बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति बने और बाद में प्रधानमंत्री भी चुने गए । 15 अगस्त 1975 को सैनिक तख्ता पलट के बाद उनकी हत्या कर दी गयी।

मज़हब के आधार पर भारत का बंटवारा सं 1947 में किया गया । भारत को दो मुल्को में बाँट दिया गया । मुस्लिम बाहुल्य इलाकों को पाकिस्तान में शामिल किया गया जिसके आधार पर पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान का उदय हुआ ।लेकिन पश्चिमी पाकिस्तान ने तब के पूर्वी पाकिस्तान पर बेतहाशा ज़ुल्म ढाई ।नर संहार , बलात्कार और मानवाधिकारों के उल्लंघन में पश्चिमी पाकिस्तान ने सारी हदें पार कर दी । तब भारत बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में न सिर्फ शामिल हुआ बल्कि पाकिस्तान को ऐसी करारी शिकस्त दी की उसे पूर्वी पाकिस्तान से अपना अधिकार छोड़ना पड़ा । 16 दिसंबर 1971 को दुनिया के मानचित्र पर एक नए देश बांग्लादेश का जन्म हुआ। हालांकि बांग्लादेश के लोकप्रिय नेता और बंगबंधु के नाम से मशहूर शेख मुजीबुर रहमान ने 26 मार्च 1971 को बांग्लादेश को स्वतंत्र देश घोषित कर दिया था और जब बांग्लादेश आजाद हुआ उसके बाद से वहां हर साल 26 मार्च को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।

तारीख 16 दिसंबर 1971 । इस दिन पूर्वी पाकिस्तान भारत के मदद से पश्चिमी पाकिस्तान के अत्याचारों , शोषण और उसके सियासी तिरस्कारों से हमेशा हमेशा के लिए आज़ाद हो गया और दुनिया के नक़्शे पर एक नए मुल्क बांग्लादेश का जन्म हुआ । लेकिन आज़ादी की ये लड़ाई 26 मार्च 1971 को शुरू हुई थी। बंगबंधु के नाम से मशहूर शेख मुजीबुर्रहमान ने २६ मार्च को बांग्लादेश की आज़ादी की घोषणा कर दी थी । आज़ादी मिलने के बाद से हर साल बांग्लादेश हर साल २६ मार्च को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है।

दरअसल में 1947 के बाद भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हो गया । पाकिस्तान में भी 2 धड़े थे पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पकिस्तान । मज़हब के आधार पर जन्मे पाकिस्तान को धर्म ज़्यादा दिन तक एकजुट नहीं रख पाया । आज़ादी के कुछ दिनों के बाद ही पूर्वी पाकिस्तान में पश्चिमी पॉकिस्तान के पंजाबी प्रभुत्व और दबदबे के खिलाफ असंतोष पनपने लगा । 1948 में उर्दू को पाकिस्तान की राजभाषा का दर्ज़ा दिया गया ।पूर्वी पाकिस्तान जहाँ के लोगों की मुख्य भाषा बांगला थी वहां इस एलान के खिलाफ लोगों में गुस्सा भड़क उठा । ढाका में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने गोलियां चला दी जिसमे कई बेकसूरों की मौत हो गयी । इस घटना के बाद बांग्ला आंदोलन हिंसक हो उठा । इस आंदोलन ने भाषाई मांग को लेकर अलग देश की मांग के बीज बो दिए ।

लेकिन जिस घटना ने बांग्लादेश के लोगों को एक अलग राष्ट्र बनाने पर मज़बूर कर दिया वो था 1970 में पाकिस्तान का आम चुनाव । इस चुनाव के नतीजों ने पाकिस्तान का विघटन तय कर दिया । दरअसल में अवामी लीग को इस चुनाव में सबसे ज़्यादा सीटें मिली थी लेकिन पश्चिमी पाकिस्तान में ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो की पार्टी PPP को ज़्यादा सीटें मिली थी । बटन ने इन चुनाव परिणामों को मानने से इंकार कर दिया । इसके खिलाफ ढाका में 7 मार्च 1971 को एक विशाल रैली का आयोजन किया गया । इसी रैली में बांग्ला मुक्ति संग्राम का ऐलान किया गया । इसके बाद बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी का गठन हुआ । पाकिस्तान ने भारत पर पूर्वी पाकिस्तान के नेताओं को बरगलाने का आरोप लगाया । पाकिस्तानी फौज ने आम लोगों पर ज़ुल्म ढाने शुरू किये । इसके बाद लाखों की तादाद में लोग भारत की सीमाओं में घुसने लगी।

इस बीच पाकिस्तान ने भारत के कई हिस्सों पर हमला कर दिया । तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एलान किया की बांग्लादेश की लड़ाई अब भारत की लड़ाई है और आखिरकार 16 दिसंबर 1971 को एक नए राष्ट्र बांग्लादेश का जन्म हुआ।