(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojna)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojna)


केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने बीते दिनों अटल भू-जल योजना को मंजूरी दे दी है। भूमि जल प्रबंधन को बढ़ावा देने वाली इस योजना के तहत केंद्र सरकार पर लगभग 6 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। बता दें कि अटल भूजल योजना जल जीवन मिशन के तहत काम करेगी जिसमें 7 राज्यों के 8 हज़ार से अधिक गांवों शामिल हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अटल जल योजना या जल जीवन मिशन से संबंधित दिशा-निर्देश 2024 तक देश के प्रत्येक घर में पानी पहुंचाने के संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि यह जल संकट एक परिवार, एक नागरिक और एक देश के रूप में हमारे लिए बहुत चिंताजनक है और यह विकास को भी प्रभावित करता है।

DNS में आज हम जानेंगे कि अटल भू जल योजना क्या है ? साथ ही समझेंगे भू - जल से जुड़े कुछ और भी महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में

रिपोर्ट - अटल भूजल योजना भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 95वें जन्मदिवस के मौके पर लांच की गोई है। अटल भूजल योजना को पांच सालों के भीतर गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्‍यप्रदेश, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान और उत्‍तर प्रदेश जैसे राज्यों के चिन्हित क्षेत्रों में लागू किया जाएगा। दरअसल देश के इन राज्यों कुल 25 प्रतिशत भू जल का दोहन होता है। इनमें भी अत्यधिक दोहन वाले, अत्यधिक जोखिम और कम जोखिम वाले ब्लॉक शामिल हैं। इस योजना के शुरू होने से इन राज्यों के कुल 78 जिलों में लगभग 8350 ग्राम पंचायतों को लाभ पहुंचने की उम्मीद है। इसके अलावा अटल जल मांग पक्ष प्रबंधन पर मुख्य जोर के साथ पंचायत केन्द्रित भूजल प्रबंधन और व्यवहारगत बदलाव को भी बढ़ावा देगी। 5 वर्षों यानी 2020-21 से शुर होकर 2024-25 तक की अवधि के दौरान चलने वाली इस योजना में कुल 6 हज़ार करोड़ रुपये का ख़र्च आएगा। इस योजना में विश्व बैंक और केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 50:50 की है। यानी इस योजना के तीन हज़ार करोड़ विश्व बैंक और बाकी के केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को अनुदान के रूप में दिए जायेंगे। बाद में विश्व बैंक का पुनर्भुगतान केन्द्र सरकार द्वारा ही किया जाएगा।

दरअसल भौम जल यानी भूजल, वो जल होता है जो चट्टानों और मिट्टी से रिस जाता है और भूमि के नीचे जमा हो जाता है। जिन चट्टानों में भूजल जमा होता है, उन्हें जलभृत यानी एक्विफर कहा जाता है। सामान्य तौर पर, जलभृत बजरी, रेत, बलुआ पत्थर या चूना पत्थर से बने होते हैं। इन चट्टानों से पानी नीचे बह जाता है क्योंकि चट्टानों के बीच में ऐसे बड़ी और परस्पर जुड़ी हुई जगहें होती हैं, जो चट्टानों को प्रवेश के योग्य बना देती हैं।

देखा जाए तो जल दोहन के मामले में भारत की स्थिति काफी खराब है। दुनिया का क़रीब 25% भूजल का दोहन भारत में ही होता है। संयुक्त राष्ट्र की ईकाई यूनेस्को द्वारा बीते दिनों जारी वर्ल्ड वॉटर डेवलपमेंट रिपोर्ट रिपोर्ट के मुताबिक भारत जल दोहन के मामले में चेन से भी आगे निकल गया है।

इसके अलावा भारत के कई इलाके भीषण जल संकट से गुजर रहे हैं। बीते कुछ साल में देश के कई हिस्सों में पानी का ग्राउंड लेवल काफी नीचे चला गया है, जिसने हर किसी की चिंता को बढ़ाया है। मौजूदा वक़्त में चेन्नई इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां पर जलाशय, झीलें सूख गई हैं और ग्राउंड लेवल पानी भी काफी कम है। यही हाल कमोवेश दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और बुंदेलखंड जैसे कई और इलाकों का भी हैं।

पिछले साल नीति आयोग द्वारा जारी ‘समग्र जल प्रबंधन सूचकांक’ के मुताबिक इस समय देश में 60 करोड़ लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। इसके अलावा स्वच्छ जल की उपलब्धता न होने के कारण हर साल तक़रीबन दो लाख लोगों की मौत हो जाती है। नीति आयोग के समग्र जल प्रबंधन सूचकांक 2018 की रिपोर्ट में भी इस बात का ज़िक्र है कि मौजूदा वक़्त में ग्रामीण इलाकों के लगभग 84 % घरों में पानी की पाइपलाइन तक मौजूद नहीं है। जल संकट की इस समस्या को देखते हुए सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना जल शक्ति अभियान की शुरुआत की है। संचय जल, बेहतर कल थीम से लागू हुई ये योजना 1 जुलाई 2019 से शुरू हुई हो गई है।

भारतीय संविधान के तहत जल संबंधी मामलों को राज्य सूची में रखा गया है। इसका अर्थ ये है कि इस विषय पर राज्य विधानमंडल कानून बना सकते हैं। भारत सरकार द्वारा गठित अशोक चावला समिति ने जल को समवर्ती सूची में शामिल करने की सिफारिश नदी जल विवादों और भौम जल के अंधाधुंध दोहन को देखते हुए ही किया था । इस दिशा में काम करते हुए राज्य सरकारों को जल के सतत उपभोग पर कानून बनाने के संबंध में व्यापक दिशानिर्देश देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रारूप कानूनों या मॉडल विधेयकों के मसौदे को प्रकाशित किया था । 2011 में सरकार ने भूजल प्रबंधन पर मॉडल विधेयक का मसौदा प्रकाशित किया जिसके आधार पर राज्य अपने कानूनों को अमल में लाना चुन सकते हैं। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार ने 2012 में राष्ट्रीय जल नीति को रेखांकित किया जिसमें पानी की मांग के प्रबंधन, उपभोग क्षमता, बुनियादी और मूल्य संबंधी पहलुओं से संबंधित सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से पेश किया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने जल को प्राप्त करने के मूलभूत अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार के अंग के रूप में उल्लिखित किया है। न्यायालयों ने कई विषयों पर फैसले सुनाए हैं जैसे पेय जल तक पहुंच और सुरक्षित पेय के अधिकार को मूलभूत सिद्धांत के रूप में स्वीकार करना। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने दो वर्ष पूर्व 14 अप्रैल को भीम राव अम्बेडकर के जन्म दिवस को राष्ट्रीय जल दिवस के रूप में भी मनाने की घोषणा की थी।

अत्यधिक भूजल दोहन के कारणों का ज़िक्र करें तो इसमें मुख्य रूप से खेती और घरेलू इस्तेमाल में अनावश्यक इस्तेमाल होने वाला पानी शामिल है। इसके अलावा बढ़ती जनसँख्या, जलवायु परिवर्तन और पानी संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी भी अत्यधिक भूजल के दोहन के लिए ज़िम्मेदार है। अटल भूजल योजना इन्हीं सब मुश्किलों से उबरने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना के तहत न सिर्फ भूजल के दोहन को कम करने की कोशिश की जाएगी, बल्कि भूजल की मॉनिटरिंग भी की जा सकेगी। केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत किसानों से ऐसी खेती पर करने का का आग्रह किया है जिसमें पानी की लागत काम हो, साथ ही लोगों से जल कम खर्च करने का आह्वाहन और जल संरक्ष की दिशा में स्टार्टअप कंपनियों को आगे आकर नई तकनीकि विकसित करने का आग्रह भी केंद्र सरकार द्वारा किया गया है जिससे भूजल के अत्यधिक दोहन से बचा जा सके।