(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) अमेरिका की बौद्धिक संपदा सुरक्षा की प्राथमिक निगरानी सूची (America's Priority Monitoring List of Intellectual Property Protection)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी)  अमेरिका की बौद्धिक संपदा सुरक्षा की प्राथमिक निगरानी सूची (America's Priority Monitoring List of Intellectual Property Protection)



हाल ही में अमेरिका ने बौद्धिक संपदा सुरक्षा यानि इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी सिक्योरिटी के चलते भारत को निगरानी की प्राथमिक सूची में रखा है। अमेरिका द्वारा यह कदम उठाने का मकसद भारत के बौद्धिक संपदा अधिकार की संरक्षण व्यवस्था को लेकर उसकी कुछ पुरानी और कुछ नई आपत्तियां हैं । अमेरिका ने भारत और चीन के अलावा अपने ख़ास व्यापार भागीदार 10 देशों को इस सूची में रखा है।

भारत की ई-कॉमर्स कंपनी स्नैपडील सहित चार भारतीय बाजारों को भी अमेरिका ने इस निगरानी की प्राथमिक सूची में डाला है। इस सूची को काली सूची या लॅक लिस्ट के नाम से भी जाना जाता है । अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि विभाग या यूएसटीआर द्वारा इस सूची में स्नैपडील के अलावा दिल्ली के टैंक रोड बाजार, मुंबई के हीरा-पन्ना, कोलकाता के किड्डरपोर और आइजोल के मिलेनियम सेंटर को भी रखा गया है

आज के DNS में हम जानेंगे की क्या होती है ये निगरानी की प्राथमिक सूची और अमेरिका किस आधार पर देशों को इस सूची में डालता है या हटाता है

विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार संगठन के अनुसार, बौद्धिक संपदा में साहित्यिक और कलात्मक कार्यों, प्रतीकों, नामों और छवियों का निर्माण शामिल है। चार प्रमुख बौद्धिक संपदा अधिकारों में अविष्कार, भौगोलिक संकेत, ट्रेडमार्क और औद्योगिक डिजाइन शामिल हैं।

अमेरिका के अनुसार, भारत में बौद्धिक संपदा अर्थात इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज (आईपी) चुनौतियों ने अमरीकी व्यापारियों के लिए इस देश में पेटेंट हासिल करना, कायम रखना और उसे लागू करना तकरीबन नामुमकिन कर दिया है। यह दिक्कत दवा अर्थात फार्मास्यूटिकल उद्योगों में सबसे ज़्यादा है। अमेरिका ने यह भी शिकायत की है कि भारत ने राज्य में फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस जारी करने के मामले में भी पारदर्शिता कम कर दी है । जिसे अमरीकी दवा कंपनियों को यहाँ लाइसेंस लेने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

अमेरिका के मुताबिक़ फार्मास्यूटिकल्स के अलावा, भारत की कृषि रासायनिक उत्पाद प्रणाली में भी चुनौतियां थीं। ऐसे अन्य मामलों में व्यापार गोपनीयता चोरी, ऑनलाइन चोरी, ट्रेडमार्क की रक्षा करने में दिक्कतें नकली सामानों का निर्यात, उच्च मात्रा में विनिर्माण भी शामिल हैं।

अमेरिका ने अपनी इस सूची में भारत के साथ अन्य 10 देशों को भी शामिल किया है और इन देशों में चीन का भी नाम है । अमरीका ने इन देशों पर यह आरोप लगाया है कि इन देशों में बौद्धिक संपदाओं और उनके प्रवर्तन ने अमरीकी कंपनियों के भारत के बाजार में पहुंच को कम किया है जिसके उनके व्यापार को घाटा हुआ है । इस सूची में शामिल अन्य देश अर्जेंटीना, अल्जीरिया, चिली, रूस, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, वेनेज़ुएला और यूक्रेन हैं। इस सूची से कनाडा, कुवैत और थाईलैंड के नाम हटा लिए गए हैं।

दुनियाभर में बौद्धिक संपदा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिहाज़ से 1967 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन यानि WIPO का गठन किया गया था। मौजूदा वक़्त में इसके तहत 26 अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ आती हैं और 191 देश इसके सदस्य हैं। WIPO का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है।हर साल 26 अप्रैल को विश्व बौद्धिक संपदा दिवस मनाया जाता है। भारत ने साल 1975 में WIPO की सदस्यता ली थी।

बौद्धिक सम्पदा अधिकार से जुडी अंततराष्ट्रीय संधियां :

इन संधियों में सबसे पहले आता है औद्योगिक संपदा के संरक्षण से जुड़ा पेरिस कंवेन्शन (1883) जिसमे ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिज़ाइन और आविष्कार के पेटेंट शामिल हैं।

इसके बाद साहित्यिक और कलात्मक कामों को महफूज़ करने के लिये 1886 में बर्न कंवेन्शन वज़ूद में आया। इसमें उपन्यास, लघु कथाएँ, नाटक, गाने, ओपेरा, संगीत, ड्राइंग, पेंटिंग, मूर्तिकला और वास्तुशिल्प आदि को कॉपीराइट किया जा सकता था।

साल 2013 में इन संधियों में मर्राकेश संधि का नाम जुड़ गया । इस संधि के मुताबिक़ किसी किताब को ब्रेल लिपि में छापे जाने पर इसे बौद्धिक सम्पदा का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। इस संधि को अपनाने वाला भारत पहला देश है।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के बौद्धिक संपदा माहौल में कुछ सुधार हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक सूचकांक-2019 में भारत का स्थान आठ पायदान उछल कर छत्तीसवें पर आ गया है। इसके अलावा 2018 में भारत इस सूची में चवालीसवें स्थान पर था। वरीयता सूचकांक पर नजर डालें तो 2019 की सूची में शीर्ष पर काबिज पांच देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, स्वीडन, फ्रांस और जर्मनी शामिल हैं। यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स के ग्लोबल इनोवेशन पॉलिसी सेंटर (जीआइपीसी) द्वारा तैयार की जाने वाली इस सूची में देशों की रैंकिंग पैंतालीस मानकों पर निर्धारित की जाती है।

फिलहाल अमेरिका के भारत को प्राथमिक निगरानी सूची में डाले जाने से भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में खटास आ सकती है । कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के चलते भारत और अमेरिका दोनों ही आर्थिक मंदी के मुहाने पर खड़े हैं । लॉक डाउन के चलते देशों के बीच होने वाला व्यापार भी ठप पड़ा है और पूरी दुनिया इस संकट से उबरने की जद्दोजहद में हैं । ऐसे में अमरीका के इस कदम से भारत और अमेरिका दोनों ही देशों के व्यापारिक रिश्तों पर गहरा असर पड़ना लाज़मी है।