(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) अहोम राजा छो लुंग सुकफा (Ahom Kings Chao Lung Sukafa)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) अहोम राजा छो लुंग सुकफा (Ahom Kings Chao Lung Sukafa)



बीते शुक्रवार आसाम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कोलकाता के राजनैतिक टिप्पणीकार गर्ग चटर्जी की गिरफ्तारी का आदेश दिया. गर्ग चटर्जी ने अहोम राज्य की नीव रखने वाले राजा छो लुंग सुकफा को चीनी आक्रमणकारी बताया था..

कौन थे छो लुंग सुकफा

सुकफा 13 वीं शताब्दी के महान शासक थे जिन्होंने अहोम साम्राज्य की नीव रखी थी .अहोम साम्राज्य ने असम पर 6 सदियों तक राज्य किया . तत्कालीन विद्वानों की माने तो सुकफा का ताल्लुक बर्मा से था . सुकफा 13 वीं सदी में बर्मा के ऊपरी क्षेत्र से असम में मौजूद ब्रह्मपुत्र की घाटी में अपने 9000 नुमाइंदों के साथ पहुंचे थे .

कौन थे अहोम?

ताई जाति के लोग जो बर्मा (वर्तमान में म्यांमार) के उत्तरी इलाके में रहते थे, उन्हें ही अहोम कहा जाता था। ताई राजकुमार चालूंग सुकाफा के नेतृत्व में अहोम ने ब्रह्मपुत्र घाटी में हमला करके यहां अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया। माना जाता है की सुकफा ने असं के चराइडो में अपनी सत्ता काबिज़ की और इस तरह असम में धीरे धीरे अहोम साम्राज्य ने हुकूमत को कायम किया इस तरह से 1228 ईस्वी में असम के क्षेत्र में अहोम साम्राज्य की स्थापना हो गई।

इस दौरान पश्चिमोत्तर दिशा से लगातार असम पर मुस्लिम आक्रमणकारियों के भी हमले हो रहे थे...धीरे-धीरे अहोम साम्राज्य का विस्तार होना शुरू हो गया और कामरूप, लखीमपुर, शिवसागर, नवगांव और दारांग तक में अहोम साम्राज्य ने अपने पांव पसार लिये...जानकारों का मानना है की अहोम साम्राज्य के शुरुआती दौर में अहोम लोगों ने खुद की भाषा और धर्म को तवज़्ज़ो दी लेकिन बीते वक़्त के साथ साथ अहोम लोगों ने हिन्दू धर्म और असमिया भाषा और तौर तरीकों को अपनाना शुरू कर दिया....जानकारों का ये भी कहना है की सुकफा ने असम में रह रही स्थानीय जनजातियों के साथ मधुर सबंध बनाये.....इन जनजातियों में ख़ास तौर पर सुतिया मोरां और कछारी लोगों के अहोम से ख़ास रिश्ते रहे . अहोम लोगों ने इन जनजातियों के साथ वैवाहिक रिश्ते भी कायम किये.

क्यों है सुकफा की अहमियत

मौजूदा वक़्त में असम में सुकफा को अहमियत देने की सबसे बड़ी वजह है उनके द्वारा यहाँ के समुदाय और मौजूद जनजातियों को एकीकृत करने के लिए किया गया सराहनीय प्रयास. सुकफा को असम में बोर असम या वृहत असम के निर्माता के तौर पर ख़ास तवज़्ज़ो दी जाती है...

सुकफा के शासन और उनके प्रयासों का महत्त्व रखते हुए हर साल 2 दिसंबर का दिन असम दिवस के रूप में मनाया जाता है..... आसाम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की माने तो राजा के तौर पर सुकफा को आधुनिक असम और यहाँ के विस्तृत समाज का शिल्पकार कहा जाता है . सुकफा ने अपनी मेलजोल समरसता और एकीकरण की नीतियों के ज़रिये एक मज़बूत और जीवंत असमिया समाज केकी नीव राखी या अहोम लोगों ने सदियों से चली आ रही ज़मींदारी प्रथा को ख़त्म कर एक नयी राज व्यवस्था को जन्म दिया. अहोम राज्य में बंधुआ मज़दूरी की परंपरा थी और जो राज्य के लिए बंधुआ मज़दूरी को अंजाम देते थे उन्हें पाइक कहा जाता था...

अहोम समाज कई वंश में बंटा रहता था जिन्हे खेल के नाम से जाना जाता था . एक खेल आमतौर पर कई गावों पर नियंत्रण रखता था...अहोम समाज में कवियों और बुद्धिजीवियों को भूमि उपहार के तौर पर दी जाती थी . अहोम समाज में संस्कृत के कई ग्रंथों को यहां की स्थानीय भाषा में भी अनुवादित किया गया .रंगमंच को भी अहोम शासन के दौरान काफी वरीयता दी जाती थी....कई सारे ऐतिहासिक दस्तावेजों को अहोम शासन में लिखा गया जिन्हे स्थानीय भाषा में बुरंजी नाम दिया जाता था....इन दस्तावेज़ों को शुरुआत में अहोम भाषा में लिखा गया था जिसे बाद में असमिया भाषा में तब्दील किया गया....ये अहोम ही थे जिन्होंने असम समेत उत्तर पूर्व के कई राज्यों को मुग़लों के कहर से बचाया था . अहोम राजाओं ने ना सिर्फ असम को बाहरी आक्रमणों से महफूज़ रखा बल्कि यहां की संस्कृति कला और सामजिक ताने बाने को भी कायम रखा.