(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) 26 जून: अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस (26 June: International Day Against Drug Abuse)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) 26 जून: अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस (26 June: International Day Against Drug Abuse)



क्या कभी सोचा है...समाज में अपराध और गैरकानूनी हरकतों के बढ़ने के पीछे नशा जिम्मेदार है.....आज के दौर में नशा फैशन बन गया है....हर साल लोगों को नशे से छुटकारा दिलवाने के लिए 30 जनवरी को नशा मुक्ति संकल्प और शपथ दिवस, 31 मई को अंतरराष्ट्रीय ध्रूमपान निषेध दिवस, और 2 से 8 अक्टूबर तक भारत में मद्य निषेध दिवस मनाया जाता है....मगर हकीकत में ये दिवस सिर्फ कागजी साबित हो रहे हैं....इसके लिए सिर्फ सरकार के ही द्वारा उठाये गये कदम काफी नही है...नशे के प्रति स्वयं भी जागरूक होना पड़ेगा.....

आज 26 जून है हर साल की तरह आज अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाया जाता है.....

आज DNS कार्यक्रम में बात करते है अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस के बारे में इसके इतिहास और इसे क्यूँ मनाया जाता है.....

हर साल 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाया जाता है....इसे सबसे पहली बार 1987 सत्तासी में मनाया गया था..इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को नशा और इससे होने वाले कुप्रभाव के प्रति जागरूक करना है... इस साल अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस का थीम बेहतर देखभाल के लिए बेहतर ज्ञान जरूरी है यानी Better Knowledge For Better Care है......आइए, इसके इतिहास और महत्व पर एक नजर डालते हैं

अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस का इतिहास

आज ही नही नशे का सेवन प्राचीन काल में भी किया जाता था...उस समय इसे 'सोमरस' कहा जाता था। हालांकि, इसका उद्देश्य समाज को दूषित करना कतई नहीं था, लेकिन आधुनिक समय में नशा की परिभाषा ही बदल गई है...लोग कई तरह का नशा करने लगे हैं, जिनमें शराब, ड्रग्स और हेरोइन शामिल हैं....और न जाने कैसे कैसे तरीके अपनाये जा रहे है....बच्चे भी नशे की तरफ आकर्षित हो रहे हैं..इससे आने वाली पीढ़ी पर उल्टा असर पड़ सकता है। इसके साथ ही खपत अधिक होने से अवैध तस्करी भी जमकर हो रही है। इसके मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र ने 1987 सत्तासी में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें समाज को नशा मुक्त करने की बात थी। इसे सभी देशों की सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। इसके बाद 26 जून, 1987 सत्तासी को पहली बार अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाया गया और फिर हर साल 26 जून को मनाया जाने लगा... नशीली दवाओं के दुरुपयोग में कोकीन, , कैनबीज, सीडेटिव हिप्नोटिक्स और ओपिएट्स जैसी दवाओं का इस्तेमाल करना नहीं है, बल्कि दर्द निवारक दवाओं, नींद की गोलियों और ट्रांक्विलाइजर्स जैसी दवाओं का सेवन भी शामिल है। यूनाइटेड नेशन्स ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (UNODC) के द्वारा जारी की गई वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2017 के अनुसार, लगभग एक अरब लोगों ने साल 2015 में कम से कम एक बार ड्रग्स का इस्तेमाल किया।

इस दिवस का उद्देश्य

इस दिवस का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नशीली दवाओं से छुटकारा पाना है तथा समाज में सशक्तिकरण लाना है. इस दिन विभिन्न संगठन अवैध ड्रग्स की चुनौतियों को शांतिपूर्वक संबोधित करने पर जोर देते हैं. उनका मूल सिद्धांत युवाओं की रक्षा करना और मानव जाति के कल्याण को बढ़ावा देना है. यूएनओडीसी ने इस दिन वैश्विक दवा समस्या के बारे में जागरूकता बढ़ाने हेतु अभियान शुरू किया था. प्रत्येक वर्ष संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स और क्राइम कार्यालय (यूएनओडीसी) इस दिन के लिए एक थीम का चयन करता है...

अवैध रूप से नशीली दवाओं के उपयोग के खतरों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए कई सार्वजनिक रैलियां की जाती हैं...सरकारों व गैर-सरकारी संगठनों द्वारा इस तरह के कार्यक्रमों के आयोजन किया जाता है..इस दिन का लक्ष्य एक ऐसे समाज का निर्माण करने की दिशा में वैश्विक कार्रवाई और सहयोग को मजबूत करना है, जो नशीली दवाओं के दुरुपयोग और गैर-कानूनी नशीली दवाओं के व्यापार से मुक्त हो...

ड्रग्स के दुरूपयोग

ड्रग्स का सेवन या ड्रग्स की लत एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक समस्या है. ड्रग्स की लत न केवल पूरी दुनिया के युवाओं को प्रभावित करती है बल्कि हर उम्र के लोगों को भी प्रभावित करती है. यह व्यक्तियों और समाज को कई क्षेत्रों में नष्ट कर देती है. ऐसे ड्रग्स की लत के कारण कई तरह की बीमारियाँ साथ ही व्यवहार में भी कई तरह के परिवर्तन होते है.... चिंता का बढ़ना और चिड़चिड़ापन, नींद आना और कामकाज की हानि का गंभीर नुकसान होता है...

ड्रग्स की अवैध तस्करी

नशीले पदार्थों की तस्करी एक अंतरराष्ट्रीय अवैध व्यापार है....इसमें मूलभूत कानूनों के मुताबिक निषिद्ध पदार्थ, उत्पादन, खेती, प्रसार और बिक्री शामिल है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार का यह अवैध व्यापर करीब 1 प्रतिशत होने का अनुमान है. उत्तरी व्यापार मार्ग और बाल्कन क्षेत्र मुख्य ड्रग ट्रैफिकिंग क्षेत्र हैं जो पूर्वी और पश्चिमी महाद्वीपों में अन्य अंतरराष्ट्रीय दवा बाजारों के बड़े बाजार में अफगानिस्तान को लिंक करते हैं.

संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स और क्राइम कार्यालय :

संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स और क्राइम कार्यालय (unodc) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है. यह संगठन अवैध मादक पदार्थों के दुरुपयोग और उसके उत्पादन के खिलाफ लड़ रहा है जिसे एक अंतरराष्ट्रीय अपराध माना जाता है. इस संगठन को साल 1997 सत्तानवे में संयुक्त राष्ट्र ड्रग कंट्रोल कार्यक्रम के साथ अंतर्राष्ट्रीय अपराध निवारण केंद्र में विलय करके स्थापित किया गया था...अवैध नशीली दवाओं की तस्करी, अपराध दर में वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में सदस्यों की सहायता करने में मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स और क्राइम कार्यालय अनिवार्य है....

देश में नशाखोरी में युवावर्ग सबसे ज्यादा शामिल हैं....मनोचिकित्सकों का कहना है कि युवाओं में नशे के बढ़ते चलन के पीछे बदलती जीवन शैली, परिवार का दबाव, परिवार के झगड़े, इन्टरनेट का अत्यधिक उपयोग, एकाकी जीवन, परिवार से दूर रहने, पारिवारिक कलह जैसे अनेक कारण हो सकते हैं...आजादी के बाद देश में शराब की खपत 60 से 80 गुना अधिक बढ़ी है। यह भी सच है कि शराब की बिक्री से सरकार को एक बड़े राजस्व की प्राप्ति होती है....मगर इस प्रकार की आय से हमारा सामाजिक ढांचा बेढंग हो रहा है और परिवार के परिवार खत्म होते जा रहे हैं....इसीलिए जरुरत है खुद नशे के प्रति जागरूक होना....अपने दोस्तों और जानने वालों को जागरूक करना..सरकार और गैर सरकारी संगठन जहाँ अपनी और से कदम उठा रहे है वहीं समाज को भी भी खुद के लिए आगे आना होगा... नशाखोरी के खिलाफ लड़ाई खुद भी लड़नी होगी.... क्योंकि अब ड्रग्स का नशा स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों को भी अपने चंगुल में फंसा रहा है....जो अँधेरे भविष को दर्शाता है...