(Video) भारतीय कला एवं संस्कृति (Indian Art & Culture) : भारतीय मूर्ति और चित्रकला: अजंता चित्रकला (Sculpture and Painting: Ajanta Paintings)


(Video) भारतीय कला एवं संस्कृति (Indian Art & Culture) : भारतीय मूर्ति और चित्रकला: अजंता चित्रकला (Sculpture and Painting: Ajanta Paintings)


प्राचीन भारतीय चित्रकला का वास्तविक प्रतिनिधित्व अजन्ता गुफाओं में बने चित्र करते हैं। इस शैली का विकास शुंग, कुषाण, गुप्त, वाकाटक एवं चालुक्य वंशीय राजाओं के काल में हुआ। अजंता में बने चित्र भारतीय चित्रकला की महान परंपरा को दर्शाते हैं। अजन्ता में 29 गुफाएँ हैं- ये सभी अर्द्धगोलाकार चट्टानी कगार में खुदाई करके बनायी गयी हैं। गुफा संख्या 9, 10, 19 और 26 चैत्य हैं और शेष विहार या भिक्षु आवास हैं। अजंता की गुफाओं में 9वीं व 10वीं गुफा सबसे प्राचीन मानी जाती है। माना जाताहै कि इन गुफाओं के चित्र शुंगकालीन (ईसा पूर्व पहली सदी) हैं, बाकी चित्रें के पीछे गुप्तकालीन प्रेरणा है। कुछ गुफाओं के चित्र वाकाटक और चालुक्य वंशीय शासकों के संरक्षण में भी बने हैं। 8वीं, 12वीं व 13वीं गुफा के चित्र अपना अस्तित्व लगभग खो चुके हैं। अजंता की गुफा संख्या 17वीं में सबसे अधिक चित्र हैं।

अजन्ता गुफा की चित्रकारी प्रायः ‘फ्रेस्को’ कहलाती है, परंतु यह संज्ञा अनुचित है क्योंकि एक ‘फ्रेस्को’ का चित्रण गीले पलस्तर में ही होता है और अजन्ता के भित्ति पलस्तर सूख जाने के उपरांत बने थे। दरअसल अजंता के चित्र टेम्परा स्टाइल में बनाये गये हैं। अजंता के चित्रें में एक दृश्य को अगले दृश्य से पृथक करने वाली रेखाएँ नहीं हैं, इसलिए वे एक-दूसरे से मिल जाते हैं, छोटी-छोटी आकृतियाँ और नमूने चतुराई से नेत्र को प्रत्येक दृश्य की केन्द्रीय आकृतियों की ओर ले जाते हैं। चित्रें का कोई दृश्य रूप नहीं है, परंतु गहराई, मिथ्याभास पृष्ठभूमि की आकृतियों को आगे की आकृतियों की अपेक्षा कुछ अधिक उभार कर दिखाया गया है। इस विधि का प्रभाव टेलिस्कोपिक कैमरा द्वारा लिये गये फोटो जैसा है और इसके कारण आकृतियाँ समतल भीत से उठकर दर्शक से भेंट करने की आती हुई प्रतीत होती हैं।

अजंता में बने चित्रें को इतनी कुशलतापूर्वक बनाया गया है कि वे सजीव प्रतीत होते हैं। अजंता के चित्रें में जीवन के विभिन्न पहलुओं के दर्शन होते हैं। इन चित्रकृतियों की पृष्ठभूमि में जीवन के धार्मिक और दार्शनिक पहलू विद्यमान हैं। दरअसल इन चित्रें के माध्यम से जीवन के सभी रूपों को दर्शाकर जीवन की एकता का संदेश दिया गया है। कलाकारों ने जीवन के सभी रूपों को समान महत्त्व दिया है और चित्रकला के सभी रूप मिलकर वास्तविक जीवन की एक भरपूर तस्वीर पेश करते हैं।

अजंता के भित्ति चित्रें का यद्यपि धार्मिक उद्देश्य था, क्योंकि बुद्ध के जीवन और जातक कथाओं से सम्बन्धित अनेक चित्र बनाये गये हैं। इसके बावजूद यहाँ के चित्रें में विभिन्न विषयों से सम्बद्ध चित्र मिलते हैं। इनमें शाही दरबारों की शान-शौकत, प्रेम की क्रीड़ाएँ, भोज-गान-नृत्य के आनन्द, भोग विलास की मानव निर्मित वस्तुएँ, इमारतें, वस्त्र और आभूषण दिखाये गये हैं। कुछ चित्रें में हरियाली और फूल, पशु-पक्षी, आदि प्राकृतिक वस्तुओं को दर्शाया गया है। इन चित्रें में प्रत्येक वस्तु और आकृति सुन्दरता और दक्षता से बनायी गयी है।

अजंता चित्र शैली की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

  • अजंता के चित्रें में शांति, करूणा, उल्लास, स्थिरता, सौहार्द, भक्ति, विनय और विकलता आदि भावनाओं को उत्कृष्ता से दर्शाया गया है। वस्तुतः भाव प्रवणता ही अजंता चित्रकला की आत्मा है।
  • अजंता के चित्रें में रेखाएँ संतुलित हैं, जिनसे चित्रकारी की कुशलता प्रदर्शित होती है।
  • अजंता के चित्रें में रंग का संयोजन अति प्राकृतिक ढंग से किया गया है। इन चित्रें में गेरूआ, रामराज, हरा, काजल, नीला और चूने के रंग का विशेष प्रयोग हुआ है।
  • अजंता के चित्रें में नारी को आदर्श रूप में दर्शाया गया है। इनमें भारतीय परम्परा के अनुसार नारी को ऊँचा स्थान दिया गया है।
  • अजंता के चित्रें में जीवन के भौतिक एवं आध्यात्मिक पक्षों की सुंदर अभिव्यक्ति हुई है।
  • अजंता चित्रें की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि उनमें गांवों के सामान्य एवं शांति जीवन के साथ-साथ नगर के कोलाहलपूर्ण जीवन का भी चित्रण बड़े जीवंत ढंग से किया गया है।




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