‘ऑनलाइन विवाद समाधान’ (Online Dispute Resolution - ODR) : डेली करेंट अफेयर्स

‘ऑनलाइन विवाद समाधान’ (Online Dispute Resolution- ODR)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में नीति आयोग (National Institution for Transforming India- NITI Aayog) ने आगामी और ओमिद्यार नेटवर्क इंडिया (Agami and Omidyar Network India) के साथ मिलकर अपनी तरह की पहली ऑनलाइन विवाद समाधान पुस्तिका (Online Dispute Resolution Handbook) का शुभारंभ किया है।

प्रमुख बिन्दु

  • ऑनलाइन विवाद समाधान पुस्तिका(Online Dispute Resolution Handbook), व्यवसायिक जगत के लिए एक तरह का आमंत्रण है कि वह भारत में ओडीआर को अंगीकार करें। यह पुस्तिका ओडीआर व्यवस्था की आवश्यकता को रेखांकित करती है। भारत में भी व्यवसायिक जगत इस ओडीआर के मॉडल को अपना सकता है।
  • कोविड-19 ने हमारे जीवन को अकल्पनीय रूप से बदल दिया है, जिसमें अनिवार्य रूप से कोर्ट के कामकाज का तरीका भी शामिल है। न्यायालयों में भी प्रत्यक्ष सुनवाई के अतिरिक्त, वर्चुअल हियरिंग शुरू हो चुकी है। ऐसे में ऑनलाइन विवाद समाधान (ओडीआर) काफी महत्वपूर्ण हो गया है।
  • ओडीआर पुस्तिका में इस बात का उल्लेख किया गया है कि भारत में पारंपरिक तौर पर मुकदमेबाजी लंबे समय तक चलने वाली, महंगी और दूभर है। जबकि ओडीआर आज की डिजिटली दुनिया में सुलभ न्याय में अहम भूमिका निभा सकती है।
  • ओडीआर पुस्तिका बताती है कि अर्थव्यवस्था के विस्तार के लिए ओडीआर क्यों फायदेमंद हो सकता है, व्यवसायों के लिए त्वरित और कुशल समाधान और यहां तक कि उन लोगों को भी फायदा हो सकता है जिनके लिए विवाद के पारंपरिक साधन पहुंच से बाहर और दूभर हैं।

‘ऑनलाइन विवाद समाधान’ (Online Dispute Resolution- ODR)

  • ‘ऑनलाइन विवाद समाधान’ (Online Dispute Resolution- ODR), डिजिटल प्रौद्योगिकी और वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternate Dispute Resolution- ADR) की तकनीकियों का उपयोग करते हुए अदालतों के बाहर लघु और मध्यम दर्जे के विवादों को निपटाने की एक व्यवस्था है जिसमें मध्यस्थता और बीच- बचाव के उपाय किए गए हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो ओडीआर तंत्र का तात्पर्य डिजिटल प्रौद्योगिकी के माध्यम से छोटे और मध्‍यम किस्‍म के विवादों का बातचीत, बीच-बचाव और मध्यस्थता के माध्यम से समाधान करना है।
  • न्यायपालिका के प्रयासों के चलते जहां अदालतों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है ऐसे में प्रभावी, स्केलेबल और विवादों की रोकथाम तथा समाधान के लिए साझेदारी की व्यवस्था अपरिहार्य हो जाती है। ओडीआर विवादों के प्रभावी और सस्ते समाधान की दिशा में मददगार हो सकती है।

‘ऑनलाइन विवाद समाधान’(ओडीआर) की आवश्यकता व लाभ

  • जहां एक ओर न्यायपालिका के प्रयासों के माध्यम से न्यायालय डिजिटल हो रहे हैं, ऐसे में नियंत्रण और समाधान के अधिक प्रभावी, सुगम्य और सहयोगी तंत्र की तत्काल आवश्यकता है। ओडीआर विवादों को कुशलतापूर्वक और किफायती तरीके से सुलझाने में मदद कर सकती है।
  • यह सुविधाजनक, सटीक, समय की बचत करने वाला और किफायती है। इसलिए विभिन्न उद्योगों, स्थानों और देश के विविध हिस्सों तक ऑनलाइन समाधान की पहुंच सुनिश्चित करने और सार्वजनिक संस्थानों को बड़े पैमाने पर सहायता देने के लिए निजी ओडीआर और एडीआर प्रदाताओं को एकसाथ जोड़ा जाना चाहिए।
  • ऑनलाइन विवाद समाधान (ओडीआर) में न्याय प्रदान करने की व्यवस्था के विकेंद्रीकरण, विविधता, लोकतंत्रीकरण और जटिलता को सुलझाने की क्षमता है।
  • ऑनलाइन विवाद निपटान (ओडीआर) में नागरिकों के लिए न्याय प्रणाली को विकेंद्रित और लोकतांत्रिक करने की क्षमता है।

क्या होता है वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative dispute resolution: ADR) ?

  • वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) विवादों को सुलझाने के सन्दर्भ में उन विभिन्न प्रकार की प्रक्रियाओं को संदर्भित करता है जो संबधित पार्टियों को बिना ट्रायल या बगैर मुकदमेबाजी के विवादों को हल करने में मदद करता है। वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) के प्रचलित स्वरूपों में मध्यस्थता, पंचाट, तटस्थ मूल्यांकन, लोक अदालत इत्यादि शामिल हैं।

आगे की राह

  • सभी विवादों की ऑनलाइन सुनवाई से बहुत अधिक डेटा जुटाने में मदद मिलती है, जो भविष्य में ओडीआर की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा सकता है। वास्तव में, इस डेटा का सार्थक रूप से इस्तेमाल अदालतों के वर्चुअल अनुभव को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।
  • आने वाले दिनों में, ओडीआर वह व्यवस्था हो सकती है जो व्यवसायों को जल्दी से समाधान प्राप्त करने में मदद करेगी। इसके अतिरिक्त, नीति आयोग द्वारा ओडीआर पुस्तिका व्यवसायों को ऐसा करने में सक्षम बनाती है।