संदर्भ:
हाल ही में, विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की गरीबी एवं समानता रिपोर्ट (Poverty and Equity Brief) में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि भारत में अत्यधिक गरीबी की दर वर्ष 2011 के 27.1% से घटकर वर्ष 2023 में 2.6% रह गई है। हालाँकि, आय में असमानता अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि शीर्ष 10% श्रमिकों की औसत आय निचले 10% श्रमिकों की तुलना में लगभग 13 गुना अधिक है।
अत्यधिक गरीबी के बारे में:
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- विश्व बैंक वर्ष 2021 की क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity-PPP) के आधार पर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 3 डॉलर की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा का उपयोग करके अत्यधिक गरीबी को परिभाषित करता है।
- यह भोजन, कपड़े, आवास और आवश्यक सेवाओं जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक न्यूनतम उपभोग स्तर को दर्शाता है।
- 3 डॉलर की यह सीमा विभिन्न देशों में जीवन-यापन की लागत में अंतर के अनुसार समायोजित की जाती है। यह बाजार विनिमय दर के आधार पर 3 अमेरिकी डॉलर को सीधे भारतीय रुपये में परिवर्तित करने के समान नहीं है।
- विश्व बैंक निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए प्रतिदिन 4.20 डॉलर और उच्च-मध्यम आय वाले देशों के लिए प्रतिदिन 8.30 डॉलर की गरीबी रेखा का भी उपयोग करता है।
- विश्व बैंक वर्ष 2021 की क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity-PPP) के आधार पर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 3 डॉलर की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा का उपयोग करके अत्यधिक गरीबी को परिभाषित करता है।
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रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
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- मौद्रिक गरीबी में तीव्र गिरावट: विश्व बैंक की प्रतिदिन 3 डॉलर की गरीबी रेखा (वर्ष 2021 PPP) के अनुसार, भारत में अत्यधिक गरीबी की दर वर्ष 2011 के 27.1% से घटकर वर्ष 2023 में 2.6% रह गई। 4.20 डॉलर की गरीबी रेखा के अंतर्गत भी गरीबी 57.7% से घटकर 16.1% हो गई, जिससे लगभग 496 मिलियन लोग इस गरीबी रेखा से ऊपर आ गए। हालाँकि, लगभग 35 मिलियन लोग अभी भी अत्यधिक गरीबी में और 232 मिलियन लोग 4.20 डॉलर की गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे थे।
- बहुआयामी गरीबी में गिरावट: ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा प्रकाशित भारत का बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) वर्ष 2005–06 के 53.8% से घटकर वर्ष 2019–21 में 16.4% रह गया। विश्व बैंक का बहुआयामी गरीबी माप वर्ष 2022–23 में 15.5% रहा, जो शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सेवाओं तक बेहतर पहुँच को दर्शाता है।
- आय असमानता का बने रहना: गरीबी में कमी के बावजूद आय संबंधी असमानताएँ अभी भी महत्त्वपूर्ण बनी हुई हैं। वर्ष 2023–24 में शीर्ष 10% श्रमिकों की औसत आय निचले 10% श्रमिकों की तुलना में लगभग 13 गुना अधिक थी। वर्ष 2023 में भारत का गिनी सूचकांक (Gini Index) 23 दर्ज किया गया। यह समग्र उपभोग असमानता और मजदूरी संबंधी असमानता के बीच अंतर को समझने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
- अनुपातिक वेतन वृद्धि के बिना रोजगार में वृद्धि: वर्ष 2017 से 2023 के बीच भारत में लगभग 134 मिलियन नए रोजगार जुड़े, जिसका एक कारण विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के रोजगार में वृद्धि रहा। हालाँकि, वास्तविक आय में व्यापक रूप से कोई बदलाव नहीं हुआ, जबकि युवाओं में बेरोजगारी दर वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के 14.6% से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 15.9% हो गई। यह उत्पादक, सुरक्षित और पर्याप्त वेतन वाले रोजगार सृजित करने की आवश्यकता को दर्शाता है।
- ग्रामीण-शहरी और क्षेत्रीय असमानताएँ: 4.20 डॉलर की गरीबी रेखा के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी की दर 19.3% थी, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 8.6% थी। उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले राज्यों में भारत की कुल गरीब आबादी का लगभग 57% हिस्सा निवास करता था। यह क्षेत्रीय और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं के बने रहने को दर्शाता है।
- मौद्रिक गरीबी में तीव्र गिरावट: विश्व बैंक की प्रतिदिन 3 डॉलर की गरीबी रेखा (वर्ष 2021 PPP) के अनुसार, भारत में अत्यधिक गरीबी की दर वर्ष 2011 के 27.1% से घटकर वर्ष 2023 में 2.6% रह गई। 4.20 डॉलर की गरीबी रेखा के अंतर्गत भी गरीबी 57.7% से घटकर 16.1% हो गई, जिससे लगभग 496 मिलियन लोग इस गरीबी रेखा से ऊपर आ गए। हालाँकि, लगभग 35 मिलियन लोग अभी भी अत्यधिक गरीबी में और 232 मिलियन लोग 4.20 डॉलर की गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे थे।
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भारत में गरीबी में कमी के पीछे के कारण:
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- विश्व बैंक ने उपभोग में मजबूत वृद्धि, रोजगार में बढ़ोतरी (विशेष रूप से महिलाओं के बीच) और खाद्य सब्सिडी सहित सामाजिक हस्तांतरण के विस्तार को गरीबी में कमी के प्रमुख कारकों के रूप में पहचाना है।
- इसके अतिरिक्त, मनरेगा (MGNREGA), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान भारत जैसी सरकारी पहलों ने भी परिवारों के कल्याण तथा बुनियादी सेवाओं तक पहुँच में सुधार करने में योगदान दिया है।
- विश्व बैंक ने उपभोग में मजबूत वृद्धि, रोजगार में बढ़ोतरी (विशेष रूप से महिलाओं के बीच) और खाद्य सब्सिडी सहित सामाजिक हस्तांतरण के विस्तार को गरीबी में कमी के प्रमुख कारकों के रूप में पहचाना है।
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निष्कर्ष:
भारत में अत्यधिक गरीबी में कमी समावेशी विकास की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हालाँकि, केवल गरीबी में कमी आर्थिक समानता की गारंटी नहीं देती है। अब ध्यान उत्पादक रोजगार सृजित करने, वास्तविक मजदूरी में सुधार करने, क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और अवसरों तक समान पहुँच सुनिश्चित करने पर केंद्रित होना चाहिए।

