अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (AMOC)
संदर्भ:
हाल ही में एक वैज्ञानिक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (AMOC), जो पृथ्वी की जलवायु को नियंत्रित करने वाली सबसे महत्वपूर्ण महासागरीय प्रणालियों में से एक है, वर्ष 2100 तक लगभग 59% तक कमजोर हो सकता है।
अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (AMOC) के बारे में:
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- अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन को एक विशाल “महासागरीय संवहन पट्टी (ओशन कन्वेयर बेल्ट)” है, जो अटलांटिक महासागर में ऊष्मा और पोषक तत्वों का परिसंचरण करती है। यह वैश्विक महासागरीय प्रणाली का हिस्सा है, जिसे ऊष्मा-लवणीय परिसंचरण (थर्मोहेलाइन सर्कुलेशन) कहा जाता है।
- उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से गर्म सतही जल AMOC द्वारा उत्तर दिशा की ओर ले जाया जाता है। जब यह जल आर्कटिक क्षेत्र में पहुँचता है, तो यह ठंडा होकर अधिक घना हो जाता है और समुद्र की गहराई में डूब जाता है।
- इसके बाद यह ठंडा और घना जल गहराई में दक्षिण दिशा की ओर प्रवाहित होता है और अंततः ऊपर उठकर इस चक्र को पूरा करता है। यह निरंतर प्रक्रिया पृथ्वी की जलवायु को संतुलित रखने में मदद करती है, क्योंकि यह दोनों गोलार्द्धों में ऊष्मा का पुनर्वितरण करती है।
- अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन को एक विशाल “महासागरीय संवहन पट्टी (ओशन कन्वेयर बेल्ट)” है, जो अटलांटिक महासागर में ऊष्मा और पोषक तत्वों का परिसंचरण करती है। यह वैश्विक महासागरीय प्रणाली का हिस्सा है, जिसे ऊष्मा-लवणीय परिसंचरण (थर्मोहेलाइन सर्कुलेशन) कहा जाता है।
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AMOC के कमजोर होने के कारण:
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- AMOC तापमान और लवणता के नाजुक संतुलन पर निर्भर करता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन इस संतुलन को बिगाड़ रहा है। आर्कटिक बर्फ के तेजी से पिघलने के कारण उत्तर अटलांटिक में बड़ी मात्रा में मीठा पानी (स्वच्छ जल) जुड़ रहा है। मीठा पानी कम घनत्व वाला होता है और आसानी से नीचे नहीं डूबता, जिससे वह गहन जल निर्माण प्रक्रिया कमजोर हो जाती है जो AMOC को संचालित करती है।
- पहले के अध्ययनों में पिछले कुछ दशकों में लगभग 15% की गिरावट का अनुमान लगाया गया था, लेकिन समुद्री अवलोकनों पर आधारित नवीन शोध संकेत देते हैं कि यह प्रणाली वर्ष 2100 तक लगभग 59% तक कमजोर हो सकती है। वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि AMOC एक संभावित “जलवायु टर्निंग प्वाइंट (अपरिवर्तनीय मोड़)” है, जिसका अर्थ है कि एक निश्चित सीमा पार होने पर यह स्थायी रूप से कमजोर अवस्था में जा सकता है।
- AMOC तापमान और लवणता के नाजुक संतुलन पर निर्भर करता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन इस संतुलन को बिगाड़ रहा है। आर्कटिक बर्फ के तेजी से पिघलने के कारण उत्तर अटलांटिक में बड़ी मात्रा में मीठा पानी (स्वच्छ जल) जुड़ रहा है। मीठा पानी कम घनत्व वाला होता है और आसानी से नीचे नहीं डूबता, जिससे वह गहन जल निर्माण प्रक्रिया कमजोर हो जाती है जो AMOC को संचालित करती है।
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वैश्विक जलवायु प्रभाव:
AMOC के कमजोर होने से वैश्विक जलवायु में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हो सकते हैं। इससे उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट पर समुद्र-स्तर में वृद्धि, वर्षा के पैटर्न में बदलाव तथा तूफानों के मार्ग (स्टॉर्म ट्रैक्स) में परिवर्तन हो सकता है। यह दोनों गोलार्द्धों के बीच ऊष्मा वितरण को भी प्रभावित करता है, जिससे दक्षिणी गोलार्द्ध में अधिक गर्मी, जबकि उत्तरी गोलार्द्ध के कुछ हिस्सों में ठंडक बढ़ सकती है।
एल नीनो और वैश्विक मौसम प्रणालियों से संबंध:
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- AMOC अन्य वैश्विक जलवायु प्रणालियों, जैसे एल नीनो–दक्षिणी दोलन (ENSO), से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है। ENSO प्रशांत महासागर में होने वाला एक आवर्ती जलवायु पैटर्न है, जिसमें हर 2–7 वर्ष में गर्म (एल नीनो), ठंडा (ला नीना) और तटस्थ चरण आते हैं।
- कमजोर AMOC वैश्विक महासागरीय ऊष्मा वितरण को बदल सकता है, जिससे ENSO घटनाएँ अधिक अप्रत्याशित और तीव्र हो सकती हैं। इससे एशिया सहित कई महाद्वीपों में अनियमित वर्षा पैटर्न की संभावना बढ़ जाती है।
- AMOC अन्य वैश्विक जलवायु प्रणालियों, जैसे एल नीनो–दक्षिणी दोलन (ENSO), से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है। ENSO प्रशांत महासागर में होने वाला एक आवर्ती जलवायु पैटर्न है, जिसमें हर 2–7 वर्ष में गर्म (एल नीनो), ठंडा (ला नीना) और तटस्थ चरण आते हैं।
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भारत पर प्रभाव:
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- यद्यपि AMOC अटलांटिक महासागर में स्थित है, फिर भी यह वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव के माध्यम से परोक्ष रूप से भारतीय मानसून को प्रभावित कर सकता है।
- एक बाधित AMOC महासागरों में ऊष्मा के वितरण को बदल सकता है, जिससे मानसून के समय, तीव्रता और विश्वसनीयता पर प्रभाव पड़ सकता है।
- चूँकि भारत की कृषि, पेयजल आपूर्ति और जलविद्युत प्रणालियाँ मानसूनी वर्षा पर अत्यधिक निर्भर हैं, इसलिए छोटे-छोटे बदलाव भी बड़े सामाजिक-आर्थिक परिणाम उत्पन्न कर सकते हैं।
- यद्यपि AMOC अटलांटिक महासागर में स्थित है, फिर भी यह वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव के माध्यम से परोक्ष रूप से भारतीय मानसून को प्रभावित कर सकता है।
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निष्कर्ष:
AMOC पृथ्वी की जलवायु प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो वैश्विक स्तर पर ऊष्मा का वितरण करता है। जलवायु परिवर्तन के कारण इसका कमजोर होना गंभीर जोखिम उत्पन्न करता है। भारत के लिए मुख्य चिंता इसका मानसून पैटर्न पर प्रभाव है, जो खाद्य सुरक्षा, जल आपूर्ति और ग्रामीण आजीविका को प्रभावित करता है। इसलिए दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तनों के लिए जलवायु अनुकूलन क्षमता को मजबूत करना और पूर्वानुमान प्रणालियों में सुधार करना आवश्यक है।

